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S-400: यूक्रेन युद्ध में फ्लॉप साबित हो रहा रूसी एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम, क्या पुतिन ने भारत को लगाया चूना?

S-400 Missile Defence System: यूक्रेन ने दावा किया है, कि 10 जून की रात उसने रूसी कब्जे वाले क्षेत्र क्रीमिया में एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम और एस-300 मिसाइल डिफेंस सिस्टम को ध्वस्त कर दिया है। यूक्रेन का ये दावा उस वक्त आया है, जब क्रीमिया में उस रात एक के बाद एक कई धमाकों की आवाज सुनी गई।

ऐसी रिपोर्ट है, कि रूसी एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम को क्रीमिया में दज़ानकोई के पास निशाना गया है और दो और S-300 एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल इकाइयों पर चोर्नोमोर्सके और येवपटोरिया के पास हमला किया गया है। और अगर यूक्रेन के दावे में दम है, जैसा कि कई रिपोर्ट्स में पुष्टि भी की गई है, तो ये भारत के लिए बहुत बड़ा झटका साबित हो सकता है।

S-400 Missile Defence System

ऐसा इसलिए, क्योंकि रूस ने बार बार दावा किया है, कि उसका S-400 ट्रायम्फ एयर डिफेंस सिस्टम दुनिया का सबसे बेहतरीन मिसाइल डिफेंस सिस्टम है और उसका दावा है, कि इसकी क्षमता बेजोड़ है, लेकिन फिर सवाल ये उठ रहे हैं, कि अगर ये मिसाइल डिफेंस सिस्टम इतने ही बेजोड़ हैं, तो फिर इसे यूक्रेन कैसे ध्वस्त कर पाया है?

एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की अनुमानित कीमत 1.2 अरब डॉलर है।

हैरानी की बात ये है, कि यूक्रेन ने पश्चिमी देशों से मिले हथियारों से S-400 को ध्वस्त किया है, जबकि अभी तक पश्चिम ने यूक्रेन को एडवांस हथियार सौंपे भी नहीं हैं। यानि, अगर यूक्रेन कम आधुनिक हथियारों से एस-400 को उड़ा सकता है, तो फिर भारत के दोनों दुश्मन, चीन और पाकिस्तान के पास तो अत्याधुनिक हथियार हैं।

भारत ने रूस से खरीदे हैं एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम

भारत ने 15 अक्टूबर 2016 को BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान रूस से पांच एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम के लिए अंतर-सरकारी समझौते (आईजीए) पर हस्ताक्षर किए थे। और फिर 5 अक्टूबर 2018 को दोनों देशों के बीच औपचारिक तौर पर 5.43 अरब डॉलर यानि करीब 40 हजार करोड़ रुपये के सौदे पर हस्ताक्षर किए गये।

भारत ने रूसी प्रतिबंधों के खतरे को नजरअंदाज करते हुए रूस के साथ करार किया था और तय समझौते के तहत रूस को साल 2020 से लेकर 2024 के बीच पांचों यूनिट्स की आपूर्ति करनी थी। रिपोर्ट के मुताबिक, कोविड संकट और यूक्रेन युद्ध की वजह से डिलीवरी में देरी हुई और अभी तक रूस सिर्फ 3 यूनिट्स की डिलीवरी कर पाया है और 2 एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की डिलीवरी मिलना बाकी है।

भारत ने तीनों एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम को इंडियन एयरफोर्स को सौंप दिया है, जिसे चीन और पाकिस्तान से लगती सीमाओं के पास तैनात किया है। ऐसी रिपोर्ट है, कि रूस अब अगस्त 2026 तक भारत को बाकी बचे दोनों एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की डिलीवरी देगा।

रूस, चीन, तुर्की और बेलारूस पहले से ही S-400 एयर डिफेंस सिस्टम को ऑपरेट कर रहे हैं और रूस का दावा है, कि कई और देशों ने उसके एस-400 में दिलचस्पी दिखाई है। यहां तक ​​कि अमेरिकी सुरक्षा प्रतिष्ठान ने भी इस एयर डिफेंस सिस्टम को शक्तिशाली और प्रभावशाली बताया है। हालांकि, युद्ध की स्थिति में सिस्टम के किसी भी नुकसान के लिए ऑपरेशनल प्रभावशीलता और रक्षा क्षमता की जांच के लिए फिर से जांच की आवश्यकता होती है।

यूक्रेन कैसे एस-400 पर हमले कर रहा है?

यूक्रेन की मिलिट्री इंटेलिजेंस एजेंसी (HUR) ने बताया है, कि अप्रैल के मध्य में क्रीमिया में रूसी सैन्य हवाई क्षेत्र पर हुए हमले में चार S-400 लांचर और अन्य उपकरण नष्ट कर दिए गए।

यूक्रेन ने कथित तौर पर 30 मई की रात को अमेरिका से मिले लंबी दूरी की ATACMS मिसाइलों से केर्च में एक फ़ेरी क्रॉसिंग पर हमला किया और उसे भारी नुकसान पहुंचाया। मॉस्को के लिए ये क्रॉसिंग काफी ज्यादा महत्वपूर्ण है, क्योंकि क्रीमिया में मौजूद रूसी सैनिकों तक सामानों की आपूर्ति इसी क्रॉसिंग से करता है और इस क्रॉसिंग की यूक्रेन से रक्षा के लिए रूस ने टोर और एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम को तैनात कर रखा है। लेकिन, यूक्रेन ने रूसी ATACMS मिसाइल से एस-400 को ध्वस्त कर दिया।

इसके अलावा, यूक्रेन ने अमेरिकी मिसाइल से रूस के मिग-31 और एसयू-57 लड़ाकू विमानों को भी नष्ट किया है, जिससे रूस को अपनी रणनीति में बदलाव करने पर मजबूर होना पड़ा है। इसके अलावा, यूक्रेन ने रूस के अंदर भी ड्रोन से हमले किए हैं, जिससे पता चलता है, कि रूस अपनी सीमा की रक्षा करने में कामयाब नहीं हो पाया है।

S-400 Missile Defence System

MGM-140 ATACMS मिसाइल की क्षमता क्या है?

MGM-140 आर्मी टैक्टिकल मिसाइल सिस्टम (ATACMS) को लॉकहीड मार्टिन ने तैयार किया है और ये एक अमेरिकी स्ट्रैटजिक बैलिस्टिक मिसाइल है, जो 1991 से सेवा में है और हाल ही में यूक्रेन को आपूर्ति की गई है।

MGM-140 आर्मी टैक्टिकल मिसाइल सिस्टम का वजन 1670 किलो है और ये सॉलिड फ्यूल से ऑपरेट होती है और इसकी मार करने की क्षमता 300 किलोमीचर तक है। वहीं, इसकी कीमत 1.4 मिलियन डॉलर है। नेविगेशन के लिए ये जीपीएस का इस्तेमाल करता है और इसे M270 मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम (MLRS) और पहिएदार M142 हाई मोबिलिटी आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम (HIMARS) से दागा जा सकता है।

अक्टूबर 2023 में संयुक्त राज्य अमेरिका ने यूक्रेन को ATACMS दिया था। और इन मिसाइलों ने दक्षिणी यूक्रेन में पूरे रूसी कब्जे वाले क्षेत्र पर खतरा पैदा कर दिया है।

S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की क्षमता क्या है?

एस-400 मिसाइल सिस्टम एक रूसी मोबाइल लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली/एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल प्रणाली है, जो अगस्त 2007 में सेवा में आई थी। इसकी मिसाइलों और बैटरी की कीमत लगभग 1.2 अरब डॉलर है।

इसमें चार रडार और चार मिसाइलें हैं, जो 40 से 400 किलोमीटर की दूरी को कवर करती हैं, इस प्रकार यह एक विशाल एयर डिफेंस बबल को कवर करती है। यह सिस्टम S-300 का नेक्स्ट वर्जन है, और इसका अगला वेरिएंट S-500 है। S-400 ट्रायम्फ और पैंटिर मिसाइल सिस्टम को दो-परत एयर डिफेंस सिस्टम में एकीकृत किया जा सकता है।

एस-400 से एक बार में 72 लॉन्चर के जरिए 384 मिसाइलों को एक बार दागा जा सकता है और ये एक बार में 20 लक्ष्यों को टारगेट कर सकता है

एस-400 के अलग अलग वेरिएंट्स ने 2007 से रूसी डिफेंस में अहम भूमिका निभाई है। रूस के उत्तरी बेड़े के तटीय बलों ने भी एस-400 तैनात किए हैं। दक्षिण-पूर्व रूस में रूस के नोवोसिबिर्स्क ओब्लास्ट की हवाई रक्षा के लिए छह एस-400 इकाइयों को सक्रिय किया गया है। 2020 तक 56 बटालियन चालू हो गई थीं। नवंबर 2015 में, सीरिया में खमीमिम एयर बेस पर एस-400 तैनात किए गए थे, और बाद में, मास्याफ़ के पास एक दूसरी एस-400 इकाई को सक्रिय किया गया था।

एस-400 की नाकामी से भारत पर कितना असर?

कोई भी एयर डिफेंस सिस्टम, चाहे वो प्रसिद्ध इजराइली आयरन डोम ही क्यों ना हो, उसे लेकर जब आरसीएस बैलिस्टिक या क्रूज मिसाइलों, रॉकेट या ड्रोन के खिलाफ डिफेंस की बात आती है, तो उसकी ऑपरेशन क्षमता एक सीमा में बंध जाती है।

इन मिसाइल सिस्टम्स को हाई लेवल वैल्यू टारगेट की रक्षा करने के लिए डिजाइन किया गया है, लिहाजा किसी भी दुश्मन के लिए सबसे पहला निशाना यही होता है। दुश्मन की पहली कोशिश एस-400 को खत्म करना होता है, ताकि टारगेट पर हमला किया जा सके और यूक्रेन भी यही कर रहा है। लिहाजा, किसी भी एयर डिफेंस की अपनी कमजोरियां होती हैं।

S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की सबसे बड़ी दिक्कत ये है, कि किसी दुश्मन के मिसाइल या हथियार को ट्रैक करने के बाद इस प्रतिक्रिया में मिसाइल लॉन्च करने के लिए 5 मिनट का वक्त लगता है, लेकिन आधुनिक हथियार, जो अब सैटेलाइट से नेविगेट होने लगे हैं, वो काफी आसानी से हवाई ISR प्लेटफॉर्म और ELINT सिस्टम को ट्रैक कर सकते हैं। S-400 एक बड़ी प्रणाली है, हालांकि अच्छी तरह से फैली हुई है, फिर भी इसे छिपाना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा, इसकी बैटरियों का इस्तेमाल करने के लिए इस एक जगह पर स्थिर करना होता है, जो दुश्मन के हाथों में एक बड़ा मौका देता है।

जब भारत या फिर चीन ने एस-400 खरीदा था, तो इसे टेक्नोलॉजी और परीक्षणों के आधार पर अच्छी तरह से जांच परख के बाद खरीदा गया था। लेकिन, वास्तविक युद्ध की परिस्थितियां अलग होती हैं और कितना भी परीक्षण आखिरी नहीं होता है। कीमत के हिसाब से भारत के लिए ये एक सटीक सिस्टम था और अमेरिका ने इसपर प्रतिबंध भी लगा दिए थे, जिससे इसकी क्षमता की पुष्टि भी होती है, लेकिन जिस तरह से रूसी एस-400 को ध्वस्त किया गया है, उसने भारत की चिंताएं जरूर बढ़ा दी हैं।

ऐसा माना जा रहा है, कि रूस भारत को इस मिसाइल सिस्टम को अपग्रेड करने की पेशकश कर सकता है, लिहाजा भारत को इसका फायदा उठाना होगा। इसके अलावा, युद्ध की स्थिति में भारत को इस मिसाइल सिस्टम को छिपाकर युद्ध करना होगा।

भारत ने चीन और पाकिस्तान के हमलों से बचाव के लिए एस-400 सिस्टम खरीदे हैं। दोनों निश्चित रूप से मिसाइल और रॉकेट हमलों के साथ-साथ ड्रोन का उपयोग करके इसे निशाना बनाएंगे। भारत अपने एयर डिफेंस सिस्टम के साथ भी ऐसा ही करेगा। इसीलिए हमें याद रखना चाहिए कि S-400.. विरोधियों के AEW&C मिसाइल और उनके लड़ाकू विमानों के लिए काफी खतरनाक साबित होंगे, लेकिन भारत को इसके अलावा भी अपनी डिफेंस को मजबूत करने के लिए काम करना होगा।

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