वजहें आखिर क्यों छह लाख करोड़ का ब्रिक्स बैंक अमेरिका, यूरोप के लिए बड़ी चुनौती

शंघाई में स्थापित होने वाले इस बैंक का पहला सीईओ भारतीय होगा। यह बैंक अगर भारत के लिए खुशखबरी है तो वहीं अमेरिका और दूसरे देशों के लिए चुनौती के तौर पर सामने आना वाला बैंक है। एक नजर डालिए उन खास बिंदु 100 बिलियन डॉलर वाला यह बैंक आखिर क्यों अमेरिका के लिए चुनौती बन सकता है।
- भारत में सत्ता परिवर्तन के साथ ही अब सभी ब्रिक्स देश भारत को मजबूत राष्ट्र के तौर पर देख रहे हैं। जिस समय मंगलवार को ब्रिक्स डेवलपमेंट बैंक की शंघाई में स्थापना को ग्रीन सिग्नल मिला, तो इसकी मिसाल भी देखने को मिल गई। विशेषज्ञों की मानें तो पिछले कुछ वर्षों के दौरान भारत की छवि भ्रष्टाचार और कमजोर नेतृत्व की वजह खराब होती जा रही थी लेकिन अब यहां पर सत्ता परिवर्तन के बाद एक नई उम्मीद दुनिया के सभी देशों में जगी हैं। भारत एक मजबूत राष्ट्र के तौर पर उभरने लगा है और यह बात अमेरिका को परेशान कर सकती है।
- भारत को ब्रिक्स देशों में तरजीह मिलना पश्चिमी देशों को इसलिए भी परेशान कर रहा है क्योंकि भारत को दुनिया की तीसरी महाशक्ति करार दिया जाने लगा है। अब जबकि इस ब्रिक्स डेवलपमेंट बैंक का पहला सीईओ भारतीय होने की बात को भी मंजूरी दे दी गई है तो साफ है कि इसके कई फायदे भारत को हासिल हो सकेंगे। सबसे बड़ा फायदा भारत में जारी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में तेजी आना होगा। इसकी वजह से भारत में आर्थिक सुधार होंगे और वह विकास के एक नए रास्ते पर अग्रसर होगा।
- रूस और चीन के साथ अमेरिका के संबंध फिलहाल कुछ ज्यादा अच्छे नहीं हैं। इस ब्रिक्स डेवलपमेंट बैंक की वजह से जहां भारत और रूस की दोस्ती और मजबूत हो सकेगी तो वहीं चीन के साथ भी भारत के संबंधों के सुधरने की आंशका विशेषज्ञों को है।
- विशेषज्ञों की मानें तो बैंक की वजह से भारत, रूस और चीन तीनों साथ मिलकर काम करेंगे। तीन आर्थिक शक्तियां जब एक साथ आएंगी तो शायद उनकी ताकत का जवाब देना अमेरिका के बस में नहीं हो सकेगा। सामरिक दृष्टि से अमेरिका का प्रभुत्व एशियाई देशों पर कम हो सकेगा।
- वर्ल्ड बैंक और आईएमएफ की वजह से जो दबदबा पश्चिम में अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी और फ्रांस समेत पूरे यूरोप का नजर आता है, अब वहीं दबदबा ब्रिक्स डेवलपमेंट बैंक की वजह से एशिया और सभी ब्रिक्स देशों का कायम हो सकेगा। साथ ही अगर यह बैंक भी उपरोक्त दोनों संगठनों की तरह कामयाब हो गया तो अमेरिका का दंभ भी खत्म हो सकता है।












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