रूस के पास खत्म हो रही हैं मिसाइलें, आपस में झगड़ रहे पुतिन के जनरल्स, अब युद्ध में घबरा गया रूस?
ब्रिटिश रक्षा सचिव बेन वालेस ने फिनलैंड की यात्रा के दौरान कहा कि, यूक्रेन में जीत हासिल करने में रूस नाकामयाब रहा है, और इस विफलता के लिए रूसी जनरल्स एक दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं’।
मॉस्को/कीव, मई 06: यूक्रेन में रूसी आक्रमण का तीसरा महीना चल रहा है और अब रूस के पास मिसाइलों का भंडार खत्म होने लगा है और ऐसे में रूस के पास अब लड़ने के लिए हथियार ही नहीं बचेंगे, जिसको लेकर अब पुतिन के जनरल्स आपस में ही लड़ने झगड़ने लगे हैं और यूक्रेन में युद्ध शुरू करने और इस तबाही के लिए एक दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। ब्रिटेन के रक्षा स्टाफ के प्रमुख और एडमिरल सर टोनी राडाकिन ने यूक्रेन युद्ध के बीच ये बड़ा दावा किया है और उन्होंने द न्यूज डेस्क के साथ एक इंटरव्यू में कहा है कि, रूसी जनरलों के ऊपर यूक्रेन युद्ध शुरू करने और जल्द से जल्द इस युद्ध को जीतने का भारी दवाब था।

ब्रिटिश एडमिरल का बड़ा दावा
ब्रिटिश एडमिरल सर टोनी राडाकिन ने दावा किया है कि, यूक्रेन युद्ध शुरू होने के 10वें हफ्ते की लड़ाई के बाद रूसी सेना ने जिस रफ्तार के साथ मिसाइलों का इस्तेमाल किया है, उसकी वजह से अब पुतिन को 'लॉजिस्टिक्स युद्ध' में शामिल होना पड़ा है। यानि, रूस अब संसाधनों के लिए संघर्ष कर रहा है, ताकि युद्ध को जारी रखा जा सके। एडमिरल राडाकिन ने कहा कि, 'रूस के सामने संभावित तौर पर एक बड़ी समस्या है, क्योंकि युद्ध में जो खर्च हो रहा है और जिस दर से रूसी सेना ने मिसाइलों का इस्तेमाल किया है, वो 24 फरवरी की तुलना में उनके विचार को बिल्कुल अलग तरह से परिभाषित करता है'। उन्होंने कहा कि, 'हम उनके सशस्त्र बलों पर गंभीर प्रभाव की बात कर रहे हैं। हमने उनकी 25% सेना को प्रभावी ढंग से विस्थापित कर दिया है, या तो उनके सैनिकों को मारकर उन्हें युद्ध से हटा गिया है, या फिर उनके बटालियन को इतना नुकसान पहुंचाया गया है, कि वो युद्घ से बाहर हो गये हैं'।

आपस में झगड़ रहे रूसी जनरल्स
वहीं, ब्रिटिश रक्षा सचिव बेन वालेस ने फिनलैंड की यात्रा के दौरान कहा कि, यूक्रेन में जीत हासिल करने में रूस नाकामयाब रहा है, और इस विफलता के लिए रूसी जनरल्स एक दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं'। ब्रिटिश रक्षा सचिव वालेस ने कहा कि, रूस के शीर्ष अधिकारी पुतिन के असफल आक्रमण के लिए बलि का बकरा बन रहे हैं और अब 'तबाही' के लिए एक दूसरे को दोष दे रहे हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि अगर वो इस 'दलदल' से पीछे हटते हैं, तो फिर उन्हें हटा दिया जाएगा। फिनलैंड दौरे पर गये ब्रिटिश रक्षा सचिव ने कहा है कि, रूस सैनिक रूस की नाकामयाबी के लिए अपने ही सैनिकों पर बुरी तरह से चिल्लाते हैं और युद्ध में किसी तरह से जीत हासिल करने के लिए अब खुद अग्रिम पंक्ति में पहुंच रहे हैं। द टाइम्स ने वालेस के हवाले से लिखा है कि, रूसी जनरलों को अपनी नई रणनीति से भी खास फायदा नहीं हो रहा है।

रूसी जनरलों पर भारी प्रेशर
जब ब्रिटिश रक्षा सचिव से पूछा गया, कि क्या रूस के जनरल स्टाफ के प्रमुख जनरल वालेरी गेरासिमोव, जो पिछले महीने यूक्रेन में फ्रंटलाइन पर गए थे, उनको युद्ध में नाकामयाबी के लिए जिम्मेदारक 'फॉल मैन' बनाने के लिए यूक्रेन भेजा गया था, तो ब्रिटिश रक्षा सचिव वालेस ने कहा कि, 'वे सभी फॉल मैन क्षेत्र में हैं'। उन्होंने कहा कि, 'यदि आप रूसी सिस्टम में किसी विभाग की जिम्मेदारी संभाले हुए हैं, तो फिर यह आपके पास लंबे वक्त तक के लिए नहीं रह सकता है'। उन्होंने कहा कि, रूसी व्यवस्था में काफी तनाव है और रूस के सैन्य अधिकारी केजीबी के पूर्व प्रमुख राष्ट्रपति पुतिन का जितना सम्मान रकते हैं, रूसी जनरल स्टाफ को उसकी गंदगी के लिए बलि का बकरा बनाया जाएगा।'

‘पुतिन को नहीं दी गई सही सलाह’
ब्रिटिश रक्ष सचिव ने कहा है कि, पुतिन के डर की वजह से उनके किसी भी करीबी अधिकारियों ने उन्हें यूक्रेन युद्ध में नहीं जाने की सलाह नहीं दी। उन्हें किसी भी सैन्य अधिकारी ने नहीं कहा, कि पुतिन को यूक्रेन पर कब्जा करने के लिए युद्ध में नहीं जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि, रूसी सैन्य अधिकारियों ने पुतिन के डर की वजह से उन्हें नहीं बताया, कि यूक्रेन युद्ध उनके लिए दलदल की तरह बदल सकता है, जैसा राजधानी कीव की लड़ाई में हुआ। वहीं, एडमिरल राडाकिन ने कहा कि, जबकि इस बात का 'वास्तविक जोखिम' था, कि रूस पूर्वी यूक्रेन में डोनबास को जीत सकता था, लेकिन वो कीव की लड़ाई के दलदल में फंस गये और उन्होंने काफी देर से अपनी रणनीति में सुधार किया, लेकिन तब तक उनके पास सुधार के लिए काफी कम वक्त बचा था।

‘रूस की लड़ाई हो रही है कमजोर’
ब्रिटिश नौसेन का एडमिरल ने कहा कि, 'आप देख रहे हैं कि रूस हर दिन युद्ध में रफ्तार प्राप्त करने के लिए संघर्ष कर रहा है, अपनी वायु सेना को अपनी जमीनी फोर्स के साथ समायोजित करने के लिए संघर्ष कर रहा है और उस गति को पैदा करने वाले आधुनिक अभियान को प्राप्त करने के लिए संघर्ष कर रहा है'। लिहाजा, जो रूस लगातार जीत के नारे लगा रहा था, उसके अंदर अब सवाल पूछे जाने लगे हैं, कि क्या वो युद्ध में जीत हासिल करेंगे? उन्होंमे कहा कि, 'मुझे लगता है कि अब हम जो देख रहे हैं, वह अविश्वसनीय दबाव है। रूसी सेना पर जीत के लिए अविश्वसनीय राजनीतिक दबाव और सैन्य दबाव है'। उन्होंने दावा किया कि, 'यह एक कठिन लड़ाई होने जा रही है और यह एक कठिन नारा होने जा रहा है।












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