बिना युद्ध लड़े ही पुतिन ने कर दिए यूक्रेन के दो टुकड़े! हाथ मलता रह गया अमेरिका-NATO, जीत का जश्न
द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त होने के बाद से लगभग 80 सालों में दर्जनों युद्ध हुए हैं। लेकिन अगर रूस यूक्रेन पर हमला कर देता है, और जिस बात की संभावना सबसे ज्यादा दिख रही है, तो यह लगभग सभी युद्धों से अलग होगा।
कीव/मॉस्को/वॉशिंगटन/नई दिल्ली, फरवरी 22: आखिरकार जिस बात का डर था, वही हो रहा है और रूस एक तरह से युद्ध की शुरूआत कर चुका है। रूसी राष्ट्रपति पुतिन के इशारे पर रूसी सैनिक पूर्वी यूक्रेन में घुस चुके हैं और अब ऐसा लग रहा है, कि यूक्रेन दो हिस्सों में टूट चुका है। पूर्वी यूक्रेन के दो अलगाववादी क्षेत्रों डोनेट्स्क और लुगांस्क को स्वतंत्र राज्य का दर्जा देने के बाद रूस के इस कदम का पूरी दुनिया में विरोध हो रहा है, वहीं अमेरिका ने कहा है कि, वो यूक्रेन की मदद किसी भी हाल में करेगा।

यूक्रेन-रूस युद्ध होगा सबसे अलग!
द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त होने के बाद से लगभग 80 सालों में दर्जनों युद्ध हुए हैं। लेकिन अगर रूस यूक्रेन पर हमला कर देता है, और जिस बात की संभावना सबसे ज्यादा दिख रही है, तो यह लगभग सभी युद्धों से अलग होगा। यह एक और संकेत होगा कि दुनिया एक खतरनाक नए युग में प्रवेश कर रही है जिसमें सत्तावाद बढ़ रहा है। यूक्रेन पर रूसी आक्रमण में दुनिया की सबसे बड़ी सेनाओं में से एक शामिल होने की संभावना है, जो एक पड़ोसी देश पर अकारण जमीनी आक्रमण शुरू कर रही है। स्पष्ट लक्ष्य क्षेत्रीय प्रभुत्व का विस्तार होगा, या तो विलय या कठपुतली सरकार की स्थापना के माध्यम से सही। वहीं, पूर्वी यूक्रेन में रूसी सैनिकों के घुसने के बाद अब आशंका इस बात की है, कि रूसी सैनिक यूक्रेन के दूसरे हिस्से में भी दाखिल हो सकते हैं और राष्ट्रपति पुतिन की महत्वांकांक्षा बढ़ सकती है।

2014 में भी रूस कर चुका है हमला
आपको बता दें कि, इससे पहले साल 2014 में भी रूस ने यूक्रेन पर हमला किया था और यूक्रेन के कब्जे से क्रीमिया नाम के क्षेत्र को छीन लिया था। वहीं, इस बार अमेरिका का अनुमान है कि, करीब एक लाख 90 हजार से ज्यादा सैनिक यूक्रेन पर हमला कर सकते हैं और ये हमला काफी विध्वंसक हो सकता है। वहीं, ब्रिटिश खुफिया एजेंसियों ने कहा है कि, रूस आक्रमण की शुरूआत में ही यूक्रेन पर 'फॉदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स' का इस्तेमाल यूक्रेनियन सेना का मनोबल तोड़ने के लिए कर सकता है और इस बम विस्फोट से जो तबाही मचेगी, उसका अंदाजा भी लगाना मुश्किल है। रूसी राष्ट्रपति ने पूर्वी यूक्रेन के रूस समर्थित अलगाववादियों के द्वारा नियंत्रित डोनेट्स्क और लुगांस्क क्षेत्रों को स्वतंत्र राज्य के तौर पर मान्यता दे दी है और रूसी सेना को भेज दिया है। जिसके बाद अब सवाल ये है, कि क्या यूक्रेन दो हिस्सों में टूट चुका है, हालांकि ये दोनों हिस्से साल 2014 से ही यूक्रेन सरकार के नियंत्रण से बाहर रहे हैं।

मारे जा चुके हैं हजारों लोग
साल 2014 में जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया था, उस वक्त पूर्वी यूक्रेन में गृहयुद्ध छिड़ गया था और रूस समर्थित विद्रोहियों ने जमकर उत्पात मचाया था और एक आकलन के मुताबिक, उस गृहयुद्ध में कम से 14 हजार लोग मारे गये थे। हालांकि, रूस ने कभी नहीं माना कि, पूर्वी यूक्रेन में हिंसा को वो बढ़ावा दे रहा है और तमाम रिपोर्ट्स में भी और सार्वजनिर तौर पर पर भी रूस को लगातार विद्रोहियों का समर्थन करते हुए देखा गया। हालांकि, डोनेट्स्क और लुगांस्क क्षेत्र को चारों तरफ से यूक्रेन की सेना ही घेर रखा है, फिर भी रूस लगातार इन इलाकों में मदद पहुंचाता रहा है, जिसमें हथियारों से लेकर कोरोना वैक्सीन तक शामिल है।

डोनेट्स्क और लुगांस्क को जानिए
डोनेट्स्क और लुगांस्क खुद को अलग अलग देश कहते हैं और वो इसके लिए जनमत संग्रह का हवाला देते हैं, लेकिन दुनिया में इन दोनों को संतंत्र राज्य के तौर पर मान्यता नहीं मिली है और इन्हें यूक्रेन का ही हिस्सा माना जाता है। यूक्रेन और पश्चिमी देशों का कहना है कि, ''रूस ने पूर्वी विद्रोह को उकसाया है और उन्हें मजबूत करने के लिए सीमा पार हथियार और सैनिकों को भेजा है'। वहीं, अब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ऐलान कर दिया है, कि वह इन दोनों क्षेत्रों की स्वतंत्रता को मान्यता दे रहे हैं। डोनबास कीव और मॉस्को के बीच एक सांस्कृतिक लड़ाई के केंद्र में भी है, जो कहता है कि यह क्षेत्र, पूर्वी यूक्रेन का एक बड़ा हिस्सा है, जो रूसी भाषी बाहुल्य है और इसे यूक्रेनी राष्ट्रवाद से बचाने की जरूरत है। (रूसी सेना पहुंचने के बाद आतिशबाजी)

सोवियत संघ के दूसरे इलाकों पर नजर
विश्लेषकों का कहना है कि, रूस अगर यूक्रेन के टुकड़े करने में कामयाब हो जाता है, तो रूसी राष्ट्रपति सिर्फ यहीं नहीं रूकने वाले हैं और उनका ध्यान सोवियत संघ से अलग हो चुके दूसरे देशों पर होगी और उनका सबसे पहला निशाना जॉर्जिया हो सकता है, जहां के विद्रोहियों को भी रूस लगातार संरक्षण देता आया है। साल 2008 में रूस, जॉर्जिया से भी एक छोटा सा जंग लड़ चुका है और जॉर्जिया के दो क्षेत्र अबकाजिया और साउथ ओसेशिया, जहां रूस समर्थित विद्रोहियों की संख्या ज्यादा है, उन्हें स्वतंत्र क्षेत्र के तौर पर मान्यता दे चुका है। इन दोनों क्षेत्रों को स्वतंत्र क्षेत्र के तौर पर मान्यता देने के बाद रूस लगातार इनकी मदद करता आ रहा है और इन्हें विशालकाय बजट देने के साथ साथ, यहां के नागरिकों को रूसी नागरिकता भी देता आया है। वहीं, इन क्षेत्रों में भारी संख्या में रूसी सैनिक भी तैनात हैं।

यूक्रेन के और इलाकों पर कब्जा?
कई विश्लेषकों का कहना है कि, रूसी सैनिकों को ज्यादा से ज्यादा यूक्रेनी क्षेत्रों पर कज्बा करने के लिए कहा गया होगा और डोनेट्स्क और लुगांस्क गणराज्यों के लिए रूसी राष्ट्रपति यूक्रेन के और भी ज्यादा क्षेत्रों पर कब्जा कर सकते हैं, लेकिन यूक्रेन की सरकार रूसी राष्ट्रपति के इस मकसद को काफी अच्छे से समझती है और अगर पुतिन ऐसी कोशिश करते हैं, तो फिर युद्ध होना तय हो जाएगा। अभी तक युद्ध की शुरूआत सिर्फ इसलिए नहीं हुई है, क्योंकि जिन क्षेत्रों में रूसी सैनिक पहुंचे हैं, वहां यूक्रेन के सैनिक नहीं हैं, लेकिन अगर रूसी सैनिक यूक्रेन सरकार के नियंत्रण वाले क्षेत्रों में दाखिल होने की कोशिश करते हैं, तो फिर भीषण युद्ध का आगाज हो सकता है।












Click it and Unblock the Notifications