रिसर्च में सामने आई गर्भ में पल रहे बच्चे के मुस्कुराने और रोने की वजह, जानिए मां का खाना कैसे डालता है असर
रिसर्च में सामने आई गर्भ में पल रहे बच्चे के मुस्कुराने और रोने की वजह, जानिए मां का खाना कैसे डालता है असर
नई दिल्ली, 23 सितंबर: जब महिला प्रेंगनेंट होती है तो उसकी ये ही कोशिश रहती है कि वो हेल्दी चीजें खाएं जिससे उसका बच्चा स्वस्थ्य पैदा हो। लेकिन गर्भ में पल रहा बच्चे के चेहरे पर स्माइल रहे इस बारे में शायद ही हम सोचते हैं लेकिन वैज्ञानिकों ने अपने लेटेस्ट शोध में गर्भ में पल रहे बच्चे की मुस्कुराने और रोने की वजह पता कर ली है।

सामने आई गर्भ में पल रहे बच्चे के मुस्कुराने और रोने की वजह
कई महिलाएं अपनी प्रेगनेंसी के दौरान पेट में पल रहे बच्चे के मूवमेंट से कई बार कहती है कि मैंने जो खाया वो लगता है बेबी को पसंद आया है इसलिए उसका मूवमेंट तेज हो गया क्योंकि वो खुश है। अब ये बात एक अध्ययन में साबित हो चुकी है कि गर्भ में पल रहा बच्चा किस चीज का स्वाद मिलने से मुस्कुराता है और कौन सी चीज खाने पर उसका रोना चेहरा जाता है यानी उसे बिलकुल पसंद नहीं आता है।

मां के ये खाते ही करते हैं स्माइल और ये खाने पर उन्हें आ जाता है रोना
इस लेटेस्ट शोध में खुलासा हुआ है कि गर्भ में पल रहा बच्चा मां के गाजर खाने पर मुस्कुराता हैं लेकिन काले (Kale) खाने पर उसका रोना चेहरा बन जाता है।

शोध में हुआ ये और बड़ा खुलासा
सेज जर्नल्स में पब्लिश रिसर्च में ये रिसर्च पब्लिश की गई है। जिसमें पाया गया है कि अपनी मां द्वारा खाए गए काले (ये एक पत्तेदार साग होती है) का स्वाद मिलने पर भ्रूण गर्भ में "रोने वाला चेहरा" बनाते हैं और गाजर का स्वाद मिलने पर चेहरे पर हंसी नजर आती है। यानी वो मुस्कुराते हैं। हालांकि शोधकर्ताओं का मानना है कि अगर गर्भ में भ्रूण को नियमित रूप से काले जैसी सब्जी के संपर्क में लाया जाता है, तो उनके जीवन में बाद में उसे उसका स्वाद खराब नहीं लगेगा, इसका आनंद लेने की अधिक संभावना हो सकती है।

भ्रूण में रहकर ही उन्हें स्वाद में अंतर समझ आता है
रिसर्च में लिखा गया है कि इस रिसर्च से निष्कर्ष निकलता है कि भ्रूण की क्षमताओं को समझने और विभिन्न स्वादों में अंतर के शुरुआत का अनुभव उन्हें होता है।

जानिए कैसे किया ये शोध
ये शोध इंग्लैंड में लगभग 100 महिलाओं के पेट में पल रहे भ्रूण पर किया गया। शोधकर्ताओं ने माओं को दो खाद्य पदार्थों के पाउडर फार्म वाले कैप्सूल दिए। 35 महिलाओं को पहले ग्रुप में रखकर एक ऑर्गेनिक काले कैप्सूल खाया और 35 गर्भवती महिलाओं को दूसरे ग्रुप में रखा गया था जिन्हें एक गाजर कैप्सूल दिया गया था, और 30 ऐसी महिलाएं थीं जिन्हें इनमें से किसी चीज को नहीं दिया गया था।

महिलाओं के 4 डी अल्ट्रासाउंड स्कैन में खुला ये राज
ये कैप्सूल खाने के लगभग 20 मिनट बाद महिलाओं के 4 डी अल्ट्रासाउंड स्कैन से पता चला कि अपनी मां द्वारा खाए गए कली के स्वाद के संपर्क में आने पर भ्रूण गर्भ में "रोने वाला चेहरा" बनाते हैं और गाजर के संपर्क में आने पर "हंसता-चेहरा" की प्रतिक्रिया अधिक होती है।

नापसंद चीजों की गर्भ में ही ऐसे डाली जा सकती है आदत
अब इस रिसर्च के निष्कर्ष से साबित हो चुका है कि गर्भ में कुछ स्वादों के बार-बार संपर्क जन्म के बाद भोजन वरीयताओं को स्थापित करने में एक कारक हो सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर गर्भ में भ्रूण को नियमित रूप से काले जैसी सब्जी के संपर्क में लाया जाता है, तो उनके जीवन में बाद में इसे सहन करने या इसका आनंद लेने की अधिक संभावना हो सकती है। यानी अगर गर्भ में रहते ही उन्हें बार बार नापंसद चीजें मिलेगी तो वो स्वाद डेवलेप हो जाएगा और वो उसे आगे चलकर पसंद करने लगेंगे।
Keen on carrot, not so keen on kale…
Fetuses make “laugh” or “cry” faces in reaction to different flavours according to @FetalLab @DurhamPsych.
This is the 1st direct evidence that fetuses react differently to various tastes & smells in the womb 👉 https://t.co/13UKS7IjVM pic.twitter.com/xAqXGDqxQl
— Durham University (@durham_uni) September 22, 2022












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