जापान के विवादित द्वीप पर रूस ने तैनात की S-300 मिसाइलें, पुतिन के फैसले से गुस्से में टोक्यो
मॉस्को। रूस ने जापान के संवेदनशील मगर रणनीतिक रूप से अहम द्वीप पर अपना नया एडवांस्ड मिसाइल सिस्टम तैनात कर दिया है। इस घटना के बाद से रूस के बीच तनाव बढ़ गया है। जापान, रूस के इस चौंकाने वाले सैन्य कदम से खासा नाराज है। रूस ने जापान के उत्तर-पूर्व में आने वाले होकाईदो में इस मिसाइल सिस्टम को तैनात किया है। यह जगह रूस के पूर्वी क्षेत्र के तहत आने वाले कमछतका के करीब है। रूसी रक्षा मंत्रालय की तरफ से बताया गया है कि रूस ने अपना एडवांस्ड और नया मिसाइल सिस्टम एस-300 यहां पर तैनात किया है।

जापान और रूस के बीच है विवाद
रूस की तरफ से मंगलवार को इस बात की जानकारी दी गई है कि उसने S-300V4 मिसाइल सिस्टम को जापान के करीब स्थित विवादित द्वीपों की श्रृंखला के करीब तैनात कर दिया है। रूस के रक्षा मंत्रालय के जेवेज्दा टीवी स्टेशन की तरफ से कहा गया है कि मोबाइल एयर डिफेंस सिस्टम को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि वह इत्रुप पर होने वाले किसी भी बैलेस्टिक और हवाई हमले का जवाब दे सकता है। इत्रूप उन चार द्वीपों में से एक है जिस पर रूस ने कब्जा किया और जिन पर जापान अपना दावा करता है। जापान का कहना है कि ये द्वीप उसकी उत्तरी सीमा के तहत आते हैं। जेवेज्दा की तरफ से कहा गया, 'कम दूरी की एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल साखयालिन क्षेत्र में इत्रुप द्वीप पर ड्यूटी पर पहले से ही रेडी हैं। अब एयर डिफेंस 'हैवी आर्टिलरी' भी यहां पर पहुंच चुकी है। यह एयर डिफेंस सिस्टम s-300V4 है।'
कब से है दोनों देशों के बीच विवाद
इन द्वीपों पर सोवियत संघ के दौर पर कब्जा किया गया था और इन्हें दक्षिणी कुर्लिस के तौर पर जाना जाता है। द्वितीय विश्व युद्ध के खत्म होने और सीमा विवाद के बाद दोनों देश एक औपचारिक शांति समझौते पर साइन करने के लिए राज हुए थे। इसके बाद से ही रूस और जापान के रिश्ते बिगड़े हुए हैं। जापान, रूस के हर सैन्य कदम को इस क्षेत्र में संवेदनशील कदम के तहत के तौर पर मानता है। रूस ने अक्टूबर में कहा था कि उसने पहली बार द्वीपों पर मिसाइल सिस्टम तैनात किया है लेकिन उसका यह कदम एक मिलिट्री ड्रिल के तौर पर था ना कि किसी युद्ध की तैयारी के तहत उठाया गया था। रूस की तरफ से ऐसे मौके पर मिसाइल सिस्टम तैनात किया गया था जब पूर्व जापानी पीएम शिंजो आबे, रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन के साथ मिलकर तनाव को कम करने की कोशिशों में लगे थे। आबे ने अगस्त में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।












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