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1.6 करोड़ साल पहले गोंद में जम गया था सूक्ष्म प्राणी, अब वैज्ञानिकों ने दुर्लभ जीवाश्म से किए कई खुलासे

न्यूयॉर्क, 12 अक्टूबर। वैज्ञानिक कई सालों से पृथ्वी पर मौजूद प्राणियों की खोज कर रहे हैं। इस बीच कई ऐसी प्रजातियों के बारे में भी पता चला जो धरती पर पिछली कई करोड़ों साल पहले रहा करते थे। जब से हमारी पृथ्वी पर जीवन शुरू हुआ, तब से कई ऐसी प्रजातियों ने जन्म लिया जो अब विलुप्त हो चुकी हैं। हालांकि इतने सालों बाद ही हमारे वैज्ञानिक विलुप्त हो चुके जीवों के जीवाश्म से उनके बारे कई हैरान करने वाले खुलासे करते हैं।

1.6 करोड़ साल पुराना है जीवाश्व

1.6 करोड़ साल पुराना है जीवाश्व

हाल ही में अमेरिका स्थित हार्वर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं की मौजूदगी वाली एक टीम ने हाल ही में 1 करोड़ 60 लाख साल (16 मिलियन) पुराने टार्डिग्रेड के जीवाश्म की खोज की है। वैज्ञानिको को टार्डिग्रेड का जीवाश्म पेड़ से निकले हुए लार (गोंद) में मिला जो शायद 1.6 करोड़ साल पहले उसी में चिपक गया होगा। करीब 0.2 मिलीमीटर के इस जीवाश्म को पाया जाना वैज्ञानिको इसे बहुत बड़ी उपलब्धी बता रहे हैं।

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    क्या होता है टार्डिग्रेड?

    क्या होता है टार्डिग्रेड?

    अगर आप भी टार्डिग्रेड को नहीं जानते और पहली बार यह नाम सुन रहे हैं तो बता दें कि यह एक सूक्ष्मप्राणी है, जिसकी 8 टांगे होती हैं। इसे 'वॉटर बियर' (मॉस पिगलेट) के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि यह पानी में रहना पसंद करते हैं और इनका शरीर दिखने में भालू जैसे होता है। इस जीवाश्म को आधुनिक जीवित टार्डिग्रेड सुपरफैमिली 'आइसोहाइप्सिबायोइडिया' में से एक माना जा रहा है।

    कठिन परिस्थिति में भी रहते हैं जीवित

    कठिन परिस्थिति में भी रहते हैं जीवित

    मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक टार्डिग्रेड का जीवाश्म मिलना बेहद मुश्किल होता है। ये सूक्ष्म प्राणी किसी भी कठिन परिस्थिति में जीवित रह सकते हैं। यह ज्यादातर समुद्र या पतली पानी की परत में भी पाए जा सकते हैं। इस छोटे से जीव को खत्म कर पाना इतना आसान नहीं है, यह अपनी अद्भुत क्षमता की वजह से जीव विज्ञान में काफी लोकप्रिय है। यह चरम तापमान से लेकर दबाव और रेडिएशन को भी बर्दाश्त कर सकता है।

    सबसे बड़ी खोज

    सबसे बड़ी खोज

    एक पत्रिका में छपी रिसर्च के मुताबिक वैज्ञानिकों ने टार्डिग्रेड की नई प्रजाति की खोज का दावा किया है। यह सूक्ष्म जीव कैरिबियन में देश डोमिनिकन रिपब्लिक में गोंद के भीतर जम गया था। गोंद में यह टार्डिग्रेड इतना सुरक्षित है कि वैज्ञानिकों ने बड़ी आसानी से उसकी नई प्रजाति की खोज कर ली। यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ फ्लोरिडा के प्रफेसर फ्रेंक स्मिथ ने कहते हैं कि टार्डीग्रेड की तीसरी प्रजाति की खोज बहुत बड़ी बात है।

    इस तकनीक का हुआ अपयोग उपयोग

    इस तकनीक का हुआ अपयोग उपयोग

    प्रफेसर फ्रेंक स्मिथ ने इस अविश्वसनीय खोज को अच्छी किस्मत बताया है। उन्होंने कहा, जीवाश्म इतनी अच्छी स्थिति में था कि वैज्ञानिकों ने उस पर जीवित टार्डीग्रेड पर इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक का उपयोग किया। इसका आकार 0.02 इंच से भी छोटा है। रिसर्च के लेखक और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के छात्र Marc Mapalo ने इसकी खोज को 'अच्छी किस्मत' बताया है।

    9.9 करोड़ साल पुरानी मकड़ी

    9.9 करोड़ साल पुरानी मकड़ी

    बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब वैज्ञानिकों को ऐसा दुर्लभ जीवाश्म मिला हो। इससे पहले भारत के पड़ोसी देश म्यांमार में एक मकड़ी का जीवाश्म मिला था। करीब 99 मिलियन (9.9 करोड़) साल पहले एक वयस्क मादा मकड़ी और उसका अंडा पेड़ से टपकने वाली लार में जम गया था। वर्तमान में मकड़ियों का लैगोनोमेगोपिड परिवार अब गायब हो चुका है लेकिन इनका इतिहास काफी लंबा और पुराना है।

    यह भी पढ़ें: VIDEO: तालाब से मछली पकड़ रहा था बच्चा, अचानक आया मगरमच्छ और चुरा ले गया फिश

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