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बदला गया बांग्लादेश में स्कूली पाठ्यक्रम,शेख हसीना के बयान गायब, हटाई गई इंदिरा गांधी से जुड़ी तस्वीरें

Bangladesh News: बांग्लादेश की मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने स्कूली पाठ्यपुस्तकों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इन बदलावों में खासतौर पर देश के संस्थापक शेख मुजीबुर्रहमान और उनकी बेटी, पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना से जुड़ी सामग्री को हटा दिया गया है। इसके साथ ही भारत के बांगलादेश की स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को भी कमतर दिखाने की कोशिश की गई है। हालांकि भारत की भूमिका अभी भी पाठ्यपुस्तकों में बनी हुई है, लेकिन कई तस्वीरों को हटा दिया गया है।

बांग्लादेश में अगस्त 2024 में विरोध प्रदर्शनों के बाद शेख हसीना की सरकार गिर गई थी। इसके बाद दक्षिणपंथी रुख वाली अंतरिम सरकार ने कई बदलावों की शुरुआत की है, जिसमें शिक्षा पाठ्यक्रम में किए गए ये बदलाव भी शामिल हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश शिक्षा मंत्रालय ने 57 विशेषज्ञों की एक टीम बनाई है, जिसने 441 स्कूली किताबों में संशोधन किए हैं। ये किताबें प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर पर पढ़ाई जाती हैं। इन बदलावों के बाद 40 करोड़ से अधिक नई किताबें प्रकाशित की गई हैं।

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छुपाया भारत और इंदिरा गांधी से जुड़ा इतिहास

इन बदलावों में कक्षा छह की अंग्रेजी पाठ्यपुस्तक से शेख मुजीब और तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की दो तस्वीरें हटा दी गई हैं। एक तस्वीर में मुजीब भाषण दे रहे हैं और गांधी उनके साथ मंच पर हैं, जबकि दूसरी तस्वीर 17 मार्च 1972 की है, जब मुजीब ने ढाका हवाई अड्डे पर इंदिरा गांधी का स्वागत किया था। इसके अलावा, मुजीब की अन्य दुनिया के बड़े नेताओं के साथ की तस्वीरें भी पुस्तकों से हटा दी गई हैं।

राष्ट्रीय ध्वज और गान का स्थान भी बदला
पाठ्यपुस्तकों में किए गए अन्य बदलावों में राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान को पहले पृष्ठ से हटा कर आखिरी पृष्ठ पर रखा गया है। यह संकेत मिलता है कि भविष्य में इन्हें पूरी तरह से हटाया भी जा सकता है। इस बदलाव में बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम (मुक्तिजुद्धो) के कई नेताओं को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। इनमें मौलाना अब्दुल हमीद खान भाषानी, हुसैन सुहरावर्दी, अबुल कासम फजलुल हक, ताजुद्दीन अहमद और खालिदा जिया का नाम जोड़ा गया है।


पाकिस्तान के आत्मसमर्पण की तस्वीर बरकरार

नई किताबों में मुक्ति संग्राम के दौरान भारत और मित्र बहिनी (भारतीय सेना और मुक्ति वाहिनी का गठबंधन) की भूमिका को बरकरार रखा गया है। कक्षा 5 की पाठ्यपुस्तक में 'पाकिस्तानी बहिनीर अंतमोसमर्पण ओ अमादेर बिजॉय' (पाक सेना का आत्मसमर्पण और हमारी जीत) शीर्षक वाले अध्याय में 1971 के आत्मसमर्पण की तस्वीर को जारी रखा गया है। इसमें बताया गया है कि कैसे भारतीय सेना और मुक्तिजोधों (बांग्लादेशी स्वतंत्रता सेनानियों) ने मिलकर पाकिस्तानी सेना को हराया था। पाकिस्तान से यूनुस सरकार के रिश्ते को देखते हुए इसे किताबों से हटाने का अंदेशा था, लेकिन यह तस्वीर बरकरार रखी गई है।

ये बदलाव बांग्लादेश की शिक्षा प्रणाली में हो रहे व्यापक राजनीतिक बदलावों का हिस्सा हैं, जो देश के इतिहास और राजनीतिक दृष्टिकोण को नया आकार देने की कोशिश कर रहे हैं।

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