पाकिस्तान-मिस्र से मांगे हथियार, भारत को रोकी सप्लाई, हथियारों की कमी से जूझ रहा रूस जंग हार जाएगा?
अब यह एक खुला रहस्य बन चुका है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के अपेक्षा से काफी अधिक लंबा खींच जाने के कारण मॉस्को सेना के पास हथियारों और गोला-बारूद की घनघोर कमी हो गई है।
रूस के पास हथियारों की इतनी कमी हो चुकी है कि उसे दुनिया के सबसे गरीब देशों में से एक उत्तर कोरिया से भी हथियार और मिसाइलें आयात करने की नौबत आ चुकी है। दक्षिण कोरिया के एक सांसद के अनुसार, उत्तर कोरिया ने अगस्त से अब तक रूस को 10 लाख से अधिक तोपखाने गोले भेजे हैं।

उत्तर कोरिया सितंबर से अब तक सैन्य उपकरणों के लगभग 2,000 कंटेनर भेजे जा चुके हैं, जिनमें संभावित रूप से कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें और पोर्टेबल एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइलें शामिल हैं।
इसी बीच कहा जा रहा है कि रूस ने पाकिस्तान को बेचे अपने हथियार वापस मांगे हैं। इसके अलावा रूस ने यूक्रेन के खिलाफ युद्ध के लिए मिस्र और अन्य देशों से अपने हेलीकॉप्टर इंजन वापस करने के लिए कह रहा है। इसके साथ ही रूस ने भारत को भी हथियारों की सप्लाई बंद कर दी है।
वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, रूस ने रूसी हेलीकॉप्टरों के लिए इंजन हासिल करने की कोशिश के लिए पाकिस्तान, मिस्र, बेलारूस और ब्राजील के अधिकारियों के साथ बातचीत की है।
अप्रैल में, रूसी अधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने काहिरा का दौरा किया और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी से मिस्र द्वारा खरीदे गए रूसी हेलीकॉप्टरों के सौ से अधिक इंजन वापस करने को कहा। रिपोर्ट में कहा गया है कि मिस्र इस पर सहमत हो गया है और लगभग 150 इंजनों की डिलीवरी अगले महीने शुरू होने की संभावना है।
रूस ने पाकिस्तान से कम से कम 4 एमआई-35एम हेलीकॉप्टर इंजन उपलब्ध कराने को कहा है, जो पहले रूस ने पाकिस्तान को बेचे थे। हालांकि, डब्ल्यूएसजे की रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने रूस से ऐसा कोई अनुरोध प्राप्त होने से इनकार किया है।
द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ने हथियारों और स्पेयर पार्ट का निर्माण तेज किया है, मगर इससे उसकी जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही हैं।
वहीं, रूस को उसके सबसे क़रीबी सहयोगी बेलारूस द्वारा छह एमआई-26 ट्रांसपोर्ट हेलिकॉप्टरों के इंजन वापस बेचने की खबर है। इसी तरह रूस ने ब्राजील से उन हेलिकॉप्टरों के 12 इंजन मांगे है, जिन्हें पिछले साल डीकमीशन किया था। हालांकि ब्राजील ने इस मांग को इसलिए नहीं माना है उनकी नीति है कि वह युद्ध के दौरान किसी भी पक्ष को हथियार नहीं भेजते।
रिपोर्ट की माने तो जंग के कारण रूस का हथियारों के निर्यात का कारोबार भी बड़े पैमाने पर प्रभावित हुआ है। जो हथियार उसे भारत और आर्मेनिया को बेचने थे, उन्हें वह खुद इस्तेमाल कर रहा है। आर्मेनिया को जितने मल्टीपल रॉकेट लॉन्च सिस्टम दिए जाने थे, उससे बहुत कम मिले हैं। इसी तरह भारत को कुछ चीजो का निर्यात भी रद्द कर दिया गया है।












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