क्या भारत 25% छूट पर रूस से कच्चा तेल खरीदेगा? पुतिन के जबरदस्त ऑफर पर भारत ने दिया जवाब
रूस सरकार द्वारा संचालित रोसनेफ्ट तेल कंपनी, भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति करने वाली सबसे बड़ी तेल कंपनियों में से एक है, जिसने भारत को तेल खरीदने का जबरदस्त ऑफर दिया है।
मॉस्को/नई दिल्ली, मार्च 10: यूक्रेन युद्ध के बीच रूस के खिलाफ अमेरिका समेत तमाम पश्चिमी देशों ने कई कड़े प्रतिबंध लगाए हैं और अमेरिका ने रूस से कच्चे तेल के आयात पर भी प्रतिबंध लगा दिया है, जिसके बाद पूरी दुनिया में तेल की कीमत में बेतहाशा इजाफा हो रहा है। लेकिन, इस बीच रूस की तेल कंपनियों ने भारत को काफी सस्ते दाम पर तेल बेचने का ऑफर दिया है, लेकिन क्या भारत सरकार इस स्थिति में है, कि वो रूस से कच्चा तेल खरीदे?

भारत-रूस: तेल समझौता
बिजनेस स्टैंडर्ड की खबर के मुताबिक, अमेरिका और यूरोपीय देशों की तरफ से प्रतिबंध लगने के बाद रूस की बड़ी तेल कंपनियां हताश नजर आ रही हैं और भारत को तेल खरीदने के लिए बंपर ऑफर दे रही हैं। बिजनेस स्टैंडर्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, घटनाक्रम से परिचित सूत्रों ने बताया है कि, रूसी तेल कंपनियां भारत को ब्रेंट क्रूड की पुरानी कीमतों पर 25-27 फीसदी की छूट दे रही हैं।

रोसनेफ्ट तेल कंपनी का ऑफर
रूस सरकार द्वारा संचालित रोसनेफ्ट तेल कंपनी, भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति करने वाली सबसे बड़ी तेल कंपनियों में से एक है। पिछले साल दिसंबर में जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा पर आए थे, उस वक्त रोसनेफ्ट और इंडिया ऑयल के बीच 2 करोड़ टन तेल आपूर्ति के लिए समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत रूसी तेल कंपनी को नोवोरोस्सिएस्क बंदरगाह के जरिए भारत को तेल की आपूर्ति करनी थी।

रूसी तेल कंपनियों का ऑफर
बिजनेस स्टैंडर्ट अखबार ने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि, रूसी तेल कंपनियों ने कच्चे तेल की पुरानी कीमतो पर 25-27 प्रतिशत तक छूट देने का ऑफर दिया है। रूसी तेल कंपनियों ने कहा है कि, 'जो प्रस्ताव दिए गये हैं, वो आकर्षत हैं'। लेकिन, भारत के लिए रूसी तेल कंपनियों से मिल इस ऑफर का फायदा उठाना आसान नहीं है। जबकि, रूस पर लगे प्रतिबंधों के बाद भारत के लिए रूस से तेल आयात करना अब आसान नहीं रहा है, क्योंकि यूक्रेन संकट में भारत की 'तटस्थ' नीति के चलते अमेरिका और पश्चिमी देशों का भारी प्रेशर भारत पर है और भारत सरकार की तरफ से भी रूस से तेल खरीदने पर कई मजबूरियों की बात कही गई है।

भारत उठाएगा ऑफर का फायदा?
रूसी तेल कंपनी के ऑफर पर भारतीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि, रूस से तेल खरीदने पर कई कारक हैं, जो जिम्मेदार हो सकते हैं और रूस-यूक्रेन युद्ध का प्रभाव तेल की कीमतों और भारत के तेल खरीदने के कारक को प्रभावित करेगा। भारतीय वित्त मंत्री ने कहा कि, "पिछले दो-तीन दिनों में रूस द्वारा तेल खरीदने को लेकर किसी तरह का रियायत देने की पेशकश की गई थी, लेकिन हम नहीं जानते कि यह कैसे प्रभावी हो सकता है, क्योंकि बहुत सारे कारकों को तौलना होगा। हमें रूस से तेल खरीदने के लिए किसी बंदरगाह की जरूरत होगी, जहां से हम तेल मंगवा सकते हैं और देखना होगा, कि क्या तेल मंगवाने का ये तरीका व्यावहारिक होगा और क्या इसमें बीमा कवर उपलब्ध है?'' भारतीय वित्त मंत्री ने कहा कि, कई सारे फैक्टर हैं, जो इसके पीछे काम कर रहे हैं।

रूस से कितना तेल खरीदता है भारत?
आपको बता दें कि, रूस और भारत के बीच तेल सप्लाई का डायरेक्ट लिंक नहीं है और भारत भारत रूस से 2 प्रतिशत से भी कम तेल का आयात करता है, लेकिन ऊर्जा की बढ़ती कीमतों को देखते हुए, और यूएस और यूके रूसी तेल के आयात पर प्रतिबंध लगा चुके हैं, जिसका अर्थ है, पश्चिम एशिया में आपूर्तिकर्ताओं से तेल की मांग, जहां से भारत ज्यादा तेल का आयात करता है और तेल की कीमतों में इजाफा होने का सीधा असर भारत पर पड़ सकता है। लेकिन, भारत के लिए चाहकर भी रूस से तेल खरीदना आसान नहीं होगा, क्योंकि, अमेरिकी प्रतिबंद के बाद भारत को मजबूरी में ईरान से भी तेल खरीदना बंद करना पड़ा था, जबकि ईरान से तेल खरीदना भारत के लिए काफी सस्ता था। हालांकि, भारतीय वित्त मंत्री ने कहा है कि, 'संबंधित मंत्रालय इस मुद्दे पर विचार कर रहा है।'

तेल की कीमत बढ़ने का भारत पर असर
अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें देखें तो पिछले साल 26 अक्टूबर को यह 86 डॉलर प्रति बैरल बिक रहा था। आज की कीमत के हिसाब से तेल कंनियों को घाटे की भरपाई के लिए पेट्रोल और डीजल के दामों में करीब 52 पैसे प्रति डॉलर के हिसाब से बढ़ोतरी करनी पड़ेगी। जब नवंबर में चुनावों से पहले अंतिम बार पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाई गई थीं, तब से यह करीब 50 डॉलर प्रति बैरल महंगा हो चुका है। अगर राजधानी दिल्ली की बात करें तो इस समय पेट्रोल 95.41 रुपये प्रति लीटर और डीजल 86.67 प्रति लीटर बिक रहा है। इस हिसाब से 26 रुपये प्रति लीटर तक दाम बढ़ाने का दबाव देखने को मिल सकता है। काफी कुछ केंद्र और राज्य सरकारों पर भी निर्भर है कि वह उपभोक्ताओं को टैक्स में राहत देती है या नहीं ?

भारत पर होगा अमेरिका का दबाव
अमेरिकी प्रतिबंधों की वदह से भी भारत ने ईरान से तेल खरीदना बंद किया था, जबकि भारत और अमेरिका के बीच काफी अच्छे संबंध थे और ईरान से तेल खरीदना भारत के लिए काफी सस्ता भी था। वहीं, अमेरिकी प्रतिबंधों का दूसरे देशों पर रूस से कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस के आयात पर कोई असर नहीं पड़ेगा। खुद घोषणा करते वक्त बाइडेन ने भी कहा है कि, यह फैसला वह अपने यूरोपीय सहयोगियों से चर्चा के बाद कर रहे हैं और उनसे ना तो उम्मीद करते हैं और ना ही कहेंगे, कि वह भी अपने आयातों पर पाबंदी लगाएं। उन्होंने कहा है कि, 'अमेरिका यह कदम उठाने में इसीलिए सक्षम है क्योंकि उसके पास खुद का मजबूत घरेलू ऊर्जा उत्पादन और इंफ्रास्ट्रक्चर है। और हम समझते हैं कि हमारे सभी सहयोगी और साझीदार इस समय हमारे साथ आने की स्थिति में नहीं हैं।'' लेकिन, एक्सपर्ट्स का मानना है कि, अमेरिका भी चाहेगा, कि रूस पर प्रतिबंधों का गहरा असर हो, लिहाजा उसके सहयोगी देश भी रूस से तेल नहीं खरीदे।

रूस से व्यापार करना काफी मुश्किल हुआ
भारत के लिए अब रूस से व्यापार काफी मुश्किल हो गया है। रूस को इंटरनेशनल बैंकिंग सिस्टम 'स्विफ्ट' से बाहर निकाल दिया गया है, जिसकी वजह से अगर भारत रूस से तेल का आयात करता भी है, तो फिर भारत उसका पेमेंट कैसे करेगा, ये बड़ा सवाल है। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक और भारत सरकार, रूस को पेमेंट कैसे करे, इसके लिए वैकल्पिप रास्तों को खोज रही है और उन रास्तों पर विचार कर रही है। भारतीय कंपनियों और बैंकों के साथ बात भी चल रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, रूस की तरफ से भारत को रूस की करेंसी 'रूबल' में व्यापार खाते को एक्टिव करने सुझाया है, लेकिन क्या भारत सरकार रूसी करेंसी में व्यापार करेगी, अभी तक तय नहीं किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार तमाम विकल्पों पर विचार कर रही है।












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