सऊदी अरब में नाबालिग अपराधियों को मृत्युदंड की सजा को खत्म किया गया
दुबई। सऊदी अरब की सरकार ने कोड़े बरसाने की सजा को खत्म करने के बाद एक और बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने नाबालिग अपराधियो को फांसी देने और कोड़े मारने की सजा को खत्म कर दिया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने कोड़े मारने की सजा को खत्म किया है। अब कोर्ट कोड़ मारने की सजा की बजाए जेल, जुर्माना, सामुदायिक सेवाओं की सजा सुना सकते हैं। किंग सलमान ने जो आदेश जारी किया है उसमे कहा गया है कि अल्पसंख्यक शिया समुदाय के कम से कम छह अपराधियों की ही मौत की सजा माफ हो सकती है, जिनकी उमर्र 18 वर्ष से कम हो। रविवार को सऊदी अरब के मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष अव्वाद अल अव्वाद ने बयान जारी करके इस नए फैसले की पुष्टि की है।

कोड़े मारने की सजा को खत्म किए जाने के बाद सऊदी अरब के उच्चतम न्यायालय का कहना है कि ताजा सुधार का लक्ष्य देश को शारीरिक दंड के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों के मानदंडों के और करीब लाना है। फिलहाल विवाहेत्तर यौन संबंध, शांति भंग करना और हत्या तक के मामलों में अदालतें आसानी से दोषी को कोड़े मारने की सजा सुना सकती थीं। रिपोर्टों के मुताबिक, सऊदी अरब में एक संहिताबद्ध कानून प्रणाली का अभाव है। यहां जज शरिया या इस्लामी कानून का हवाला देते हुए दोषियों को अपने हिसाब से सजा सुनाते हैं। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि देश में मानवाधिकार की हालत काफी खराब है। यहां अभिव्यक्ति की आजादी नहीं है और सरकार की आलोचना करने वालों को जेल में ठूंस दिया जाता है। हाल में देश में महिलाओं से संबंधित कई अहम बदलाव भी किए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के जनरल कमीशन के फैसले की आधिकारिक कॉपी के मुताबिक, अब सऊदी अरब में कोड़े मारने की सजा के बजाय भविष्य में न्यायाधीशों को जुर्माना, जेल या फिर सामुदायिक सेवा जैसी सजाएं चुननी होंगी। दस्तावेज में कहा गया है कि शीर्ष अदालत का यह फैसला राजा सलमान के निर्देशन और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की प्रत्यक्ष देखरेख में शुरू किए गए मानवाधिकार सुधारों का विस्तार है।












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