उत्तर कोरिया के साथ संबंधों को विस्तार देगा रूस, किम जोंग से दोस्ती कर पुतिन को क्या हासिल होगा?
जब रूस ने यूक्रेन पर आक्रमण किया था, उस वक्त उत्तर कोरिया ने रूस का समर्थन करते हुए अमेरिका की जमकर आलोचना की थी और उसके ठीक बाद, 26 फरवरी को उत्तर कोरिया ने बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया था।
मॉस्को, अगस्त 15: उत्तर कोरिया की सरकारी न्यूज एजेंसी केसीएनए ने दावा किया है, कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन से कहा है, कि दोनों देश "साझा प्रयासों के साथ व्यापक और रचनात्मक द्विपक्षीय संबंधों का विस्तार करेंगे।" उत्तर कोरिया की केसीएनए समाचार एजेंसी ने कहा कि, कोरिया के 'मुक्ति दिवस' के मौके पर रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने किम जोंग उन को एक पत्र लिखा है, जिसमें राष्ट्रपति पुतिन ने उत्तर कोरिया और रूस के संबंधों को विस्तार देने की बात कही है।

किम जोंग उन को पुतिन का पत्र
केसीएनए की रिपोर्ट के मुताबिक, रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने किम जोंग उन को जो चिट्ठी लिखी है, उसमें कहा गया है, कि अगर रूस और उत्तर कोरिया के बीच संबंधों का विस्तार होता है, तो ये दोनों देशों के लिए हितकारी होगा और कोरियाई प्रायद्वीप और पूर्वोत्तर एशियाई क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता को मजबूत करने में मदद मिलेगी। केसीएनएन के मुताबिक, रूसी राष्ट्रपति के पत्र के जवाब में किम जोंग उन ने भी पुतिन को एक पत्र भेजा है, जिसमें कहा गया है कि, द्वितीय विश्व युद्ध में जापान पर जीत के साथ रूसी-उत्तर कोरियाई दोस्ती फर्जी थी, जिसने कोरियाई प्रायद्वीप पर कब्जा कर लिया गया था। लेकिन अब, किम जोंग ने पत्र में कहा है कि, दोनों देशों के बीच "रणनीतिक और सामरिक सहयोग, समर्थन और एकजुटता" एक नए स्तर पर पहुंच गई है, जो शत्रुतापूर्ण सैन्य बलों से खतरों और उकसावे को नाकाम करने के उनके सामान्य प्रयास हैं'। हालांकि, केसीएनए ने शत्रुतापूर्ण ताकतों के नाम नहीं बताए हैं, लेकिन उत्तर कोरिया अमेरिका के लिए ही ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करता है।

पुतिन से दोस्ती को तैयार किम जोंग उन
किम जोंग उन ने साल 2019 में रूसी राष्ट्रपति पुतिन के साथ मुलाकात के दौरान हस्ताक्षर किए गये एक समझौते के आधार पर रूस और उत्तर कोरिया के बीच सहयोग बढ़ने की भविष्यवाणी की है। इसी साल जुलाई महीने में उत्तर कोरिया ने पूर्वी यूक्रेन में दो रूसी समर्थित राज्य "पीपुल्स रिपब्लिक" को स्वतंत्र राज्यों के रूप में मान्यता दी है, और उत्तर कोरिया ने कहा है, कि अगर रूस को जरूरत हुई, तो उत्तर कोरिया से निर्माण और अन्य मानवीय मदद के लिए उत्तर कोरियाई श्रमिकों को क्षेत्रों में भेजे जाने के लिए तैयार है। आपको बता दें कि, यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से ही उत्तर कोरिया लगातार रूस का समर्थन कर रहा है और उत्तर कोरिया ने राष्ट्रपति पुतिन के सुर में सुर मिलाते हुए यूक्रेन पर आक्रमण को पुतिन की भाषा में ही 'सैन्य अभियान' करार दिया, जिसके बाद यूक्रेन ने उत्तर कोरिया से तमाम संबंध तोड़ लिए हैं।

रूस के समर्थन में उत्तर कोरिया
आपको बता दें कि, जब रूस ने यूक्रेन पर आक्रमण किया था, उस वक्त उत्तर कोरिया ने रूस का समर्थन करते हुए अमेरिका की जमकर आलोचना की थी और उसके ठीक बाद, 26 फरवरी को उत्तर कोरिया ने बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया था। उत्तर कोरिया ने रूस को समर्थन देते हुए कहा था, कि "यूक्रेन की घटना का मूल कारण संयुक्त राज्य अमेरिका की मनमानी है, जिसने सुरक्षा गारंटी के लिए रूस की वैध चिंताओं को नजरअंदाज कर दिया है और केवल अपने प्रतिबंध अभियानों से चिपके रहते हुए वैश्विक आधिपत्य और सैन्य प्रभुत्व को बढ़ावा दिया है"। ये बयान उत्तर कोरिया के अंतर्राष्ट्रीय राजनीति पर उत्तर कोरिया सरकार द्वारा संचालित संस्थान के शोधकर्ता री जी सोंग ने दिया था और उनके बयान को उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर पोस्ट किया गया था। री जी सोंग ने वाशिंगटन पर "अहंकार" और "दोहरे मानदंड" अपनाने का आरोप लगाया था।

उत्तर कोरिया को प्रतिबंधों से बचाता है रूस
उत्तर कोरिया ने 2006 में परमाणु परीक्षण किया था, जिसके बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने उत्तर कोरिया पर प्रतिबंध लगा दिए थे और फिर उत्तर कोरिया ने आगे जाकर जब और भी कई बैलिस्टिक मिसाइलोंका का परीक्षण किया, तो उन प्रतिबंधों को और भी ज्यादा सख्त कर दिया गया। संयुक्त राष्ट्र की पूर्व राजदूत निक्की हेली ने 2018 में कहा था कि, प्रतिबंधों ने सभी उत्तर कोरियाई निर्यात और उसके व्यापार को 90 फीसदी तक खत्म कर दिया है। प्रतिबंधों का असर कम पड़े, लिहाजा उत्तर कोरिया ने बड़े पैमाने पर लोगों को विदेशों में कमाने के लिए भेजा था, लेकिन उसपर भी जब सख्ती बढ़ा दी गई, तो फिर उत्तर कोरिया और ज्यादा चालाकी नहीं दिखा पाया। हालांकि, उसके बाद उत्तर कोरिया की मदद के लिए चीन और रूस साथ आ गये और उसके बाद से जब भी यूएनएससी में उत्तर कोरिया के खिलाफ प्रस्ताव लाया गया, चीन और रूस ने उस प्रस्ताव को वीटो कर गिरा दिया।












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