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दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर यूक्रेन की जनता! एक करोड़ से ज्यादा विस्थापित, कई संकट हुए उत्पन्न

यूक्रेन में जंग के हालात काफी बिगड़ चुके हैं। कीव के शहरों को तबाह और बर्बाद कर दिया गया है। हालांकि, अमेरिका यूक्रेन को हरसंभव सैन्य सहायता कर रहा है।

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी (U.N. High Commissioner for Refugees) के उच्चायुक्त फिलिपो ग्रांडी (Filippo Grandi) ने रूस-यूक्रेन जंग (Russia-Ukraine Conflict) की भयानक तस्वीर को दुनिया के समक्ष पेश किया। उन्होंने कहा कि 24 फरवरी को यूक्रेन पर रूस ने आक्रमण किया था। जंग की शुरुआत से लेकर अब तक करीब 14 मिलियन यानी की 1 करोड़ 40 लाख लोगों को उनके घरों से जबरन विस्थापित कर दिया गया। इसके साथ ही दुनिया भर में शरणार्थियों और विस्थापित लोगों की संख्या में 103 मिलियन से अधिक की वृद्धि हुई है। बुधवार को सुरक्षा परिषद को दिए एक ब्रीफिंग में संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी प्रमुख ने आगे कहा कि, यूक्रेन पर रूसी आक्रमण ने दशकों में अब तक का सबसे बड़ा विस्थापन को देखा है।

जंग के कारण 1 करोड़ 40 लाख विस्थापित

जंग के कारण 1 करोड़ 40 लाख विस्थापित

यूक्रेन को यूरोप का 'रोटी की टोकरी' कहा जाता है। जंग ने इस रोटी की टोकरी में जंग ने खून की लाल स्याही भर दी है। बुधवार को सुरक्षा परिषद को एक ब्रीफिंग में, संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी प्रमुख ने कहा, 'यूक्रेन पर रूसी आक्रमण ने दशकों में सबसे तेज और सबसे बड़ा विस्थापन देखा है। 24 फरवरी से लगभग 14 मिलियन लोगों को अपने घरों से मजबूर किया गया है।'

रूसी हमले में यूक्रेन तबाह

रूसी हमले में यूक्रेन तबाह

रूस यूक्रेन को ब्लैकआउट करता जा रहा है। घरों की बिजली गुल हो रही है। पानी के पाइपलाइनों को बम के धमाकों से उड़ाया जा रहा है। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी प्रमुख फिलिपो ग्रांडी ने चेतावनी देते हुए कहा कि, आने वाले दिनों में यूक्रेन के लोग दुनिया के सबसे कठोर सर्दियों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने यूक्रेन जंग को जल्द से जल्द समाप्त करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि, इस संवदेनहीन युद्ध को खत्म करने के लिए दुनिया को आगे आने के आवश्यकता है।

यूएनएचआरसी की यूक्रेन पर नजर

यूएनएचआरसी की यूक्रेन पर नजर

फिलिपो ग्रांडी ने आगे यूक्रेन जंग की भयानक चेहरे की तरफ इशारा करते हुए कहा कि रूस यूक्रेन में नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमला कर रहा है, इससे नई परेशानियां उत्पन्न होंगी। इसके समाधान के लिए जल्द मानवीय प्रतिक्रिया की जरूरत है। उन्होंने आगे कहा कि, यूएनएचआसी का पूरा ध्यान यूक्रेन में विस्थापित लोगों की मदद करने पर है। उन्होंने पड़ोसी देश मोल्दोवा को भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने शरण देने के विषय पर बातचीत करते हुए कहा कि हमने शरणार्थियों से मिलने वाली मदद को लेकर जानकारी ली है, लेकिन उनका जवाब निराश करने वाला है। यूक्रेन संकट से संबंधित विषयों पर यूएनएचआरसी की प्रतिक्रिया पर ग्रैंडी ने आगे कहा कि हम शरणार्थियों की बेहतर जिंदगी के लिए काम कर रहे हैं।

परमाणु हमले का संकट

परमाणु हमले का संकट

बता दें कि, रुसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) ने सैन्य लामबंदी (Military Mobilization) के साथ यूक्रेन (Ukraine) समेत पश्चिम देशों को परमाणु हमले की चेतावनी दी थी। वहीं, अमेरिका का दावा है कि कीव पर कब और किस समय न्यूक्लियर बम से हमला करना है इसको लेकर मॉस्को के सैन्य अधिकारियों ने एक बड़ी मीटिंग की है। यूक्रेन में परमाणु हमले का संकट उत्पन्न हो गया है। बता दें, यूक्रेन में जंग के हालात काफी बिगड़ चुके हैं। कीव के शहरों को तबाह और बर्बाद कर दिया गया है। हालांकि, अमेरिका यूक्रेन को हरसंभव सैन्य सहायता कर रहा है। इस वजह से कीव मॉस्को को अपने कई इलाकों से बाहर खदेड़ चुका है। वहीं पिछले कुछ दिनों से यूक्रेन रूस पर हावी होता प्रतीत हो रहा है। यूक्रेन ने काला सागर में रूसी बेड़े पर ड्रोन से हमले किए थे। इससे रूस काफी नाराज है।

अमेरिका यूक्रेन में रूसी कार्रवाई से चिंतित

अमेरिका यूक्रेन में रूसी कार्रवाई से चिंतित

बता दें कि,यूक्रेन जंग को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक में रूसी सेना के अधिकारियों ने यूक्रेन पर कब और कैसे परमाणु हथियार का इस्तेमाल किया जाए, इस पर गहन चर्चा की थी। रूस के इस बैठक ने वाशिंगटन की चिताओं को और भी अधिक बढ़ा दिया है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने बताया कि इस बैठक से पता चलता है कि हथियारों के इस्तेमाल पर पुतिन के बार-बार बयान खतरे से कही ज्यादा हो सकते हैं।

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