रूस ने फिर निभाई भारत के साथ दोस्ती, UNSC में भारत की स्थाई सदस्यता के दावे का किया समर्थन

यूएनएससी में भारत आठ बार अस्थाई सदस्य रह चुका है और इस वक्त भारत अपने 2 सालों के कार्यकाल के आखिरी महीने में है। भारत इस वक्त यूएनएससी का अध्यक्ष भी है, जिसके अमेरिका, चीन, रूस, फ्रांस और ब्रिटेन स्थाई सदस्य हैं।

Russia-India UNSC: रूस ने एक बार फिर से अपनी दोस्ती का सबूत देते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थाई सीट के लिए दावेदारी का अपना समर्थन दोहराया है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में भारत की स्थायी सीट के लिए रूस के समर्थन की एक बार फिर से पुष्टि करते हुए कहा है, कि "नई दिल्ली ने वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर अपने रुख के माध्यम से यूएनएससी में सकारात्मक योगदान दिया है"।

रूस ने भारत का किया समर्थन

रूस ने भारत का किया समर्थन

रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि, "मुझे लगता है कि भारत वर्तमान में आर्थिक विकास के मामले में अग्रणी देशों में से एक है और शायद एक नेता के तौर पर भी। इसकी आबादी जल्द ही किसी भी अन्य देश की तुलना में बड़ी होगी और नई दिल्ली के पास विभिन्न प्रकार की समस्याओं को सुलझाने का विशाल कूटनीतिक अनुभव है।" रूसी विदेश मंत्री ने इसके साथ ही कहा कि, "भारत के पास ऐसी अथॉरिटी और प्रतिष्ठा भी है।" 7 दिसंबर को रूसी राजधानी मास्को में प्रिमाकोव रीडिंग इंटरनेशनल फोरम में मीडिया के सवालों के जवाब में लावरोव ने भारत को लेकर ये काफी अहम योगदान दिया है और भारत की स्थायी सदस्यता की मांग का एक बार फिर से समर्थन का ऐलान किया है।

रूस करता रहा है भारत का समर्थन

रूस करता रहा है भारत का समर्थन

रूसी विदेश मंत्री ने भारत का समर्थन करते हुए कहा कि, "भारत संयुक्त राष्ट्र और शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) जैसे विभिन्न दक्षिण एशियाई एकीकरण निकायों में शामिल है"। इससे पहले, रूसी विदेश मंत्री लावरोव ने इस साल सितंबर में 77वें संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा था, कि "सुरक्षा परिषद में अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका के देशों को शामिल करने से यह और अधिक लोकतांत्रिक हो जाएगा"। रूसी विदेश मंत्री ने कहा कि, "भारत एससीओ के भीतर दक्षिण एशिया में एकीकरण संरचनाओं की एक श्रृंखला का हिस्सा है और यह संयुक्त राष्ट्र में सक्रिय भूमिका निभाता है। भारत एक ऐसा देश है, जो न केवल आगे बढ़ने की आकांक्षा रखता है, बल्कि एक बहुध्रुवीय दुनिया के गठन का सार है।" आपको बता दें कि, भारत के अलावा ब्राजील, जापान और जर्मनी भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में शामिल होने के लिए अपने आवेदनों पर जोर दे रहे हैं, जिसे रूसी विदेश मंत्री ने बहुध्रुवीयता के प्रतीक के रूप में देखा।

संयुक्त राष्ट्र में भारत की भूमिका

संयुक्त राष्ट्र में भारत की भूमिका

संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के साथ ही भारत इसके संस्थापक सदस्यों में से एक रहा है, लेकिन भारत को आज तक स्थायी सदस्यता से दूर रखा गया है और भारत ने हमेशा से मांग की है कि भारत को ना सिर्फ स्थायी सदस्य बनाया जाए, बल्कि भारत को वीटो पॉवर के इस्तेमाल का भी अधिकार मिले। भारत अब तक आठ बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थाई सदस्य रहा है और ऐसा पहली बार हुआ है, जब अस्थाई सदस्यता के इस कार्यकाल में पहली बार पिछले साल भारत को अगस्त महीने में अध्यक्ष पद की कुर्सी दी गई थी, वहीं इस साल दिसंबर महीने में भी अध्यक्षता का पद भारत के पास है। भारत का कहना है कि वो विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है और जल्द ही विश्व में सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन जाएगा, लिहाजा भारत को यूएनएससी की स्थायी सदस्यता प्राप्त करने का बुनियादी कारण है।

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