Chandrayaan-3 के बाद रूस के लूना-25 ने भी भेजी चांद के सीक्रेट हिस्से की तस्वीर, देखिए कैसा दिखता है चंद्रमा
Russia Luna-25: रूस के चंद्र अंतरिक्ष यान, लूना-25 ने आधिकारिक तौर पर चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश कर लिया है और चंद्रमा की सतह के दूर के हिस्से की पहली तस्वीरें साझा की हैं, जो पृथ्वी से स्थायी रूप से अदृश्य रहता है।
रूस एकेडमी ऑफ साइंस (आईकेआई आरएएस) के अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान के अनुसार, लूना-25 ने जो तस्वीरें भेजी हैं, वो दक्षिणी ध्रुवीय क्रेटर को दिखाती हैं, जिसे ज़ीमन क्रेटर कहा जाता है, जो चंद्रमा की सतह पर एक अनोखी घटना है और समकालिक घूर्णन के कारण पृथ्वी से चंद्रमा के इस हिस्से को नहीं देखा जा सकता है।
लूना-25 प्रोजेक्ट रूस की अंतरिक्ष अन्वेषण क्षमताओं के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह लगभग 50 सालों में देश का पहला चंद्र मिशन है और रूस का आखिरी चंद्र मिशन लूना-24 मिशन, 1976 में हुआ था।

लूना-25 की तस्वीर अनोखी क्यों है?
रूसी अंतरिक्ष यान ने बुधवार को चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश कर लिया और इसके भारत के चंद्रयान-3 से पहले 21 अगस्त तक चंद्रमा की सतह पर उतरने की उम्मीद है। इसे 11 अगस्त को रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस ने लॉन्च किया था।
क्रेटर शाफ्ट की ऊंचाई अपेक्षाकृत सपाट तल की सतह से 8 किमी ऊपर है। लूना-25 की तस्वीरों ने रिसर्चर्स की रुचि बढ़ा दी है, कि रूस का ये मिशन संभावित रूप से चंद्रमा की सतह का मूल्यवान भूवैज्ञानिक डेटा प्रदान कर सकते हैं।
रूसी लूना-25 की भेजी ये तस्वीर, लूना-3 के 1959 में अंजाम दिए गये मिशन की याद दिलाती है, जब लूना-3 ने भी चंद्रमा के सुदूर हिस्से की पहली तस्वीर भेजी थी।
STS-L टेलीविजन कॉम्प्लेक्स आईकेआई आरएएस में बनाया गया था। इसके अतिरिक्त, लूना 25 अंतरिक्ष यान ने एड्रॉन-एलआर और पीएमएल उपकरणों का उपयोग करके अवलोकन किया, जो आईकेआई आरएएस में भी बनाए गए थे। एस्ट्रोन इलेक्ट्रॉनिक्स के सहयोग से आईकेआई आरएएस में बनाए गए ARIES-L की मदद से भी अवलोकन किए गए।
🌙The majestic grandeur of #RussianMoon!
📸This is the first image made by #Luna25 automatic lunar station. The space probe continues its flight along the Moon’s orbit with all systems functioning normally
🚀On August 21, it is to make a soft landing on the surface of the Moon pic.twitter.com/mpHv6LqrAr
— Russian Embassy in USA 🇷🇺 (@RusEmbUSA) August 17, 2023
रूस के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि
लूना-25 कार्यक्रम रूस की अंतरिक्ष अन्वेषण क्षमताओं के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह लगभग 50 वर्षों में देश का पहला चंद्र मिशन है, क्योंकि आखिरी लूना 24 मिशन 1976 में हुआ था।
अंतरिक्ष यान ने बुधवार को चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश किया और भारत के चंद्रयान-3 से पहले 21 अगस्त तक चंद्रमा की सतह पर उतरने की उम्मीद है। इसे 11 अगस्त को रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस द्वारा लॉन्च किया गया था।
उसी दिन, चंद्रयान-3 के पीछे दिमाग और ताकत रखने वाले भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने लूना 25 अंतरिक्ष यान के सफल प्रक्षेपण पर रोस्कोस्मोस के लिए एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक बधाई संदेश पोस्ट किया था। इसरो ने कहा था, कि "लूना-25 के सफल प्रक्षेपण पर रोस्कोस्मोस को बधाई। हमारी अंतरिक्ष यात्राओं में एक और मिलन बिंदु होना अद्भुत है। चंद्रयान-3 और लूना-25 मिशनों को अपने लक्ष्य हासिल करने के लिए शुभकामनाएं।"
नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) के अनुसार, लूना 25 में चार पैरों वाला बेस है, जिसमें लैंडिंग रॉकेट और प्रोपेलेंट टैंक हैं। इसमें आठ विज्ञान उपकरण हैं, जिनमें एक गामा-रे और न्यूट्रॉन स्पेक्ट्रोमीटर, एक इन्फ्रा-रेड स्पेक्ट्रोमीटर और एक मास स्पेक्ट्रोमीटर शामिल है।












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