LCA Tejas: गणतंत्र दिवस पर पहली बार दिखा एलसीए तेजस का दम.. जानिए कैसे बन रहा वायुसेना की रीढ़ की हड्डी?
LCA Tejas Republic Day: गणतंत्र दिवस के मौके पर भारतीय वायुसेना ने पहली बार एलसीए तेजस की ताकत से दुनिया को अपनी शक्ति का अहसास कराया है। कर्तव्य पथ पर पहली बार इंडियन एयरफोर्स ने एलसीए तेजस से करतब दिखाया है, लिहाजा जानना जरूरी हो जाता है, कि आखिर भारतीय तेजस की क्यों मुरीद बन रही है दुनिया?
अपनी इस रिपोर्ट में हम जानने की कोशिश करेंगे, कि आखिर एलसीए तेजस क्या है, ये कितना खतरनाक है और दुनिया के कौन कौन से देश एलसीए तेजस खरीदने को लेकर अपनी दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

एलसीए तेजस को क्यों नहीं पकड़ पाता रडार?
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दरअसल, तेजस लड़ाकू विमान साइज के लिहाज से थोड़ा छोटा होता है, इसलिए पहाड़ी इलाकों में लड़ाई लड़ने के लिए ये एक परफेक्ट फाइटर जेट बनता है, जो काफी आसानी से घुमावदार रास्तों में ऑपरेट होता है और यही वजह है, दुनिया में अभी जो भी रडार सिस्टम हैं, वो एलसीए तेजस को डिटेक्ट नहीं कर पाता, क्योंकि मौजूदा समय में रडार सिस्टम में फाइटर जेट की पहचान के लिए जो टेक्नोलॉजी इस्तेमाल की गई है, वो टेक्नोलॉजी तेजडस को फाइटर जेट ही नहीं मानती है, लिहाजा एलसीए तेजस के बारे में दुश्मन को पता नहीं चल पाता है।
एलसीए तेजस की 43.4 फीट, इसकी ऊंचाई 14.5 फीट और इसका विंगस्पैन 26.11 फीट है, जिसकी वजह से इस फाइटर जेट से हमला करना काफी आसान हो जाता है। यही वजह है, कि भारतीय वायुसेना ने 700 मिलियन अमेरिकी डॉलर में 97 लाइट कॉम्बेट एयरक्राफ्ट (LCA) तेजस खरीदने का ऑर्डर दे दिया है, जो एक विशालकाय सैन्य सौदा है।
भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी पिछले साल नवंबर में एलसीए तेजस में उड़ान भरी थी। प्रधानमंत्री मोदी ने एलसीए तेजस की सफलता का श्रेय भारत के डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर, इंडियन एयरफोर्स, डीआरडीओओ और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को दिया था और इसे डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में भारत की "आत्मनिर्भर" कदम करार दिया था।
भारत का स्वदेशी लड़ाकू विमान है तेजस
भारत को स्वदेशी लड़ाकू जेट को अपनी वायु सेना में शामिल करने में करीब 40 साल लग गए। तेजस, एलसीए के कम से कम दो स्क्वाड्रन वर्तमान में नियमित रूप से ऑपरेशनल मिशनों में उड़ान भर रहे हैं, और भारत ने हाल के महीनों में चीन और पाकिस्तान के साथ उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं के करीब भी तेजस की तैनाती शामिल है।
इंडियन एयरफोर्स ने HAL से 97 और एलसीए तेजस MK-1ए जेट खरीदने का प्रस्ताव शुरू किया है, जिसकी कीमत कम से कम 700 मिलियन अमेरिकी डॉलर है। भारतीय वायुसेना पहले से ही तेजस एमके1 जेट के दो स्क्वाड्रन का संचालन कर रही है, जिसमें प्रारंभिक और अंतिम ऑपरेशनल क्लीयरेंस वेरिएंट के 20-20 स्क्वाड्रन शामिल हैं।
प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता वाली डिफेंस पर कैबिनेट समिति से मंजूरी के बाद, 83 एलसीए एमके1ए वेरिएंट के लिए 6 अरब अमेरिकी डॉलर का ऑर्डर फरवरी 2021 में एचएएल को दिया गया था।
LCA Mk1A जेट की पहली खेप 2024 की शुरुआत में IAF को डिलीवरी के लिए निर्धारित की गई है, जिसके बाद इन्हें 1960 के दशक के पुराने सोवियत युग के मिग -21 को भारतीय वायुसेना के बेड़े से हटाकर आईएएफ के स्क्वाड्रन में शामिल किया जाएगा। मिग-21 को 'उड़ता ताबूत' कहा जाता है, क्योंकि हर दूसरे दिन मिग फाइटर जेट हादसे का शिकार होती रहती है, जिससे हमारे कई बहादुर फाइटर पायलट अपनी जान गंवा चुके हैं।

तेजस खरीदने से क्यों हिचकिचाते देश?
इंडियन एयरफोर्स में LCA तेजस के शामिल होने से वैश्विक स्तर पर हथियारों के एक प्रमुख निर्यातक के रूप में उभरने की भारत की कोशिश को बढ़ावा मिलने की संभावना थी। भारत ने पिछले साल ही में मित्र देशों को LCA तेजस बेचने की कोशिश की है, और संभावित ग्राहकों को प्रभावित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय एयर शो में जेट का प्रदर्शन किया था।
तेजस जेट को बेचने का भारत का पहला गंभीर प्रयास तब किया गया था, जब भारत ने 18 हल्के लड़ाकू जेट की आवश्यकता को पूरा करने के लिए मलेशियाई वायु सेना को इसकी पेशकश की थी। हालांकि, अंतिम दावेदार के रूप में चुने जाने के बाद भी तेजस दक्षिण कोरिया के एफए-50 जेट से हार गया था।
भारत ने रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल (एमआरओ) सुविधा सुनिश्चित करके, विमानन प्रबंधन प्रशिक्षण प्रदान करके और मलेशिया में स्थानीय स्तर पर एयरोस्ट्रक्चर का निर्माण करने के लिए मलेशियाई फर्मों के साथ सहयोग करके प्रस्ताव को और लचीला बनाने की कोशिश की थी।
वहीं, अन्य देशों ने भी तेजस जेट में रुचि दिखाई है। लड़ाकू विमान खरीदने की चाहत रखने वाले अर्जेंटीना ने तेजस में रुचि दिखाई है और इसी साल अर्जेंटीना के रक्षा मंत्री जॉर्ज तायाना ने एचएएल सुविधा का दौरा कर भारतीय लड़ाकू जेट को करीब से देखा था। हालांकि, अर्जेंटीना की नवीनतम रिपोर्टों से पता चलता है, कि वो अमेरिका से एफ-16 खरीदने की तरफ ज्यादा रूझान दिखा रहा है।
नाइजीरिया ने भी एलसीए तेजस में अपनी दिलचस्पी जताई है, जो कि भारत के साथ एक अरब अमेरिकी डॉलर के समझौते का हिस्सा है, ताकि वह पूर्व के सैन्य-औद्योगिक परिसर के विकास को सक्षम कर सके। लेकिन एलसीए में नाइजीरियाई दिलचस्पी कितनी है, फिलहाल पूरी तरह से इसका पता नहीं चल पाया है।
तेजस के रेस में पिछड़ने की सबसे बड़ी वजह है, एचएएल की उत्पादन क्षमता। एचएएल को पहले से ही इंडियन एयरफोर्स से 83 तेजस विमान बनाने का ऑर्डर मिला हुआ है और 97 विमानों का ऑर्डर और मिल सकता है, ऐसे में अगर किसी और देश से ऑर्डर मिलता है, तो फिर एचएएल के लिए विदेशी ऑर्डर को पूरा करना काफी मुश्किल हो जाता है।
फिलहाल, एचएएल अगर पूरी क्षमता के साथ काम करे, तो एक साल में 16 तेजस विमान का निर्माण कर सकता है और उत्पादन क्षमता को 24 तक ले जाने के लिए तीसरे प्रोडक्शन लाइन के निर्माण पर काम चल रहा है और मौजूदा क्षमता के लिहाज से बात करें, तो सिर्फ भारतीय वायुसेना की जरूरतों को पूरा करने में एचएएल को कम से कम 7 से 8 सालों का वक्त लग जाएगा, ऐसे में किसी दूसरे देश का नंबर 7-8 सालों के बाद आएगा, लिहाजा ये देश ऑर्डन देने से पीछे हट जाते हैं।












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