'पश्चिमी देशों ने अपनी सीमा पार कर लीं', पुतिन की डराने वाली चेतावनी, सेना को लामबंदी के दिए आदेश

रूस ने अभी तक यूक्रेन में अपने सैनिकों को भेजने को युद्ध नहीं कहा है, बल्कि रूस का कहना है, कि वो यूक्रेन में सैन्य अभियान चला रहा है, क्योंकि यूक्रेन से दो स्वतंत्र राज्य लोहान्स्क और डोनाट्स्क ने रूस से सैन्य मदद मांगी

मॉस्को, सितंबर 21: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बुधवार को रूसी सैनिकों को लामबंद होने की घोषण की है और उन्होंने धमकी देते हुए कहा है, कि पश्चिमी देशों ने अपनी सीमा रेखा पार कर ली है। रूसी राष्ट्रपति ने देश को संबोधित करते हुए कहा है कि, 'पश्चिम ने सीमा रेखा पार कर ली है। पश्चिमी देश रूस को कमजोर करने, विभाजित करने और नष्ट करने के लिए आह्वान कर रहे हैं। हम अपने देश के भविष्य का निर्माण करने का वायदा करने वालों का समर्थन करते हैं और हमारा विशेष ऑपरेशन का लक्ष्य अपरिवर्तित है और एलपीआर पूरी तरह से मुक्त हो गया है। और डीपीआर आंशिक तौर पर मुक्त हो गया है।

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    रूसी राष्ट्रपति की डराने वाली चेतावनी

    रूसी राष्ट्रपति की डराने वाली चेतावनी

    रूसी न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने देश में मौजूद सैनिकों को आंशिक तौर पर लामबंद होने के आदेश जारी किए हैं और उन्होंने कहा है, कि पश्चिमी देश हमारी अर्थव्यवस्था को बर्बाद करना चाहते हैं, और पश्चिमी देशों ने यूक्रेन के लोगों को तोप के गोलों का शिकार बनाने की कोशिश की है और पश्चिमी देश रूस के साथ प्रॉक्सी युद्ध कर रहे हैं। रूसी राष्ट्रपति का रिकॉर्डेट भाषण रूसी टेलीविजन पर प्रसारित किया गया है और समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने उनके भाषण का अंग्रेजी में अनुवाद प्रसारि किया है, जिसमें रूसी राष्ट्रपति ने पश्चिमी देशों को जमकर धमकाया है और पश्चिमी देशों पर प्रॉक्सी लड़ाई शुरू करने का आरोप लगाया है। ज्यादा जानकारी दिए बगैर रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि, बुधवार से सेना की लामबंदी शुरू होगी और उन्होंने रूसी हथियारों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए बजट बढ़ाने का भी आदेश दे दिया है।

    क्या यूक्रेन ऑपरेशन को युद्ध कहेंगे पुतिन?

    क्या यूक्रेन ऑपरेशन को युद्ध कहेंगे पुतिन?

    रूस ने अभी तक यूक्रेन में अपने सैनिकों को भेजने को युद्ध नहीं कहा है, बल्कि रूस का कहना है, कि वो यूक्रेन में सैन्य अभियान चला रहा है, क्योंकि यूक्रेन से दो स्वतंत्र राज्य लोहान्स्क और डोनाट्स्क ने रूस से सैन्य मदद मांगी थी। लेकिन, अगर रूसी राष्ट्रपति ने युद्ध के 6 महीने से ज्यादा बीत जाने के बाद अपने सैनिकों को लामबंदी के आदेश दिए हैं, तो इसका मतलब ये हुआ, कि वो अब युद्ध की आधिकारिक घोषणा भी कर सकते हैं। राष्ट्रपति पुतिन के इस आदेश का मतलब ये हुआ, कि अब रूसी नागरिकों को युद्ध के लिए ज्यादा योगदान देना होगा और पुतिन ने इसे रूस के खिलाफ पश्चिमी देशों का प्रॉक्सी युद्ध करार दिया है, जिसका मतलब ये हुआ, कि उन्होंने देश की जनता को बताया है, कि पश्चिमी देशों ने रूस के खिलाफ आर्थिक युद्ध शुरू कर दिया है।

    सैनिकों की लामबंदी का मतलब?

    सैनिकों की लामबंदी का मतलब?

    मंगलवार को ही अटकलें तेज हो गईं थी, कि राष्ट्रपति पुतिन रूसी अर्थव्यवस्था और समाज की पूर्ण या आंशिक लामबंदी की घोषणा करने वाले हैं और उन दोनों को युद्ध स्तर पर रखा जा सकता है। यानि, अब पुतिन ने अपनी सेना में संभावित भर्ती का रास्ता खोल दिया है। रूसी राष्ट्रपति के बयान का मतलब ये हुआ, कि अभी तक रूस ने यूक्रेन में जितने क्षेत्र पर कब्जा किया है, उस कब्जे को बरकरार रखने के लिए और सैनिकों को भेजेंगे और इसके लिए सेना में नई भर्ती की जाएगी। इसके साथ ही रूसी राष्ट्रपति ने यूक्रेन के क्षेत्रों की रूस में शामिल होने पर तत्काल जनमत संग्रह कराने की योजना की घोषणा कर दी है। यानि, जिन क्षेत्रों पर रूसी सैनिकों का कब्जा है, वहां के लोगों से पूछा जाएगा, कि वो रूस में शामिल होना चाहते हैं, या फिर यूक्रेन में रहना चाहते हैं और इस आधार पर उन क्षेत्रों का फैसला किया जाएगा। आपको बता दें कि, रूस ने जिन क्षेत्रों पर कब्जा किया है, वो रूस समर्थिक अलगाववादियों द्वारा नियंत्रित यूक्रेनी क्षेत्र है और जनमत संग्रह कराने की बात को यूक्रेन खारिज करता रहा है।

    जनमत संग्रह में धांधली होने की आशंका

    जनमत संग्रह में धांधली होने की आशंका

    रिपोर्ट के मुताबिक, इस हफ्ते के अंत तक डोनेट्स्क, लुहान्स्क, खेरसॉन और ज़ापोरिज्जिया में जनमत संग्रह कराया जाएगा और वोटिंग के दौरान रूस में शामिल होने के पक्ष में व्यापक रूप से धांधली होने की उम्मीद है, हालांकि, क्रेमलिन का दावा है, कि वोटिंग के दौरान किसी भी तरह की कोई धांधली नहीं की जाएगी। लेकिन, एक्सपर्ट्स का कहना है, कि क्रेमलिन का ये दावा झूठा है और बंदूक हाथ में लेकर कोई जनमत संग्रह नहीं होता है। वहीं, जनमत संग्रह की निंदा पश्चिमी देशों की भी तरफ से की गई है और अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ साथ यूक्रेन ने भी कहा है, कि मतपत्रों के जरिए यूक्रेन को विभाजित करने की अनुमित कभी नहीं दी जाएगी और वो इस जनमत संग्रह को मान्यता नहीं देंगे। इससे पहले रूस साल 2014 में क्रीमिया पर भी हमला करने के बाद जनमत संग्रह करा चुका है और क्रीमिया को यूक्रेन से छीनकर रूस का हिस्सा बना चुका है।

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