तबलीगी जमात पर प्रतिबंध, बच्चों के हाथ में रामायण, जानिए कैसे सऊदी को कट्टरता से निकाल रहे सलमान?

सऊदी अरब क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने देश को मजहबी कट्टरता से निकालने के लिए एक तरह की मुहिम छेड़ दी है और उन्होंने इसके लिए 2030 का टार्गेट तय किया है।

रियाद, दिसंबर 11: मजहबी कट्टरता और कट्टरपंथी सोच के लिए कुख्यात रखा सऊदी अरब अब मजहबी स्वतंत्रता और आधुनिकता की तरफ तेजी से बढ़ता जा रहा है। जो सऊदी अरब पहले इस्लामिक कट्टर कानून और अपनी दकियानुसी सोच के लिए प्रसिद्ध था, वो अब महिलाओं को आजादी देने से लेकर कट्टरता फैलाने वाले संगठनों के खिलाफ एक्शन के लिए सुर्खियां बटोर रहा है। एक तरफ से कहें, तो सऊदी अरब में धार्मिक सुधार आंदोलन तेजी से आगे बढ़ रहा है और सऊदी सरकार ने ठान लिया है, कि इस्लाम के नये स्वरूप के बारे में विश्व को बताया जाए, जिससे लोग प्यार करें, ना की शक की निगाहों से देखें।

तबलीगी जमात पर प्रतिबंध

तबलीगी जमात पर प्रतिबंध

सऊदी अरब किंगडम ने सुन्नी मुस्लिम संगठन तबलीगी जमात को आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगातर प्रतिबंधित कर दिया है। यानि, अब सऊदी अरब में तबलीगी जमात लोगों को कट्टर बनाने का काम नहीं कर सकेगी। इतना ही नहीं, सऊदी अरब ने तबगीली जमात को 'आतंकवाद का दरवाजा' करार दिया है। सऊदी सरकार ने मस्जिदों के मौलानाओं से कहा है कि शुक्रवार से लोगों को तबलीगी जमात के बारे में चेतावनी देना शुरू कर दें, क्योंकि 'ये समाज के लिए खतरा हैं।' सऊदी अरब के इस्लामिक मामलों के मंत्रालय ने कई सारे ट्वीट करके अलग-अलग प्वाइंट में विस्तार से बताया है कि इस 'कट्टरपंथी' संगठन को वह क्यों प्रतिबंधित कर रहा है।

'आतंकवाद का दरवाजा'

'आतंकवाद का दरवाजा'

पिछले दो सालों से सऊदी अरब हर वो कड़े कदम उठा रहा है, जिनसे देश को इस्लामिक कट्टरपंथ से आजादी मिले। लिहाजा सऊदी अरब के मस्जिदों में लाउडस्पीकर बजाने पर भी प्रतिबंध लगाया जा चुका है। सऊदी अरब के इस्लामिक मामलों के मंत्रालय ने ट्विट करते हुए देश में तबलीगी जमात पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। इस ट्वीट में मंत्री अब्दुललतीफ अल अलशेख ने साफ तौर पर कहा है कि, तबगीली जमात देश में कट्टरपंथ को बढ़ावा देते हुए लोगों को आतंकवादी बनने की तालीम दे रहा है। उन्होंने ट्वीट में कहा कि, ''मस्जिदों के मौलानाओं और मस्जिदों को निर्देश दिए हैं कि शुक्रवार की प्रेयर अस्थाई रखें, ताकि अगले शुक्रवार का उपदेश (तबलीगी और दावाह ग्रुप ) को चेतावनी देने के लिए आवंटित किया जाए, जिसे (अल अहबाब) कहते हैं।'

तबलीगी जमात को उखाड़ने की कोशिश

तबलीगी जमात को उखाड़ने की कोशिश

सऊदी सरकार ने मस्जिदों के मौलानाओं को चेतावनी देते हुए कहा कि, ''तबलीगी जमात से जुड़े लोगों की हर गतिविधियों के बारे में सरकार को जानकारी दी जाए और लोगों को बताया जाए कि, तबलीगी जमात किस तरह से लोगों को गुमराह कर रहा है, लोगों को भटका रहा है, उन्हें आतंकवादी बनने के लिए उकसा रहा है। सऊदी सरकार ने कहा कि, तबलीगी जमात की हर गलतियों के बारे में लोगों को जानकारी दी जाए। इसके साथ ही सऊदी सरकार ने तबलीगी जमात को समाज के लिए खतरा करार दिया है और साफ तौर पर मौलानाओं को तबलीगी जमात के साथ किसी भी तरह का संबंध रखना प्रतिबंधित कर दिया है। आपको बता दें कि, तबगीली जमात की स्थापना भारत के मेवात क्षेत्र में 1927 में की गई थी और इसकी कट्टरपंथी मजहबी विचारधारा बहुत जल्द पूरी दुनिया में फैल गई।

सऊदी अरब में धार्मिक सुधार

सऊदी अरब में धार्मिक सुधार

सऊदी अरब क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने देश को मजहबी कट्टरता से निकालने के लिए एक तरह की मुहिम छेड़ दी है और उन्होंने इसके लिए 2030 का टार्गेट तय किया है। सऊदी सरकार का मानना है कि सऊदी अरब की पहचान एक तेल संपन्न और कट्टर मुस्लिम देश के तौर पर ना हो, बल्कि एक उदार देश के तौर पर सऊदी अरब को पहचाना जाए, जहां हर धर्म और हर संप्रदाय को एक समान, एक नजर से देखा जाता है और किसी के ऊपर कोई धार्मिक पाबंदी ना हो। लिहाजा क्राउन प्रिंस ने मजहबी कट्टरता के खिलाफ बेहद सख्त मुहिम चला रखी है, और उसी कदम के तहत तबलीगी जमात को प्रतिबंधित किया गया है।

लाउडस्पीकर पर प्रतिबंध

लाउडस्पीकर पर प्रतिबंध

इसी साल मई-जून में सऊदी सरकार ने मस्जिदों में अजान के समय बजने वाले लाउडस्पीकर पर प्रतिबंध लरगा दिया था। सऊदी किंगडम ने साफ तौर पर कहा कि, लाउडस्पीकर बजाना इस्लाम को प्रतिनिधित्व नहीं करता है और लाउडस्पीकर पर अजान की तेज आवाज दूसरे लोगों को परेशान करती हैं, लिहाजा किंगडम की तरफ से मस्जिदों में लाउडस्पीकर नहीं बजाने का आदेश जारी कर दिया गया। सऊदी किंगडम ने कहा कि अजान की तेज आवाज की वजह से बच्चों को सोने में दिक्कत होती है, लिहाजा मस्जिदों में अजान के वक्त आवाज को काफी कम रखा जाए। मस्जिदों के लाउडस्पीकर क्षमता को एक तिहाई कर दिया गया। इसके साथ ही ये भी नियम बना दिया गया है कि पूरी अजान के दौरान लाउडस्पीकर चलाए रखना जरूरी नहीं है, सिर्फ शुरू में लाउडस्पीकर चलाकर फिर बंद कर दिया जाए।

नये आर्थिक युग में जाने की तैयारी

नये आर्थिक युग में जाने की तैयारी

सऊदी किंगडम का मानना है कि भले अभी तेल की वजह से दुनिया सऊदी अरब का सम्मान करती है और सऊदी अरब की बातों को सुना जाता है, लेकिन तेल खत्म होने के बाद सऊदी अरब को अस्तित्व के लिए संघर्ष करना पड़ेगा। लिहाजा, सऊदी को भविष्य में आने वाले संकट से बचाने के लिए सऊदी अरब की सरकार ने उदारीकरण की प्रक्रिया देश में तेजी से शुरू कर दी है और सबसे पहले धार्मिक कट्टरता पर हथौड़ा चलाया जा रहा है। समाचार एजेंसी एएफपी से बात करते हुए यूनिवर्सिटी ऑफ एस्सेक्स के पॉलिटिकल लेक्चरर अज़ीज़ अल्घाशियान कहते हैं कि 'सऊदी अरब अपनी बुनियाद को फिर से बनाने की कोशिश कर रहा है'। उन्होंने कहा कि 'सऊदी अरब एक ऐसा देश बनने की कोशिश में है, जहां कोई धार्मिक कट्टरता नहीं हो, जहां हर संस्कृति का मेल हो, जहां के बारे में सोचकर किसी को डर ना लगे, जहां पर्यटन समृद्ध हो और जहां निवेश की काफी ज्यादा संभावनाए हों।'

सऊदी अरब में वैचारिक परिवर्तन?

सऊदी अरब में वैचारिक परिवर्तन?

सऊदी अरब में एक वक्त अगर कोई नमाज के वक्त नमाज पढ़ता नहीं मिलता था तो उसे पुलिस जबरदस्ती मस्जिद में नमाज पढ़ने के लिए भेजती थी, लेकिन अब हर दिन पांचों वक्त नमाज के वक्त सऊदी अरब में दुकानें और मॉल्स खुला रहता है। यहां तक की रमजान के महीने में भी दिन में होटलों के खुले रहने की इजाजत दी जा चुकी है। सऊदी अरब में एक वक्त मस्जिदों के मौलाना अपनी मर्जी से मस्जिदों के लिए कानून बना सकते थे, लेकिन अब किंगडम ने मौलानाओं के अधिकारों को छीन लिया है। अब मौलाना वही कर सकते हैं, जो उन्हें सरकार की तरफ से कहा जाएगा। यहां तक कि अब सऊदी अरब में महिलाओं को गाड़ी चलाने की इजाजत दी जा चुकी है और यहूदियों को पूर्ण आजादी दी जा चुकी है।

बच्चों के हाथ में गीता-रामायण

बच्चों के हाथ में गीता-रामायण

सऊदी की स्कूलों में सुधार कार्यक्रम सऊदी अरब में स्कूलों में सुधार कार्यक्रम काफी तेजी के साथ जारी है और सऊदी अरब की स्कूली किताबों के सिलेबस को बदला जा रहा है। सऊदी अरब में स्कूली किताबों से इस्लाम की कई मान्यताओं को बाहर कर दिया गया है, वहीं दूसरे धर्मों को भी सिलेबस में जोड़ दिया गया है। सऊदी अरब की स्कूली किताबों में रामायण, महाभारत और गीता के कई अध्यायों को शामिल किया गया है। वहीं, योग को भी सिलेबस में शामिल किया गया है।

दूसरे धर्मों को प्रचार की इजाजत

दूसरे धर्मों को प्रचार की इजाजत

इसके साथ ही अब सऊदी में अंग्रेजी की पढ़ाई करना अनिवार्य कर दिया गया है और इंग्लिश में पास होना छात्रों के लिए अनिवार्य है। हालांकि, सऊदी अरब में दूसरे धर्मावलंबियों के लिए अपने धर्म का प्रचार करना अब भी प्रतिबंधित है, लेकिन सऊदी सरकार के सलाहकार अली शिहाबी ने हाल ही में अमेरिकन मीडिया 'इनसाइडर' से कहा है कि सरकार जल्द दी सऊदी अरब में चर्च खोलने की इजाजत देने वाली है और चर्च के पास अपने धर्म का प्रचार-प्रसार करने की इजाजत भी होगी। इसके साथ ही सऊदी अरब में अब शराब पर लगा हुआ प्रतिबंध भी हटाने पर विचार किया जा रहा है। कई सरकारी सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है कि सऊदी अरब में अब शराब बिकने की इजाजत दे दी जाएगी। अभी तक सऊदी में शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगा हुआ था, क्योंकि इस्लाम में शराब को हराम माना गया है।

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