सऊदी अरब में महिलाओं को मिला ऐतिहासिक अधिकार, शरिया कानून की धारा को हटाया

सऊदी अरब सरकार का ये फैसला ऐतिहासिक माना जा रहा है, क्योंकि अब तक सऊदी अरब में किसी भी महिला का अकेले रहना गैर-कानूनी माना जाता था और उनका किसी ना किसी मेल गार्जियन के साथ रहना जरूरी था।

रियाद, जून 12: पिछले कुछ महीनों से सऊदी अरब लगातार महिलाओं के अधिकार में इजाफा कर रहा है और सऊदी अरब धीरे धीरे खुद को कट्टरवादी छवि से बाहर लाने की कोशिश कर रहा है। कुछ महीने पहले सऊदी अरब ने महिलाओं को कार चलाने की आजादी दे दी थी और अब सऊदी अरब ने नया कानून बनाते हुए महिलाओं को अकेले रहने की आजादी भी दे दी है। यानि, अब अगर सऊदी अरब की महिलाएं अकेले रहना चाहें, तो उन्हें किसी से भी इजाजत लेने की जरूरत नहीं होगी।

महिलाओं को बड़ी आजादी

महिलाओं को बड़ी आजादी

सऊदी अरब सरकार का ये फैसला ऐतिहासिक माना जा रहा है, क्योंकि अब तक सऊदी अरब में किसी भी महिला का अकेले रहना गैर-कानूनी माना जाता था और उनका किसी ना किसी मेल गार्जियन के साथ रहना जरूरी था। गल्फ न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, हर सऊदी अरब की महिला को किसी ना पुरुष रिश्तेदार के साथ रहना जरूरी था। ज्यादातर वक्त पिता, भाई या फिर पति के साथ महिलाएं रहती थीं। लेकिन, कई बार महिलाओं को अपने दूसरे रिश्तेदार, जैसे चाचा ये बेटों के साथ रहना पड़ता था। वहीं, सऊदी अरब में अगर किसी लड़की या महिला को शादी करने के लिए अपने बेहद नजदीकी रिश्तेदार, यानि पिता या भाई या घर के किसी दूसरे सदस्य से लिखित इजाजत लेना जरूरी था। वहीं, पासपोर्ट बनवाने के साथ साथ किसी दूसरे देश जाने के लिए भी नजदीकी रिश्तेदार से लिखित में लेना होता था। ऐसे में सऊदी अरब के इस कानून का काफी आलोचना की जाती थी और कहा जाता था कि इन कानूनों के चलते महिलाएं सऊदी अरब में सेकेंड क्लास नागरिक जैसी हैं और इन हालातों में उनके लिए आर्थिक तौर पर सक्षम होना या कैरियर में आग बढ़ना काफी ज्यादा मुश्किल था।

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    सरकार का ऐतिहासिक फैसला

    सरकार का ऐतिहासिक फैसला

    गल्फ न्यूज की रिपोर्ट के मुताबित सऊदी किंगडम के ज्यूडिशियल अथॉरिटी ने संविधान की उस धारा को खत्म कर दिया है, जिसमें महिलाओं पर इस तरह की पाबंदियां लगीं थीं। गल्फ न्यूज की रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य के न्यायिक अधिकारियों ने "शरिया कानून" के अनुच्छेद संख्या 169 के तहत पैराग्राफ बी को खत्म कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि एक वयस्क एकल, तलाकशुदा या विधवा महिला को उसके पुरुष अभिभावक को सौंप दिया जाएगा। सऊदी किंगडन ने शरिया कानून को खत्म करते हुए महिलाओं को नया अधिकार दिया है। जिसमें कहा गया है कि 'एक महिला अपनी मर्जी के मुताबिक जहां मर्जी हो वहां रह सकती हैं और ऐसा करना उनका हक है।' नये कानून में कहा गया है कि 'एक महिला के खिलाफ उसका कोई अभिभावक उसी सूरत में रिपोर्ट दाखिर कर सकता है, जब उसके पास सबूत हों कि उस महिला ने कोई गलत काम किया है या कोई अपराध किया है'

    महिलाओं को लेकर बना कानून

    महिलाओं को लेकर बना कानून

    सऊदी सरकार ने महिलाओं के अधिकारों को लेकर कई तरह की घोषणाएं की हैं। जिसमें कहा गया है कि अगर किसी महिला तो जेल की सजा मिली है तो जेल की सजा पूरी करने के बाद उस महिला को उसके गार्जियन के हवाले नहीं किया जाएगा। नये कानून में कहा गया है कि 'नये कानून के तहक कोई परिवार अपनी बेटी के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं करा सकते हैं, अगर उनकी बेटी ने अपनी जिंदगी अलग बिताने का फैसला लिया है। लड़की का अधिकार है कि वो अपनी मर्जी से जीवन बिताए।' यानि, अब अगर कोई पिता या भाई परिवार की बेटी के खिलाफ कोर्ट में इस तरह की मुकदमा दायर करता है तो उसे खारिज कर दिया जाएगा और कोर्ट उसपर कोई एक्शन नहीं लेगा।

    क्राउन प्रिंस का विजन-2030

    क्राउन प्रिंस का विजन-2030

    दरअसल, सऊदी अरब सरकार तेजी से विजन-2030 को पूरी करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। जिसके तहत सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने स्कूल की किताबों में रामायण, महाभारत, गीता और योग को शामिल किया था। वहीं, सऊदी अरब के बच्चों के लिए इंग्लिश की शिक्षा लेना जरूरी कर दिया गया था। मोहम्मद बिन सलमान विजन-2030 के तहत लगातार सामाजिक और कानूनी सुधारों को देश में लागू कर रहे हैं। सऊदी अरब में महिलाओं को अभी भी काफी कम अधिकार हासिल हैं और महिलाओं से भेदभाव को लेकर विश्व के 144 देशों में सऊदी अरब 138वें स्थान पर है। वहीं, महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक स्थिति भी काफी खराब है। लिहाजा, सऊदी सरकार ने महिलाओं को अब धीरे धीरे आजादी देनी शुरू कर दी है।

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