पश्चिम बंगाल में BJP के प्रभाव से डरी ममता बनर्जी! पहली बार रामनवमी की छुट्टी, हिन्दुओं को लुभा पाएंगी?
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार ने पहली बार रामनवमी के अवसर पर सावर्जनिक छुट्टी की घोषणा की है। आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा, काली पूजा जैसे त्योहार लोकप्रिय रहे हैं लेकिन हाल के समय में यहां पर रामनवमी और हनुमान जयंती मनाने का भी चलन बढ़ा है।
पश्चिम बंगाल में कई अन्य त्योहारों पर सार्वजनिक अवकाश होता था, लेकिन रामनवमी पर अवकाश का चलन नहीं था। लेकिन ममता सरकार ने सभी को चौंकाते हुए पहली बार अवकाश की घोषणा की है। इस बार बंगाल सरकार की इस घोषणा को चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है।

राज्य सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, आवश्यक सेवाओं को छोड़कर राज्य सरकार के सभी कार्यालय, उनके सहयोगी संगठन और उपक्रम रामनवमी के अवसर पर बंद रहेंगे। आपको बता दें कि इस साल 17 अप्रैल को रामनवमी है।
पश्चिम बंगाल सरकार के इस फैसले पर विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि ममता बनर्जी की सरकार ने बीजेपी के दबाव में रामनवमी पर छुट्टी देने का फैसला लिया है।
शुभेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, 'यह पहली बार है कि राज्य सरकार ने चैत्र मास के शुक्लपक्ष की नवमी तिथि पर मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचन्द्र के सम्मान में अवकाश की घोषणा की है। मैंने जनवरी में रामनवमी पर छुट्टी नहीं देने के लिए राज्य सरकार की आलोचना की थी, आज राज्य सरकार को छुट्टी घोषित करने के लिए मजबूर होना पड़ा।'
ममता बनर्जी की इस घोषणा पर भाजपा के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने कटाक्ष किया है। अमित मालवीय ने कहा कि ममता ने ऐसा अपनी हिंदू विरोधी छवि को भुनाने के लिए किया है। हालांकि अब बहुत देर हो गई है।
अमित मालवीय ने एक्स पर पोस्ट किया, "ममता बनर्जी जो हर बार 'जय श्री राम' सुनते ही गुस्से से नीली हो जाती थीं, उन्होंने पश्चिम बंगाल में राम नवमी (17 अप्रैल) को सार्वजनिक अवकाश घोषित कर दिया है। ऐसा उन्होंने अपनी हिंदू विरोधी छवि को भुनाने के लिए किया है। हालांकि बहुत देर हो चुकी है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि रामनवमी के जुलूस पर कोई पथराव न हो।"












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