‘यूक्रेन पर भारत का स्टैंड क्या हो, हमें आपके पीछे चलने की जरूरत नहीं', पश्चिमी देशों पर बरसे जयशंकर

भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि, भारत को इस बारे में व्यावहारिक होना चाहिए, कि कैसे वह अंतरराष्ट्रीय वातावरण का लाभ उठाता है, और कड़ी सुरक्षा पर अधिक ध्यान देकर अतीत में की गई गलतियों को सुधारना चाहिए।

नई दिल्ली, अप्रैल 27: भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत की यूक्रेन नीति को लेकर एक बार फिर से पश्चिमी देशों को दो-टूक जवाब दिया है और उन्होंने साफ साफ कहा है, कि भारत की यूक्रेन नीति क्या होनी चाहिए, ये हमें किसी से सीखने की जरूरत नहीं हैं। पिछले एक महीने में एस. जयशंकर ने पश्चिमी देशों को कई मुद्दों पर मुंहतोड़ जवाब दिया है।

‘हमें राह बताने की जरूरत नहीं’

‘हमें राह बताने की जरूरत नहीं’

भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रूस के यूक्रेन आक्रमण पर कड़ा रुख अपनाने के लिए पश्चिम के तीव्र दबाव के बीच नई दिल्ली की गुटनिरपेक्ष विदेश नीति की पुष्टि करते हुए आज कहा कि, भारत को जिस रास्ते पर चलना है, उसके लिए किसी अन्य राष्ट्र के अनुमोदन की आवश्यकता नहीं है। भारतीय विदेश मंत्री नई दिल्ली में प्रतिष्ठि रायसीना डायलॉग कार्यक्रम में बोल रहे थे, जिसमें 90 देशों के प्रमुख नेता भाग ले रहे हैं। नई दिल्ली में बोलते हुए एस. जयशंकर ने कहा कि, हम अन्य राष्ट्रों की नकल करके हम उन्हें खुश नहीं कर सकते हैं।

पश्चिम दो दो-टूक जवाब

पश्चिम दो दो-टूक जवाब

भारतीय विदेश मंत्री ने कार्यक्रम के दौरान पश्चिमी देशों को स्पष्ट जवाब देते हुए कहा कि, ''हमें इस बारे में आश्वस्त होना होगा, कि हम कौन हैं। मुझे लगता है कि दुनिया के साथ जुड़ना बेहतर है और उन्हें ये बताने की जरूरत ज्यादा है, कि हम कौन हैं, इसके बजाए, कि हम उनकी नकल करके उन्हें खुश करने की कोशिश करें और उन्हें ये बताएं, कि वो क्या हैं। आपको बता दें कि, इससे पहले भारतीय विदेश मंत्री ने अमेरिका में 2+2 की बैठक के दौरान अमेरिकी रक्ष और विदेश मंत्री के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक सवाल पर रिपोर्टर से कहा था, कि उन्हें पश्चिमी देशों के नेताओं से पूछना चाहिए, कि वो रूस से कितना तेल खरीदता है, क्योंकि भारत एक महीने में रूस से जितना तेल खरीदता है, यूरोप उतना तेल एक दिन नें खरीद लेता है।

‘पुराने जमाने से बाहर आने की जरूरत’

‘पुराने जमाने से बाहर आने की जरूरत’

भारतीय विदेश ने काफी सख्त लहजा इस्तेमाल करते हुए कहा कि, 'वो विचार, कि दूसरे हमारे बारे में क्या सोचते हैं, और हमें क्या करना चाहिए, इसके बारे में किसी और से इजाजत लेने की आवश्यकता, ताकि वो खुश रहें, हमें इस मानसिकता वाले युग से बाहर निकलने की जरूरत है और ऐसी सोच को पीछे छोड़ने की जरूरत है।' आपको बता दें कि, इससे पहले मंगलवार को भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यूक्रेन संकट में भारत की स्थिति पर यूरोपीय विदेश मंत्रियों से सवाल किए थे, और उनमसे पूछा था, कि जब एशिया के देशों, जैसे अफगानिस्तान को संकट का सामना करना पड़ा, उस वक्त यूरोप कहां था? उन्होंने सीधे तौर पर कहा, कि अफगानिस्तान के समाज को एक झटके में चलती बस से फेंक दिया गया। उन्होंने यूरोपीय नेताओं को याद दिलाते हुए कहा कि, दुनिया के अन्य हिस्सों में भी समान रूप से दबाव वाले मुद्दे थे, जो खतरे में थे।

‘भारत को होना चाहिए व्यावहारिक’

‘भारत को होना चाहिए व्यावहारिक’

भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि, भारत को इस बारे में व्यावहारिक होना चाहिए, कि कैसे वह अंतरराष्ट्रीय वातावरण का लाभ उठाता है, और कड़ी सुरक्षा पर अधिक ध्यान देकर अतीत में की गई गलतियों को सुधारना चाहिए। भारतीय विदेश मंत्री ने इसके साथ ही भारतीय लोकतंत्र पर उठाने वालों को भी करार दवाब दिया। उन्होंने कहा कि, 'मेरी यह प्रबल आंतरिक भावना' है, कि लोकतंत्र का भविष्य सुरक्षित है, और इसका एक बड़ा हिस्सा अतीत में भारत द्वारा बनाए गए विकल्पों के कारण है। उन्होंने कहा, "एक समय था जब दुनिया के इस हिस्से में हम एकमात्र लोकतंत्र थे। अगर लोकतंत्र आज वैश्विक है, या आज हम इसे वैश्विक देखते हैं, तो कुछ हद तक इसका श्रेय भारत को जाता है।"

‘कुछ गलतियां हुई हैं’

‘कुछ गलतियां हुई हैं’

इसके साथ ही रायसीना डायलॉग में भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अतीत में भारत द्वारा की गई गलतियों को लेकर भी बात की है और उन्होंने कहा कि, 'भारत ने अतीत में अपने सामाजिक संकेतकों और मानव संसाधनों पर उस तरह का ध्यान नहीं दिया'। उन्होंने कहा कि, 'नंबर-दो, हमने मैन्यूफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजिकल प्रवृत्तियों पर उतना ध्यान केंद्रित नहीं किया, जितना हमें करना चाहिए था। तीसरा, विदेश नीति के संदर्भ में हमने कड़ी सुरक्षा को उतना महत्व नहीं दिया।"

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