अमेरिका में नहीं हैं ग्रेजुएट्स, इसलिए ट्रंप को चाहिए भारतीय छात्र
वाशिंगटन। रिपलब्लिकन कैंडीडेट डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका से भारतीय छात्रों को नहीं निकाला जा सकता क्योंकि ये छात्र अमेरिका के लिए काफी फायदेमंद हैं।
ट्रंप ने यह बात पहली बार कही हो लेकिन ऐसा बयान पहली बार नहीं आया। इससे पहले भी इस तरह का बयान आ चुका है। राष्ट्रपति बराक ओबामा ने पहले ही कह चुके हैं कि भारत के छात्र काफी प्रतिभावान हैं।
ट्रंप ने कहा नहीं निकाल सकते भारतीय छात्रों को
उन्हें हमेशा इस वजह से अमेरिकी छात्रों के भविष्य को लेकर चिंता रहती है। क्या आप भारतीय छात्रों और उनके पास मौजूद कौशल के समय-समय पर होने वाले गुणगान की वजह जानते हैं।
यह सिर्फ एक चुनावी जुमला नहीं है और इसकी वजह खुद अमेरिकी छात्र हैं। जिस देश में दुनिया की टॉप यूनिवर्सिटीज हों वहां के छात्रों में ग्रेजुएशन की डिग्री के लिए उदासीनता हो, यह बात हैरान करने वाली है।
एक नजर डालिए कि आखिर क्यों ट्रंप या ओबामा इस बात को स्वीकार करने के लिए मजबूर हैं कि भारतीय छात्र अमेरिका के लिए एक बड़ी जरूरत हैं।

अमेरिका में बढ़ रहे कॉलेज ड्रॉप आउट्स
कुछ समय पहले रिलीज हुई हैकिंगर रिपोर्ट के मुताबिक कम्यूनिटी कॉलेजों में एडमिशन लेने वाले 80 प्रतिशत छात्र एडमिशन लेने के बाद कॉलेज ही नहीं जाते हैं।

40 प्रतिशत छात्र पूरी करते कॉलेज की पढ़ाई
गैलप और ल्यूमिना की ओर से हुए सर्वे के मुताबिक सिर्फ 40 प्रतिशत अमेरिकी छात्र कॉलेज की पढ़ाई पूरी करते हैं। 22 प्रतिशत छात्र ऐसे हैं जो ग्रेजुएशन के लिए एडमिशन तो लेते हैं लेकिन फेल हो जाते हैं।

गूगल से लेकर सिटी बैंक तक भारतीय
अमेरिका की हर बड़ी कंपनी में भारतीयों का दबदबा है। चाहे वो गूगल हो या फिर माइक्रोसाफ्ट या फिर फेसबुक या फिर एप्पल, कॉग्नीजैंट, सिटी बैंक, आईबीएम या फिर याहू, गूगल और न जाने कितनी ही अच्छी कंपनियों में आज कई भारतीय शीर्ष पदों पर मौजूद हैं।

क्या सोचती हैं कंपनियां
कई बड़ी अमेरिकी कंपनियां मानती हैं कि आज भारत, चीन और ब्राजील के छात्र ही उनकी जरूरतों को पूरा कर सकते हैं। ये कंपनियां मानती हैं कि इन तीन देशों से आने वाले स्टूडेंट्स अमेरिकी स्टूडेंट्स से ज्यादा प्रतिभावान होते हैं।

भारतीय ज्यादा प्रोफेशनल और ईमानदार
कंपनियों का यह भी मानना है कि अगर वे भारतीय छात्रों को हायर करती हैं तो उनमें अपने काम को लेकर जो ईमानदारी और प्रोफेशनल्जिम नजर आता है, उसकी अमेरिकी छात्रों में कमी होती है।

ओबामा भी कायल
वर्ष 2010 और फिर 2014 में राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अमेरिकी छात्रों से साफ-साफ कहा था कि भारत और चीन के छात्रों में उनसे ज्यादा प्रतिभा है।












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