खसरा और टिटनेस का टीका कोरोना संक्रमण से बचाने में भी कारगर: स्टडी
खसरा और टिटनेस का टीका लेने वालों पर कोरोना का असर कम: स्टडी
नई दिल्ली, 1 सितंबर: दुनियाभर में कहर बरपा रही कोरोना वायरस महामारी को लेकर एक नई स्टडी में दावा किया गया है कि खसरा और टिटनेस का टीकाकरण इसमें काफी फायदेमंद है। स्टडी कहती है कि बच्चों को दिए जाने वाले खसरा-मम्प्स-रूबेला (एमएमआर) और टेटनस-डिप्थीरिया-पर्टुसिस (टीडीएआर) के टीके कोरोना वायरस बीमारी से भी काफी हद तक सुरक्षा प्रदान करते है। स्टडी कहती है कि बच्चों पर कोरोना के इतना ज्यादा असर ना करने की एक वजह उनको इन टीकों का मिलना भी है।

अमेरिका में हुई है स्टडी
यह अध्ययन अमेरिका के ब्रिघम और महिला अस्पताल के शोधकर्ताओं ने किया है और जरनल Med में ये स्टडी प्रकाशत हुई है। एमएमआर टीके बचपन में दिए जाते हैं और टीडीएपी हर 10 साल में दिया जाता है। स्टडी कहती है कि इन टीकों को इस तरह बनाया जाता है कि ये लंबे समय तक रहने इम्यून सिस्टम को टी-सेल्स और बी-सेल्स का निर्माण कर तैयार करता है। जो कि कोरोना वायरस से लड़ने में भी कारगर है।

क्या कहते हैं रिसर्चर
शोधकर्ताओं का कहना है कि टिटनस और खसरा के इन टीकों से जो टी और बी सेल्स बनती हैं। वो सेल्स दूसरे कई रोग पैदा करने वाले एंटीजन का भी सामना करने में सक्षम हैं, जिसमें Sars-CoV-2 में वायरल एंटीजन भी शामिल हैं। ऐसे में कोरोना वायरस के हमले को भी ये सेल्स एक हद तक रोकने का काम करती हैं।

इन टीकों को लेने वाले कम गए अस्पताल, मौत भी कम
स्टडी के सह-लेखक एंड्रयू लिचमैन का कहना है कि अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने ये भी देखा कि कोरोना वायरस से संक्रमित होने वाले वो व्यक्ति जिनको, एमएमआर या टीडीएपी टीके लगे थे, उनको संक्रमण बहुत गंभीर नहीं हुआ। ऐसे लोगों को आईसीयू में दाखिल करने की नौबत बहुत कम आई और इनमें मौतें भी बहुत कम हुईं। स्टडी कहती है कि जिन लोगों को एमएमआर टीका लगा हुआ था, उनके दूसरे लोगों को मुकाबले अस्पताल में भर्ती होने के मामले 38 प्रतिशत कम थे और आईसीयू या मौत 32 प्रतिशत कम थीं। वहीं टीडीएपी के टीके लगे हुए कोरोना मरीजों में अस्पताल में भर्ती होने में 23 प्रतिशत कमी रही और मौतें 20 प्रतिशत कम हुईं।












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