रूस के हर संकट का रामबाण इलाज है Tu-22 Bomber, न्यूक्लियर एयरक्राफ्ट बनाने को लेकर भारत क्यों नहीं हुआ गंभीर?
Defence News: साइबेरिया के इरकुत्स्क क्षेत्र में कुछ दिनों पहले एक रूसी Tu-22M3 रणनीतिक परमाणु बमवर्षक विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। उसोलस्की जिले के बेलाया हवाई क्षेत्र से उड़ान भरने वाले इस विमान में तकनीकी खराबी आ गई थी, जिसकी वजह से बीच हवा में ही एक इंजन में आग लग गई।
हालांकि, अच्छी बात ये रही, कि सभी चार चालक दल के सदस्य सुरक्षित रूप से बाहर निकल गए और मिखाइलोवका गांव के पास, जहां ये विमान गिरा, वहां पर भी कोई नुकसान नहीं हुआ।

Tu-22M3, एक सुपरसोनिक, वेरिएबल-स्वीप विंग मिसाइल कैरियर और लंबी दूरी का रणनीतिक बमवर्षक फाइटर जेट है, जिससे परमाणु बम गिराया जा सकता है। यह रूसी सेना के लिए एक महत्वपूर्ण संपत्ति रही है, जिसकी लगभग 500 यूनिट्स बनाई गई हैं और रूस, अभी भी ये बमवर्षक विमान बनाने में लगा हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में, रूस ने इन विमानों को अपग्रेड किया है और इसमें नए रडार सिस्टम, नेविगेशन उपकरण और आत्मरक्षा इलेक्ट्रॉनिक सूट लगाए गए हैं। जिससे यह विमान विभिन्न मिसाइलों, बमों और समुद्री माइंस को ले जा सकता है।
Tu-22M3 का ऑपरेशनल इतिहास
इस बमवर्षक ने रूस के लिए कई महत्वपूर्ण संघर्षों के दौरान काफी महत्वपूर्ण योगदान दिए हैं। इसका पहली बार 1988 में अफगानिस्तान युद्ध के दौरान और बाद में चेचन्या में चरमपंथियों के खात्मे में इस्तेमाल किया गया था। Tu-22M3 ने गश्ती मिशनों में भी कई भूमिका निभाई और सीरियाई गृहयुद्ध में शामिल रहा, ईरान के एयरबेस से भी ये हवाई हमले कर चुका है। हाल ही में, इसने यूक्रेन पर आक्रमण में भाग लिया, जिसमें रूस ने मारियुपोल को निशाना बनाया था।
अपनी अपार क्षमताओं के बावजूद, Tu-22M3 को चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। 2022 में, एक ड्रोन हमले ने डायगिलेवो एयर बेस पर एक जेट क्षतिग्रस्त कर दिया। 2023 में एक और ड्रोन हमले के कारण सोलत्सी एयर बेस पर एक Tu-22M3 में आग लग गई। यूक्रेनी अधिकारियों ने दावा किया है, कि उन्होंने 2024 में स्टावरोपोल के पास इनमें से एक बमवर्षक को मार गिराया।
Tu-22M3 की वर्तमान स्थिति क्या है, कैसा है भविष्य?
रूसी वायु सेना आज भी Tu-22M3 बमवर्षकों की एकमात्र ऑपरेटर है। हालांकि, यूक्रेन के पास एक वक्त इनमें से कई विमान थे, लेकिन अमेरिका के साथ एक समझौते के तहत उसने इन विमानों को खत्म कर दिया। ईरान, भारत और चीन जैसे देशों ने इस फाइटर जेट में जरूर दिलचस्पी दिखाई है, लेकिन अभी तक किसी ने भी इसे नहीं खरीदा है।
रूस ने इन बमवर्षकों को रखने के लिए कई अड्डे बनाए हैं, जिनमें बेलाया, ओलेन्या, डायगिलेवो और शायकोवका शामिल हैं। इन ठिकानों पर सामूहिक रूप से 57 विमान हैं, हालांकि, उनमें से कई रिटायर्ड होने के बाद संभवत: जमीन पर खड़े हो सकते हैं।

न्यूक्लियर बमवर्षकों को गिराने की टेक्नोलॉजी में बदलाव
मौजूदा समय में रणनीतिक बमवर्षकों का भविष्य स्टेल्थ टेक्नोलॉजी से जुड़ गया है। अमेरिका अपने बी-1बी बमवर्षकों को बी-21 रेडर के लिए रिटायर कर रहा है, जबकि चीन एच-6 बमवर्षकों से एच-20 स्टील्थ बमवर्षकों से बदल रहा है। रूस भी टुपोलेव PAK DA के नाम से जाना जाने वाला अपना अगली पीढ़ी का स्टील्थ बमवर्षक विकसित कर रहा है।
भारत जैसे देशों के लिए, 4.5 पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के ज्यादा स्क्वाड्रन हासिल करना और लड़ाकू विमानों पर स्टेल्थ टेक्नोलॉजी में महारत हासिल करना, बमवर्षक खरीदने या बनाने की तुलना में ज्यादा महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके अधिग्रहण और रखरखाव में काफी ज्यादा खर्च आता है। भारत दो दशकों के भीतर स्टेल्थ बमवर्षक विमानों को खरीदने या डिजाइन करने पर विचार कर सकता है।
हाल ही में हुई दुर्घटना इन पुराने विमानों की सुरक्षा और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए नियमित रखरखाव और तकनीकी जांच के महत्व को रेखांकित करती है। हाल के वर्षों में हुई दुर्घटनाओं के बावजूद, Tu-22M3 रूस के लिए एक बहुमुखी संपत्ति बनी हुई है जो रूस के सैन्य अभियानों के लिए लंबी दूरी के सामरिक और समुद्री हमलों को अंजाम देने में सक्षम है।












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