सऊदी अरब ने अमेरिका को दिया बहुत बड़ा झटका, चीन की जासूसी कंपनी को देश में बुलाया

सऊदी अरब और अमेरिका के बीच संबंध हालिया समय में काफी खराब हो गये हैं और अमेरिका की तरफ से सऊदी अरब को अंजाम भुगतने तक की धमकी दी गई है।

Saudi Arab-China-America

Saudi Arab-China-America: कभी अमेरिका के सबसे बड़े सहयोगियों में शामिल रहे सऊदी अरब ने अब हर मोर्चे पर अमेरिका को झटका देना शुरू कर दिया है और पेट्रोल पर जो बाइडेन की मांगों को सिरे से खारिज करने के बाद अब सऊदी अरब ने चीन की जासूसी कंपनी के लिए अपने देश में रेड कार्पेट बिछा दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसी महीने शी जिनपिंग की रियाद यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच जो समझौते हुए हैं, अब उन समझौतों का असर दिखने लगा है।

जासूसी कंपनी को दिया देश में न्योता

जासूसी कंपनी को दिया देश में न्योता

सऊदी अरब के अखबार अल अरबिया पोस्ट के मुताबिक, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सऊदी अरब की हाई-प्रोफाइल यात्रा के दौरान इस महीने कई रणनीतिक सौदों पर हस्ताक्षर किए गये हैं और उन समझौतों ने वैश्विक ध्यान आकर्षित किया है, जिसमें विवादास्पद चीनी तकनीकी दिग्गज हुआवेई भी शामिल है। सऊदी अरब के अखबार ने कहा है कि, चीन की विवादित हुआवेई टेक्नोलॉजीज पर सौदा सऊदी शहरों में क्लाउड कंप्यूटिंग, डेटा सेंटर और उच्च तकनीक परिसरों के निर्माण से संबंधित है। आपको बता दें कि, हुआवेई वो कंपनी है, जिसपर कई देशों ने जासूसी करने का आरोप लगाया है और अपने देशों में बैन कर दिया है। ये कंपनी चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के लिए काम करती है और देशों से डेटा चुराकर चीन भेजती है।

अमेरिका की सुरक्षा को खतरा

अमेरिका की सुरक्षा को खतरा

चीन और सऊदी अरब के बीच ये सौदा उस वक्त हुआ है, जब अमेरिका ने हाल ही में राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिमों का हवाला देते हुए चीन की हुआवेई टेक्नोलॉजीज और जेडटीई से नए दूरसंचार उपकरणों की खरीद और अमेरिका में इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया था। चीनी नेता शी जिनपिंग की सऊदी अरब की तीन दिवसीय यात्रा और महत्वपूर्ण खाड़ी सहयोग परिषद के नेताओं के साथ उनकी बातचीत, साथ ही रियाद के साथ दर्जनों समझौतों पर हस्ताक्षर से पता चलता है, कि बीजिंग इस क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है। हालांकि, क्षेत्रीय विश्लेषक जॉन सोलोमो के अनुसार, यह पहल अमेरिकी सुरक्षा भूमिका को दबाने के लिए इतनी दूर नहीं जाएगी और सऊदी अरब, अमेरिका और चीन के साथ अपने संबंधों को पुनर्गठित कर रहा है।

अमेरिका-सऊदी संबंध में तनाव

अमेरिका-सऊदी संबंध में तनाव

सऊदी अरब और अमेरिका के बीच के संबंध हालिया समय में काफी तनावपूर्ण हो गये हैं और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस ने इस साल अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन का फोन भी नहीं उठाया था। वहीं, इस साल जुलाई में जब जो बाइडेन ने सऊदी अरब की यात्रा की थी, उस दौरान सऊदी क्राउन प्रिंस ने उनका काफी उदासीन स्वागत किया था। जो बाइडेन की यात्रा का मकसद सऊदी अरब को तेल के उत्पादन को बढ़ाने के लिए मनाना था, लेकिन सऊदी अरब ने उनकी मांग को सिरे से खारिज कर दिया। वहीं, जब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सऊदी अरब पहुंचे, तो उनका धूमधाम से भव्य स्वागत किया गया था। शी जिनपिंग की यात्रा को दोनों देशों के बीच संबंधों में "एक मील का पत्थर" के रूप में वर्णित किया गया था और इसे वाशिंगटन के लिए एक "अपमान" के रूप में देखा गया है।

शी जिनपिंग की सऊदी यात्रा

शी जिनपिंग की सऊदी यात्रा

चीनी नेता शी जिनपिंग ने 86 साल के किंग सलमान बिन अब्दुलअज़ीज़ और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ बातचीत की, जो सऊदी अरब के वास्तविक शासक हैं। चीनी नेता ने अपनी यात्रा के दौरान बताया कि, सऊदी अरब के साथ अपने देश के संबंधों को विकसित करना उसके विदेशी संबंधों और मध्य पूर्व में कूटनीति की प्राथमिकता है। शी जिनपिंग और किंग सलमान ने "व्यापक रणनीतिक साझेदारी समझौते" पर हस्ताक्षर किए। चीनी नेता ने कहा कि, इस समझौते ने दोनों देशों के बीच संबंधों में "एक नए युग" की शुरुआत की है। इस यात्रा के दौरान सऊदी अरब और चीनी अधिकारियों के बीच 34 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, जिसमें कई क्षेत्रों को शामिल किया गया है। सऊदी मीडिया का अनुमान है, कि दोनों देशों के बीच 30 अरब डॉलर के समझौते हुए हैं।

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