जिनपिंग के बुलाने पर चीन जा रहे पुतिन, वारंट निकलने के बाद रूसी राष्ट्रपति की पहली विदेश यात्रा

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत में होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन में शामिल नहीं होंगे। इसको लेकर पुतिन और पीएम मोदी के बीच सोमवार को बातचीत भी हुई थी। इस दौरान उन्होंने शिखर सम्मेलन में शामिल होने को लेकर असमर्थता जाहिर की थी।

इस बीच खबर आ रही है कि पुतिन चीन जाने की तैयारी कर रहे हैं। ब्लूमबर्ग ने मामले की जानकारी रखने वाले तीन लोगों का हवाला देते हुए बताया कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अक्टूबर में बेल्ट एंड रोड फोरम के लिए चीन का दौरा करेंगे।

putin visit China in octobet

कथित युद्ध अपराधों के लिए रूसी राष्ट्रपति के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद पुतिन की यह पहली विदेश यात्रा होगी। हालांकि इस वारंट को क्रेमलिन ने सख्ती से खारिज कर दिया था।

रिपोर्ट के मुताबिक पुतिन ने बेल्ट एंड रोड फोरम कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कथित तौर पर चीनी नेता शी जिनपिंग के निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है। ऐसे में अब मॉस्को में पुतिन की यात्रा को लेकर तैयारियां चल रही हैं।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, पुतिन कथित तौर पर उन देशों का दौरा करने के इच्छुक हैं जहां उनकी सिक्योरिटी सर्विस पूरी तरह से उनकी सुरक्षा की गारंटी दे सकती है, और चीन उन स्थानों में से एक है।

क्रेमलिन के विदेश नीति सहयोगी यूरी उशाकोव ने जुलाई में कहा था कि पुतिन ने चीन जाने की योजना बनाई है, जबकि सुरक्षा परिषद सचिव निकोलाई पेत्रुशेव ने मई में कहा कि चीन ने रूसी नेता को कार्यक्रम में 'मुख्य अतिथि' के रूप में आमंत्रित किया है।

बता दें कि अप्रैल में जब चीन के राष्ट्रपति मास्को पहुंच थे तो तभी उन्होंने, रूसी राष्ट्रपति पुतिन को चीन आने का निमंत्रण दिया था जिसे उन्होंने तभी स्वीकार कर लिया था। आपको बता दें कि इसी साल मार्च में हेग (नीदरलैंड्स) की अदालत की ओर से गिरफ्तारी वारंट जारी करने के बाद पुतिन रूस से बाहर नहीं गए हैं।

पुतिन हीते सप्ताह दक्षिण अफ्रीका में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भी शामिल नहीं हो पाए थे। वह यहां पर वर्चुअल रूप से शामिल हुए। दक्षिण अफ्रीका ICC के सदस्य देशों में शामिल है। ऐसे में अगर पुतिन यहां आते तो उन्हें गिरफ्तारी का सामना करना पड़ सकता था।

दरअसल, जो 123 देश आईसीसी के सदस्य हैं, वो गिरफ्तारीरी वॉरंट को लागू कराने में सहयोग करने के लिए बाध्य हैं। हालांकि भारत ICC का सदस्य नहीं है, ऐसे में पुतिन को ऐसी स्थिति का सामना करना होगा। फिर भी पुतिन यहां नहीं आ रहे हैं।

कुछ मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पुतिन, SCO समिट में शामिल होने के लिए पुतिन भारत आना चाहते थे, लेकिन जब भारत सरकार ने वर्चुअल समिट कराने का फैसला लिया तो पुतिन को भारत आने की कोई वजह नहीं दिखी।

हालांकि अब पुतिन के जी20 में शामिल न होने पर पश्चिमी देश इसको रुस-चीन अलायंस बताना चाहते हैं, लेकिन ये जगजाहिर है कि रुस के लिए भारत भी उनकी प्राथमिकता में है।

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