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Salman Rushdie:पश्चिम में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को गंभीर खतरा, हमले के 9 महीने बाद क्या बोले? देखिए VIDEO

पश्चिम के देश अक्सर फ्री स्पीच के नाम पर भारत को ज्ञान देते हैं। लेकिन, सलमान रुश्दी ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर पश्चिम देशों में पैदा हुए हालात की पोल खोल दी है।

salman rushdie on freedom of expression

Salman Rushdie news: खुद पर जानलेवा हमले के 9 महीने बाद दुर्लभ सार्वजनिक संबोधन में लेखक सलमान रुश्दी ने पश्चिमी देशों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के हालात को लेकर बहुत बड़ी बात कही है। उनके मुताबिक उनके जीवनकाल में पश्चिम में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को जितना गंभीर खतरा पैदा हुआ है, उतना कभी नहीं था।

सलमान रुश्दी को मिला फ्रीडम टू पब्लिश अवार्ड
ब्रिटिश बुक अवार्ड्स के दौरान विश्व विख्यात लेखक ने एक वीडियो संदेश के जरिए अपनी बात रखी है। सोमवार को यहां उन्हें फ्रीडम टू पब्लिश अवार्ड से नवाजा गया है। इस मौके पर आयोजकों ने कहा कि सम्मान 'लेखकों, प्रकाशकों और पुस्तक बेचने वालों के दृढ़ संकल्प को स्वीकारता है, जो मौजूदा खतरों के बावजूद असहिष्णुता के खिलाफ खड़े होते हैं।'

पिछले साल अमेरिका में हुआ था हमला
इस दौरान 75 वर्षीय ब्रिटिश लेखक हमले से पहले के मुकाबले काफी दुबले लग रहे थे और उनके चश्में पर एक टिंडेट लेंस चढ़ा हुआ था। उनपर पिछले साल अगस्त में अमेरिका के न्यूयॉर्क में एक साहित्य उत्सव के दौरान हमला किया गया था। इसमें उनकी दायीं आंख की रोशनी चली गई थी और उनके हाथ की नसें क्षतिग्रस्त हो गईं थी।

पश्चिम में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को गंभीर खतरा-सलमान रुश्दी
इस मौके पर अपने वीडियो संदेश में रुश्दी ने कहा, 'हम एक ऐसे पल में रहते हैं, मैं सोचता हूं, कि पश्चिम के देशों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, प्रकाशित करने की स्वतंत्रता मेरे पूरे जीवन में इतने खतरे में कभी नहीं रही।'

अमेरिका की हालात पर भी जताई चिंता
उन्होंने कहा कि, 'अभी मैं यहां अमेरिका में बैठा हुआ हूं, मैं स्कूल में बच्चों की लाइब्रेरी और किताबों पर असाधारण हमला देखता हूं।' उनके मुताबिक, 'यह आश्चर्यजनक तरीके से खतरनाक है, और हमें इसके खिलाफ बहुत कठिन लड़ाई लड़ने की आवश्यकता है।'

उनकी उपन्यास 'द सैटेनिक वर्सेज' के लिए फतवा जारी हुआ था
सलमान रुश्दी दशकों तक पुलिस सुरक्षा में रहते हुए छिप-छिपाकर अपनी जान बचाते रहे हैं। उनकी उपन्यास 'द सैटेनिक वर्सेज' को लेकर ईरान के कट्टर इस्लामिक नेता अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी ने तब उनपर कथित ईश-निंदा का आरोप लगाते हुए सिर कलम करने का फतवा जारी किया था। उनपर हुआ हमला भी उसी घटना से जुड़ा माना जाता है।

खुमैनी के फतवे का इतिहास
बता दें कि खुमैनी वही नेता है जिसने एक दो नहीं, बल्कि 30 हजार महिलाएं, बच्चों और लोगों को मारने का विश्व इतिहास का सबसे क्रूर फतवा जारी किया था। उसने सबसे घातक फतवा वर्ष 1988 में जारी किया गया था और उस फतवे के तहत ईरान में हजारों लोगों को मौत की सजा सुनाई गई थी और उन्हें क्रेन तक से लटका दिया गया था।

प्रकाशकों की इस बात के लिए की आलोचना
अपने भाषण में उन्होंने उन प्रकाशकों की आलोचना की है जो दशकों पुरानी किताबों को आधुनिक जरूरतों के हिसाब से बदलते हैं। वह चाहते हैं कि किताबों के मूल लेखक ने जो लिखा है, उसे बदलना सही नहीं है। वे बोले कि प्रकाशकों को पुस्तकों को उसी तरह से रहने देना चाहिए 'जो कि हमारे पास उस दौर से आई और उसी दौर की ही रहे...' उनका कहना है, 'और अगर इसे पढ़ने में दिक्कत है तो ना पढ़ें।' (ट्विटर वीडियो-@AnoopSihag20)

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