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सऊदी-पाकिस्तान ज्वाइंट स्टेटमेंट में कश्मीर पर भारत का रूख शामिल, प्रिंस सलमान ने दिया शहबाज को झटका!

Saudi Arab-Pakistan: कश्मीर को लेकर सऊदी अरब ने पाकिस्तान को जोरदार झटका दिया है और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ एक संयुक्त बयान में कश्मीर पर भारत के रुख को दोहराया है।

दरअसल, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, दोबारा प्रधानमंत्री बनने के बाद सऊदी अरब के दौरे पर गये थे, जहां उन्होंने मोहम्मद बिन सलमान के साथ द्विपक्षीय बैठक ही है, जिसमें कश्मीर मुद्दे को उठाया गया था।

Saudi Arab-Pakistan

कश्मीर पर ज्वाइंट स्टेटमेंट में क्या है?

इस बैठक के बाद सऊदी-पाकिस्तान की तरफ से जारी एक ज्वाइंट स्टेटमेंट में कहा गया है, कि कश्मीर को लेकर दोनों देशों को आपस में बातचीत करनी चाहिए। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के रूप में शहबाज शरीफ, अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान शरीफ सऊदी अरब की अपनी पहली विदेश यात्रा पर हैं। उनकी यात्रा ऐसे समय हो रही है जब पाकिस्तान आर्थिक और सुरक्षा संकट का सामना कर रहा है।

अपनी मुलाकात के दौरान शहबाज शरीफ और एमबीएस ने नकदी संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए वित्तीय सहायता पर भी चर्चा की। उन्होंने गाजा पट्टी में चल रहे संघर्ष सहित क्षेत्रीय और वैश्विक विकास पर भी चर्चा की।

शहबाज शरीफ के साथ अपनी मुलाकात में क्राउन प्रिंस ने भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर विवाद और अन्य मुद्दों को सुलझाने के लिए द्विपक्षीय बातचीत के महत्व पर जोर दिया।

सऊदी नेता का रुख इस मुद्दे पर भारत की स्थिति से मेल खाता है। नई दिल्ली का लंबे समय से यह मानना रहा है, कि भारत और पाकिस्तान के बीच सभी मुद्दे द्विपक्षीय प्रकृति के हैं और इसमें किसी तीसरे देश या समूह के हस्तक्षेप के लिए कोई जगह नहीं है।

क्राउन प्रिंस के साथ शहबाज शरीफ की बैठक के बाद जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया है, कि "दोनों पक्षों ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए दोनों देशों के बीच लंबित मुद्दों, विशेष रूप से जम्मू और कश्मीर विवाद को हल करने के लिए पाकिस्तान और भारत के बीच बातचीत के महत्व पर जोर दिया।"

कश्मीर पर सालों से रहा है विवाद

विभाजन के बाद से ही भारत और पाकिस्तान के बीच जम्मू-कश्मीर को लेकर विवाद रहा है और दोनों देश, 1947-48, 1965, 1971 और 1999 में युद्ध लड़ चुके हैं। पाकिस्तान ने भी कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा दिया है और पाकिस्तान स्थित और वहां से समर्थन प्राप्त आतंकवादी समूहों ने कश्मीर के बाहर भी भारत में हमले किए हैं, जैसे दिल्ली में 2001 का संसद हमला और 2008 का मुंबई आतंकवादी हमला।

हाल के वर्षों में, नरेंद्र मोदी सरकार ने कहा है, कि बातचीत और आतंकवाद एक साथ नहीं चल सकते। वहीं, 2019 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था, कि पाकिस्तान के साथ बातचीत अब केवल जम्मू-कश्मीर के उस हिस्से पर होगी, जिस पर पाकिस्तान ने अवैध रूप से कब्जा कर रखा है।

इस बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने पाकिस्तान में 5 अरब डॉलर के निवेश की पेशकश की है। नकदी की कमी से जूझ रहा पाकिस्तान आर्थिक संकट से बाहर निकलने के लिए IMF के साथ बातचीत कर रहा है। और उसे एक और IMF प्रोग्राम की सख्त जरूरत है।

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