Russia Vaccine Update: रूस की सुपरफास्ट कोरोना वैक्सीन पर क्यों उठ रहे हैं सवाल
नई दिल्ली- चीन के वुहान में कोरोना वायरस का पहला मामला सामने आने के करीब 9 महीने बाद रूस पहला देश बन गया है, जिसने कोविड-19 वैक्सीन को मंजूरी दे दी है। रूस ने इसे स्पुतनिक 5 (Sputnik V- दुनिया का पहला सैटेलाइट) माना है। इस वैक्सीन के आम लोगों में इस्तेमाल की घोषणा करते हुए रूसी राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन ने मंगलवार को इसे दुनिया के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण कदम बताया है। पुतिन के मुताबिक वैक्सीन बहुत ही अच्छी तरह से काम करता है और कोविड-19 वायरस के खिलाफ एक स्थाई इम्युनिटी उपलब्ध कराता है। पुतिन के मुताबिक उनकी एक बेटी ने भी इस वैक्सीन का प्रयोग किया है और वो बहुत ही अच्छा महसूस कर रही हैं। लेकिन, रूस और उसके राष्ट्रपति के तमाम दावों के बावजूद दुनियाभर में इस वैक्सीन की उपयोगिता, क्षमता और सुरक्षा को लेकर तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं।
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रूसी वैक्सीन को लेकर क्यों पैदा हो रहे हैं संदेह
कोरोना वायरस की रूसी वैक्सीन को मॉस्को स्थित गमालेया इंस्टीट्यूट ने वहां के रक्षा मंत्रालय के साथ मिलकर विकसित किया है। लेकिन, इसकी सुरक्षा और क्षमता को लेकर सबसे ज्यादा संदेह इस वजह से किया जा रहा है कि बिना क्लिनिकल ट्रायल पूरा हुए इसे जनता के उपयोग को मंजूरी मिल गई है। यह वैक्सीन नोवल कोरोना वायरस की तरह का ही एक एडेनोवायरस के डीएनए पर आधारित है तो सामान्य सर्दी वाला वायरस है। यह वैक्सीन कमजोर पड़ चुके वायरस के इस्तेमाल से रोग-प्रतिरोधी प्रक्रिया को प्रोत्साहित करता है। इसके बारे में गमालेया नेशनल रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर अलेक्जेंडर गिन्ट्सबर्ग ने दावा किया है कि वैक्सीन में मौजूद कोरोना वायरस के कण इंसान के शरीर को नुकसान नहीं पहुंचा सकता, क्योंकि यह मल्टीप्लाई नहीं कर सकता।

मानवीय ट्रायल का तीसरा चरण हुआ या नहीं ?
रूस ने अभी तक क्लिनिकल ट्रायल के पहले फेज का रिजल्ट ही सार्वजनिक किया है, जिसमें उसने दावा किया है कि वह सफल रहा और जरूरत के मुताबिक इम्युन हासिल कर लिया गया। जुलाई के मध्य में एक रूसी न्यूज एजेंसी ने रक्षा मंत्रालय के हवाले से कहा था कि किसी भी वॉलेंटियर से किसी तरह की शिकायत नहीं मिली है और उनमें कोई साइड इफेक्ट नहीं देखा गया है। 17 जून को शुरू हुए पहले फेज की क्लिनिकल ट्रायल में 76 वॉलेंटियर शामिल हुए, जिनमें से ज्यादा सेना के ही लोग थे। उनमें से आधे को तरल रूप में वैक्सीन का इंजेक्शन दिया गया और आधे को घुलने लायक पाउडर के रूप में। न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक दूसरा फेज 13 जुलाई को शुरू हुआ था। लेकिन, 3 अगस्त को ही रूसी मीडिया ने दावा किया कि गमालेया इंस्टीट्यूट ने क्लिनिकल ट्रायल पूरे कर लिए हैं। यह नहीं बताया गया कि सिर्फ दो ही फेज पूरे हुए हैं या तीनों पूरे हो चुके हैं। जबकि, दूसरे चरण में ही सामान्य तौर पर कई महीने लग जाते हैं। गौर करने वाली बात यह है कि रूस ने पहले ये संकेत भी दिया था कि तीसरा फेज रेगुलेटरी से मंजूरी मिलने के बाद आम जनमानस में शुरू किया जाएगा!!!

विशेषज्ञों को रूसी वैक्सीन को लेकर डर क्यों है?
रूस ने जिस सुपरफास्ट स्पीड से वैक्सीन बना लेने का दावा किया है, उससे दुनियाभर के विशेषज्ञों के कान खड़े हो रहे हैं। आशंका है कि कहीं ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका और मॉडर्ना-फाइजर जैसी अग्रणी संस्थाओं को पीछे छोड़ने की होड़ में लोगों की जान खतरे में तो नहीं डाली जा रही है। सबसे बड़ी चिंता की बात तो यही है कि इंसानों पर ट्रायल के तीन चरणों में जब आमतौर पर कई साल लग जाते हैं, रूस ने इसे दो महीनों से भी कम समय में कैसे पूरा कर लिया है। हालांकि, रूस का कहना है कि ऐसा इसलिए संभव हो पाया, क्योंकि एक और कोरोना वायरस से होने वाले रोग मिडिल ईस्ट रेसपिरेटरी सिंड्रोम (MERS) की वैक्सीन का पहले से ही बड़े पैमाने पर परीक्षण किया जा चुका था और कोविड-19 वैक्सीन कैंडिडेट का उससे बेहद करीबी नाता है। जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के एक ग्लोबल पब्लिक हेल्थ लॉ एक्सपर्ट लॉरेंस गोस्टिन ने कहा है कि 'मैं चिंतित हूं कि रूस जल्दबाजी कर रहा है, जिससे ऐसा वैक्सीन आएगा, जो कि सिर्फ अप्रभावी ही नहीं, बल्कि असुरक्षित भी होगा। इसने उस तरह से काम नहीं किया है........ट्रायल पहले होता है।' संक्रित रोगों के अमेरिका के सबसे बड़े विशेषज्ञ डॉक्टर एंथनी फॉकी ने भी वैक्सीन को लेकर हुई जल्दबाजी को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा है कि वो उम्मीद करते हैं कि चीन और रूस के वैज्ञानिक किसी को वैक्सीन लगाने से पहले उसका परीक्षण जरूर करेंगे। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी किसी जल्दबाजी के प्रति रूस को आगाह कर चुका है।

बाजार में कब आएगी रूसी वैक्सीन ?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक रूस के उप प्रदानमंत्री तत्याना गोलीकोवा ने वादा किया है कि सितंबर में इसका (Gam-COVID-Vac Lyo) ऑद्योगिक उत्पादन शुरू हो जाएगा। हालांकि, स्टेट रजिस्टार ऑफ फार्मास्यूटिकल की वेबसाइट के मुताबिक वैक्सीन 1 जनवरी, 2021 से जनता के बीच आ जाएगी। जबकि, रूस के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा है कि मेडिकल स्टाफ समेत जिन समूहों को इससे ज्यादा खतरा है, उन्हें इसी महीने वैक्सीन दी जा सकती है और अक्टूबर से बड़े पैमाने पर टीकाकरण कार्यक्रम लॉन्च किया जाएगा। उनके मुताबिक डॉक्टरों और टीचरों को सबसे पहले वैक्सीन लगाई जाएगी। गौरतलब है कि रूस में सभ्रांत लोगों को अप्रैल की शुरुआत में ही प्रयोग के तौर पर वैक्सीन लगाई गई थी। रूस ने अभी इसकी कीमत नहीं बताई है।

क्या भारत में आएगी रूसी वैक्सीन?
हाल ही में रूस के उद्योग और व्यापार मंत्री डेनिस मैन्तुरोव ने एक इंटरव्यू में कहा था कि इसी साल से हर महीने कई हजार डोज बनाई जाएगी और 2021 में उसकी संख्या लाखों में पहुंच जाएगी। उधर रूसी डायरेक्ट इंवेस्टमेंट फंड के चीफ किरिल दमित्रियेव ने कहा है कि रूसी वैक्सीन के प्रति 20 से ज्यादा देशों ने इच्छा जताई है, जिसमें ब्राजील और भारत जैसे देश शामिल हैं। उन्होंने कहा कि 5 से ज्यादा देश तो अब उसके साथ उत्पादन शुरू करने में सक्रिय सहयोग दे रहे हैं। वैसे टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन में रूसी वैक्सीन के इस्तेमाल की संभावना नहीं है। जहां तक भारत का सवाल है तो स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक वैक्सीन एडमिनिस्ट्रेशन को देखने के लिए नेशनल एक्सपर्ट ग्रुप का गठन किया गया था, जो इससे संबंधित सभी पहलुओं पर विचार करता है।
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