दुबारा इस्तेमाल वाली पानी की बोतलों से सावधान, टॉयलेट सीट से 40,000 गुना ज्यादा बैक्टीरिया होने का खतरा- शोध
हम जिन पानी की बोतलों का बार-बार इस्तेमाल करते हैं, जो हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बन चुकी हैं, वह टॉयलेट सीट से भी ज्यादा दूषित हो सकती हैं। एक रिसर्च में ऐसा पाया गया है।

दुबारा उपयोग में आने वाली पानी की बोतलों पर अमेरिका में एक रिसर्च हुआ है। इसके निष्कर्ष चिंता में डालने वाले हैं। क्योंकि, पाया गया है कि इन बोतलों में बहुत बड़ी तादाद में रोगाणु और कीटाणु हो सकते हैं, जो हमें बीमार कर सकते हैं। इसलिए वैज्ञानिकों की सलाह है कि यदि हम ऐसी रीयूजेबल वॉटर बोतलों का इस्तेमाल करते ही हैं, तो उसकी साफ-सफाई को भी गंभीरता से लेना चाहिए। रिसर्च में पाया गया है कि दुबारा इस्तेमाल होने लायक पानी की बोतलों में हमारी टॉयलेट सीट पर मौजूद कीटाणुओं की तुलना में 40,000 गुना ज्यादा बैक्टीरिया तक मौजूद हो सकते हैं।

टॉयलेट से ज्यादा गंदी है आपकी पानी की बोतल-शोध
पानी की ऐसी बोतलें जिसका बार-बार इस्तेमाल होता है, उसे हम अपने लिए और पर्यावरण दोनों के लिए सुरक्षित समझते रहे हैं। लेकिन, एक नए शोध से पता चला है कि दुबारा इस्तेमाल होने वाली पानी की ऐसी बोतलें हमारी सेहत के लिए हानिकारक हो सकते हैं। अमेरिका स्थित वाटरफिल्टरगुरु डॉट कॉम की ओर से किए गए एक शोध से पता चला है कि अगर सही तरीके से और लगातार सफाई न की जाए तो ऐसी बोतलों में एक औसत टॉयलेट सीट से भी 40,000 गुना ज्यादा बैक्टीरिया हो सकती है।

पानी की बोतलों को लेकर सावधानी क्यों है जरूरी ?
शोध में ऐसी बोतलों को 'प्रोटेबल पेट्री डिश' बताकर व्याख्या की गई है। वैसे शोध में पाया गया है कि वास्तव में ऐसी पानी की बोतलों में किचन सिंक से दोगुने, कंप्युटर के माउस से चार गुना और पालतू कुत्ते या बिल्लियों की कटोरी से 14 गुना ज्यादा रोगाणु छिपे हो सकते हैं। शोधकर्ताओं ने इस निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले बहुत बारीकी से चीजों की पड़ताल की है और यह समझा है कि बोतलों में कहां रोगाणु जमा हो सकते हैं।

इस तरह के रोगों का है खतरा
वैज्ञानिकों ने पहले अलग-अलग पानी की बोतलों की ढक्कन, स्ट्रॉ ढक्कन और स्क्वीज-टॉप लिड में से प्रत्येक से तीन बार नमूने लिए। उन्होंने दो तरह की बैक्टीरिया की मौजूदगी देखी। ग्रैम-निगेटिव रोड्स (Gram-negative rods) और कीटाणु (bacillus)। ग्रैम-निगेटिव बैक्टीरिया ऐसे संक्रमण पैदा कर सकती है, जिससे एंटीबायोटिक दवाओं के खिलाफ तेजी से प्रतिरोधी क्षमता विकसित होने लगती है। वहीं कीटाणुओं (bacillus) की वजह से गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं शुरू हो सकती हैं।
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विश्व स्वास्थ्य संगठन का क्या कहना है ?
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक दूषित पानी पीने से कॉलरा, डायरिया और डिसेंटरी जैसे रोग होने का खतरा रहता है। इसके अलावा उल्टी, पेट में दर्द या कुछ मामलों में बुखार भी हो सकता है। हालांकि, जरूरी नहीं की दूषित पानी बोतलों की गंदगी की वजह से ही हो, आप किस स्रोत से पानी बोतल में रख रहे हैं, उसकी स्वच्छता भी बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है।
माइक्रोबायोलॉजिस्ट ने शोध पर क्या कहा है ?
वैसे इंग्लैंड के यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग के माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉक्टर साइमन क्लार्क ने न्यूयॉर्क पोस्ट को बताया है कि, 'मैंने किसी को कभी पानी की बोतल से बीमार होने के बारे में नहीं सुना है। इसी तरह से टैप भी स्पष्ट रूप से कोई समस्या नहीं है, टैप से पानी लेने की वजह से किसी को बीमार होने के बारे में आपने आखिरी बार कब सुना था? पानी की बोतलों की उन बैक्टीरियाओं से दूषित होने की संभावना है, जो पहले से ही लोगों के मुंह में हैं।'

वैज्ञानिकों की ये सलाह जरूर मानिए
हालांकि, वैज्ञानिकों की सलाह है कि दुबारा इस्तेमाल की जाने वाली पानी की बोतलों को रोजाना कम से कम एक बार साबुन वाले गर्म पानी से जरूर धोना चाहिए और हफ्ते में कम से कम एक बार उसकी अच्छे से सफाई की जानी चाहिए। वैज्ञानिकों की इस सलाह को मानने में ही लोगों की ज्यादा भलाई दिखती है। (तस्वीरें- सांकेतिक)












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