भारत से 'दुश्‍मनी' की सजा भुगत रही नेपाली जनता, नमक बिक रहा 100 रुपए किलो

काठमांडू। चीन के बहकावे में आकर नेपाल कम्‍युनिस्‍ट पार्टी (एनसीपी) के नेता और प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली भारत के विरोध में आ गए हैं। देश का नक्‍शा बदलकर भारत की सीमा में स्थित तीन जगहों को अपने देश की सीमा में दिखा दिया। लेकिन उनके अपने ही देश में हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। महंगाई आम जनता की कमर तोड़ती जा रही है और नमक जैसी जरूरी चीजों के दाम 100 रुपए तक पहुंच गए हैं। देश में केपी ओल के खिलाफ बड़े स्‍तर पर प्रदर्शन शुरू हो गए हैं और कयास लगाए जा रहे हैं कि सरकार किसी भी पल गिर सकते हैं।

सरकार को झेलना पड़ रहा गुस्‍सा

सरकार को झेलना पड़ रहा गुस्‍सा

नेपाल में केपी ओली की सरकार को कोविड-19 और भ्रष्‍टाचार के मुद्दे पर जनता का भारी गुस्‍सा झेलना पड़ रहा है। देश में नमक, प्‍याज और टमाटर की कीमतें 100 रुपए तक पहुंच गई हैं। पिछले दिनों नेपाल प्रहरी की तरफ से बिहार से लगे भारत बॉर्डर पर फायरिंग की गई थी। इस घटना में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई थी। इसके बाद भारत ने नेपाल की सीमा पर सख्‍ती काफी बढ़ा दी थी। नेपाल प्रहरी भारत से लगी सीमा की सुरक्षा का जिम्‍मा संभालती है। भारत की तरफ से कार्रवाई के एवज में की गई सख्‍ती के बाद से नेपाल में रोजमर्रा काम आने वाले सामान की कीमतें आसमान छूने लगी हैं।

नमक से लेकर चीनी तक महंगी

नमक से लेकर चीनी तक महंगी

नेपाल में पिछले दिनों नमक की कीमतें 100 रुपए प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई हैं। भारतीय मुद्रा में अगर अनुमान लगाए तो नेपाल में इस समय नमक 60 रुपए प्रति किलोग्राम पर बिक रहा है। नमक की कीमतों में इजाफे ने जनता को सरकार के खिलाफ कर दिया है। नमक के अलावा सरसों तेल, चीनी, जीरा, काली मिर्च, अरहर दाल, केरोसिन तेल, मिर्च, चना दाल, चायपत्‍ती, खेसारी दाल आदि की कीमत में भी बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। सरसों का तेल प्रति लीटर 200 नेपाली करेंसी की बजाय अब 800 नेपाली करेंसी की दर से बिक रहा है, जबकि चीनी प्रति किलो 70 नेपाली करेंसी की बजाय 400 नेपाली करेंसी और चायपत्ती प्रति किलो 1000 नेपाली करेंसी के हिसाब से बिक रहा है।

बॉर्डर पर बढ़ाई गई सख्‍ती

बॉर्डर पर बढ़ाई गई सख्‍ती

12 जून को बिहार के सीतामढ़ी स्थित नेपाल बॉर्डर की तरफ से फायरिंग हुई थी। इसके बाद से ही नेपाल बॉर्डर की सुरक्षा में लगी सशस्‍त्र सीमा बल (एसएसबी) की तरफ से चौकसी बढ़ा दी गई है। नेपाल और भारत का बॉर्डर खुला हुआ है और इसे हमेशा से ही दक्षिण एशिया में एक अनोखा घटनाक्रम करार दिया जाता है। भारत और नेपाल के बीच बॉर्डर के खुला होने और सख्ती न होने की वजह से बड़ी संख्‍या में लोग जरूरी सामनों की खरीद-बिक्री के लिए सीमा पार करते रहे हैं। सीमा चौकियों पर मामूली जांच के बाद उन्‍हें एक-दूसरे के क्षेत्रों में दाखिल होने की अनुमति रही है। इस दौरान वे जरूरी सामानों की खरीदारी कर लौट जाते थे। लेकिन कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच भारत ने पिछले दिनों लॉकडाउन घोषित किया था। नेपाल में भी कई पाबंदियां लगाई गई थीं।

जनता ने कहा भारत से रिश्‍ते हों सामान्‍य

जनता ने कहा भारत से रिश्‍ते हों सामान्‍य

लोगों का आसानी से सीमा पार करना अब मुश्किल हो गया है, जिसके कारण वे जरूरी सामानों की खरीद भी नहीं कर पाते। रिपोर्ट्स के अनुसार, नेपाल के सिरहा जिले से लोग बड़ी संख्‍या में मधुबनी के लदनियां बाजार पहुंचते रहे हैं। यहां उन्‍हें जरूरत सामान नेपाल की अपेक्षा कम कीमतों पर मिल जाता था। लेकिन अब सीमा पर चौकसी व निगरानी बढ़ने के बाद वे अधिक कीमत देकर अपने देश में ही खरीदारी के लिए मजबूर हैं। भारतीय क्षेत्रों से सामानों के नहीं पहुंच पाने के कारण नेपाल के इन सीमावर्ती इलाकों में जरूरी सामानों की कीमत भी आसमान छू रही है और लोग अधिक दाम देकर भी इन सामनों को खरीदने के लिए मजबूर हैं। ऐसे में जनता अपनी ही सरकार को कोस कर रही है और बार-बार भारत के साथ संबंधों को सामान्‍य बनाने और आपसी रिश्‍तों को मजबूत बनाने पर जोर दे रही है।

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