इजराइल-ईरान मरने-मारने पर उतारू, तबाही के कगार पर मिडिल ईस्ट, सऊदी अरब ने क्यों साध रखी है चुप्पी?
Saudi Arab Israel-Iran Conflict: हमास नेता इस्माइल हानिया की हत्या के बाद ईरान और इजराइल के बीच तनाव उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है और ईरान के सुप्रीम लीडर ने हमास नेता की हत्या की बदला लेने की कसम खाई है, जबकि ईरान के एक अखबार ने दावा किया है, कि इस बार का ईरानी हमला इजराइल के हाइफा और तेल अवीव जैसे शहरों पर हो सकती है।
जबकि, हिज्बुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह ने संकेत दिया है, कि इजरायल पर कॉर्डिनेटेड हमला हो सकता है, क्योंकि इजरायल ने इस्माइल हानिया की हत्या से 24 घंटे से भी कम समय पहले बेरूत में ईरान समर्थित समूह के हिज्बुल्लाह के शीर्ष कमांडरों में से एक की हत्या कर दी थी।

गुरुवार को एक भाषण में उन्होंने कहा, "क्योंकि उन्होंने सभी के साथ लड़ाई शुरू कर दी है, इसलिए उन्हें नहीं पता, कि प्रतिक्रिया कहां से आएगी... प्रतिक्रिया अलग-अलग या एक साथ आएगी।"
यानि, एक भीषण संघर्ष कभी भी शुरू हो सकता है, लेकिन मिडिल ईस्ट के सबसे बड़े खिलाड़ी सऊदी अरब का एक भी बयान सामने नहीं आ रहा है। इस पूरे तनाव की खबरों में सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात, जिनका सबसे ज्यादा प्रभाव मिडिल ईस्ट में है, वो कहीं चर्चा में ही नहीं हैं, जबकि तुर्की और पाकिस्तान जैसे देश भी इजराइल के खिलाफ फुंफकार रहे हैं। तो फिर सवाल ये उठ रहे हैं, कि आखिर सऊदी अरब की चुप्पी के क्या मायने हैं?
गाजा युद्ध पर अभी तक सऊदी की क्या भूमिका रही है?
7 मई को सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने उस वक्त इजराइल के खिलाफ तीखा बयान जारी किया था, जब इजरायली सेना ने फिलिस्तीनी शहर राफा को निशाना बनाया था, जिससे हजारों लोगों की जान खतरे में पड़ने की आशंका जताई जा रही थी और जहां गाजा के विस्थापितों के लिए शरणस्थली बनाया गया है।
7 मई को अपने बयान में पहली बार सऊदी अरब ने इजराइल के खिलाफ सख्त अल्फाजों का इस्तेमाल किया और इजराइल की कार्रवाइयों को 'नरसंहार' करार दिया। लेकिन, उस घटना के बाद फिर से सऊदी अरब गाजा की तरफ पीठ करके सो गया।
गाजा में भीषण युद्ध और विनाश होने के बावजूद पिछले करीब 9 महीनों से सऊदी किंगडम संतुलन बनाने में लगा हुआ है। सऊदी अरब और उसके सर्वशक्तिमान क्राउन प्रिंस, मोहम्मद बिन सलमान, जिन्हें 'MBS' कगा जाता है, वो गाजा युद्ध पर स्पष्ट रूख अपनान में नाकाम रहे हैं, जिसमें अभी तक हजारों फिलीस्तीनी मारे गये हैं।
कुछ रिपोर्ट्स में तो यहां तक कहा गया है, कि 7 अक्टूबर को दक्षिणी इजराइल पर हमास के क्रूर हमले को लेकर सऊदी किंगडम का मानना है, कि हमास ने लाल रेखा पार कर दी थी।
वहीं, कई एक्सपर्ट्स का मानना है, कि ज्यादातर अरब देश, जिनकी भले ही इजराइल से नहीं बनती है, वो हमास को खत्म होते हुए देखना चाहते हैं। वहीं, सऊदी अरब अभी भी इजराइल के साथ अपने संबंधों को सामान्य करने के लिए अमेरिका की मध्यस्थता में किसी डील पर पहुंचने की कोशिश कर रहा है और यही वजह है, कि अमेरिकी अधिकारियों ने बार बार रियाद का दौरा किया है। ऐसा माना जा रहा है, कि सऊदी अरब और अमेरिका के बीच सिविल न्यूक्लियर डील को लेकर बातचीत चल रही है, जिसके तहत सऊदी अरब अमेरिकी मदद से अपनी जमीन पर न्यूक्लियर पावर प्लांट के निर्माण का सपना देख रहा है। सऊदी अरब को न्यूक्लियर शक्ति के तौर पर देखने का प्रिंस सलमान का पुराना सपना भी हिलोरें मारता रहता है, ताकि ईरान और तुर्की को संतुलित रखा जा सके।

सऊदी अरब ने क्यों साध रखी है चुप्पी?
सऊदी अरब, ईरान और इजरायल के साथ क्षेत्र में शक्ति के एक प्रमुख ध्रुव के रूप में स्थित होने के बावजूद, चल रहे गाजा संघर्ष में काफी कम डिप्लोमेटिक तरीके से एक्टिव है।
इसके अलावा इसी साल सऊदी अरब के राजदूत ने ईरान इस्फ़हान शहर में आयोजित परमाणु विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर ईरान के पहले सम्मेलन में हिस्सा लिया था, और उनकी यात्रा से कुछ ही दिन पहले इजराइल ने इस शहर पर मिसाइलों से हमला किया था, जो यह दर्शाता है, कि रियाद एक क्षेत्रीय संघर्ष को रोकने में भूमिका निभाने के लिए तैयार है, लेकिन वो व्यापक तौर पर इजराइल और ईरान के बीच के संघर्ष में शामिल नहीं होगा।
लिहाजा, सऊदी अरब की डिप्लोमेसी कई लोगों को हैरान कर सकती है, लेकिन इसे समझना उतना मुश्किल भी नहीं है।
क्राउन प्रिंस एमबीएस के शासनकाल में, सऊदी अरब ने देश की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए एक व्यापक, महत्वाकांक्षी और चुनौतीपूर्ण योजना शुरू की है। सरल शब्दों में, योजना यह है, कि अपनी अर्थव्यवस्था को पेट्रोडॉलर की लत से आजाद किया जाए और देश को ऊर्जा की खपत में भारी बदलावों से भविष्य के लिए सुरक्षित किया जाए, क्योंकि दुनिया हाइड्रोकार्बन से नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बढ़ रही है।
यानि, सऊदी अरब पेट्रोल और डीजल पर निर्भर अपनी अर्थव्यवस्था को बाजार स्थिति अर्थव्यवस्था में बदलना चाहता है। हालांकि, अभी भी पेट्रोल और डीजल की वजह से सऊदी अरब के खजाने में डॉलर्स की बरसात हो रही है, लेकिन सऊदी अरब भविष्य की ओर देख रहा है। सऊदी किसी संघर्ष में उलझने का कोई इरादा नहीं रखता है। और पिछले 9 महीने में गाजा में युद्ध को लेकर उसकी चुप्पी साफ साफ शब्दों में यही बयान करती है।
क्राउन प्रिंस MBS के सुहाने सपने
क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान यानि MBS, सैकड़ों अरब डॉलर का निवेश बुनियादी ढांचे के निर्माण पर कर रहे हैं, जिससे विदेशी निवेश आकर्षित होगा, साथ ही अर्थव्यवस्था में विविधता लाने और मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस सेक्टर, पर्यटन, मनोरंजन आधारित इकोनॉमी को पंख लगेंगे।
सरल शब्दों में, एमबीएस जो चाहते हैं वह दुबई या अबू धाबी का सऊदी का अपना संस्करण है। दुबई हाल ही में दुनिया में सबसे ज्यादा करोड़पतियों वाला शहर बन गया है, उनमें से 72,500 से ज्यादा लोग अमीराती महानगर को अपना घर कहते हैं। सऊदी अरब, वैकल्पिक विकल्प पेश करने की उम्मीद कर रहे हैं।
इसीलिए MBS ने देश के उन कट्टरपंथी ताकतों पर चाबुक चलाया है, जो क्राउन प्रिंस के सपनों के आगे आ रहे थे। उन्होंने देश की नई पीढ़ी को उदारवादी बनाने के लिए सऊदी के स्कूलों में गीता, रामायण, ईसाई धर्म की किताबों को शामिल करवाया है, ताकि नई पीढ़ी सहिष्णु हो और इस फैसले का विरोध करने वाले कई मौलवी अब स्थायी तौर पर जेल में बंद हैं।
यूएई की तरह ही सऊदी अरब भी एक बार फिर युद्ध में उलझने को अपने आर्थिक लक्ष्यों के लिए खतरनाक मानता है। और सऊदी अरब की ही तरह संयुक्त अरब अमीरात ने भी गाजा संकट और मौजूदा ईरान-इजराइल तनाव पर एक समान प्रतिक्रिया बनाए रखी है। UAE ने गाजा युद्ध के 9 महीने बाद भी इजराइल के साथ अपने डिप्लोमेटिक संबंध खत्म नहीं किए हैं, जो उसने 2020 में अमेरिका की मध्यस्थता में अब्राहम अकॉर्ड के तहत इजराइल के साथ बनाए थे।
UAE की नीति पूरी तरह से इस बात पर आधारित है, कि अगर इजराइल और अमेरिका के साथ ईरान टकराता है, तो वो किसी भी तरह से इसका हिस्सा ना बने। सऊदी की भी यही कोशिश लग रही है।
हालांकि, सउदी अरब के लिए UAE जैसे रूख पर कामय रखना मुश्किल होगा। दो पवित्र मस्जिदों का घर होने के कारण, दुनिया भर की मुस्लिम आबादी सऊदी अरब को काफी महत्व देती है और सऊदी अरब को लेकर उनकी काफी अपक्षाएं हैं, जिन्हें क्राउन प्रिंस नजरअंदाज नहीं कर सकते।
क्या सऊदी की इस्लामिक देशों की नेता होने की स्थिति कमजोर होगी?
एक्सपर्ट्स का मानना है, कि ईरान, जो कि एक शिया देश है, और जो आज फिलिस्तीनी लोगों और उनके हितों के लिए इजराइल से भिड़ने के लिए तैयार है, उसे क्राउन प्रिंस एक सीमा से ज्यादा अनदेखा नहीं कर सकते हैं।
और अगर वो इसे अनदेखा करते हैं, तो सिर्फ देश में ही नहीं, बल्कि मिस्र जैसे अन्य देशों में भी मुस्लिम ब्रदरहुड जैसे वैचारिक आंदोलनों पर उनकी कार्रवाई आने वाले महीनों में और भी कठिन हो सकती है।
वास्तव में, हमास का अपना इतिहास है, क्योंकि यह फिलिस्तीनी मुस्लिम ब्रदरहुड की ही एक शाखा है। सऊदी अरब में घरेलू भावना फिलिस्तीनियों के पक्ष में है, और सोशल मीडिया पर हमास के लिए उपजा जनसमर्थन क्राउन प्रिंस पर दबाव बढ़ाती है, क्योंकि उनकी चुप्पी, पूरी तरह से सऊदी की जनता की भावनाओं के विपरीत है।
वहीं, तुर्की भी इजराइल के खिलाफ आक्रामक है और क्राउन प्रिंस भलिभांति जानते हैं, कि तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन की चाहत क्या है। अर्दोआन खुद को इस्लामिक देशों के नेता के तौर पर प्रस्तुत करते हैं और तुर्की को नया खलीफा बनाने के लिए देश को नेता के तौर पर पेश कर रहे हैं और ये भी क्राउन प्रिंस को परेशान कर सकता है।
लेकिन, MBS के कुछ अलग सपने भी हैं। जब उन्होंने विजन-2030 को किंगडम में रखा था, तो परिवार ने ही उस प्रोजेक्ट के खिलाफ सवाल उठाए थे, लिहाजा उनका लक्ष्य हर हाल में इस प्रोजेक्ट को पूरा कर खुद को एक सफल लीडर साबित करना है और गाजा युद्ध में अगर वो शामिल होते हैं, तो ये प्रोजेक्ट अधर में लटक सकता है। लिहाजा, सऊदी अरब और मोहम्मद बिन सलमान शायद सबसे मुश्किल दोराहे पर अटके हुए हैं और सऊदी अरब की चुप्पी के पीछे यही अहम वजह हो सकते हैं।
-
Gold Rate Today: ईरान जंग के बीच लगातार गिर रहे सोने के भाव, अब 10 ग्राम की इतनी रह गई है कीमत, नए रेट -
UGC के नए नियमों पर आज फैसले की घड़ी! केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में देगी सफाई -
Iran US War: 'खुद भी डूबेंगे सनम तुम्हें भी ले डूबेंगे', ट्रंप पर भड़के बक्शी, कहा- Trump ने जनता से झूठ बोला -
PNG Connection: गैस संकट के बीच सबसे बड़ी गुड न्यूज! सिर्फ 24 घंटे में खत्म होगी किल्लत, सरकार ने उठाया ये कदम -
Gold Silver Price Crash: सोने-चांदी के दाम में बड़ी गिरावट, सिल्वर 13000, गोल्ड 5500 सस्ता, अब इतनी रह गई कीमत -
Gujarat UCC: मुस्लिम महिलाओं को हलाला से आजादी, दूसरी शादी पर 7 साल जेल! लिव-इन तक पर सख्त नियम, 5 बड़े फैसले -
Kangana Ranaut: 'कंगना-चखना सब चटनी है', मंडी सांसद पर भड़के ये दिग्गज नेता, कहा-'पर्सनल कमेंट पड़ेगा भारी' -
शुरू होने से पहले ही बंद होगा IPL? कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला, BCCI की उड़ गई नींद -
Silver Rate Today: जंग के बीच धड़ाम हुआ रेट, ₹15,000 सस्ती चांदी! आपके शहर में क्या है 10 ग्राम सिल्वर का भाव? -
Rajasthan Diwas 2026: 30 मार्च की जगह 19 को क्यों मनाया जा रहा राजस्थान दिवस? चौंका देगा तारीख बदलने का कारण! -
LPG Update: कितने दिन का बचा है गैस सिलेंडर का स्टॉक? LPG और PNG कनेक्शन पर अब आया मोदी सरकार का बड़ा बयान -
Hindu Nav Varsh 2026 Wishes :'राम करे आप तरक्की करें', नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं











Click it and Unblock the Notifications