Explainer: बांग्लादेश चुनाव की वैधता पर सवाल, विपक्ष को सिर्फ 11 सीटें, संसद में कौन पूछेगा शेख हसीना से सवाल?
Bangladesh Election: शेख हसीना ने चुनाव में एकतरफा जीत हासिल करते हुए बांग्लादेशी प्रधान मंत्री के रूप में अपना पांचवां कार्यकाल सुरक्षित कर लिया है, जिसका परिणाम उसी समय तय हो गया था, जब नवंबर की शुरुआत में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की गई थी और जब मुख्य विपक्षी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने चुनाव का बहिष्कार कर दिया था।
तो फिर बांग्लादेश में चुनावी नतीजे निकलने के बाद आश्चर्य ये है, कि आखिर दूसरे नंबर पर कौन आया?

बांग्लादेश में रविवार को हुए मतदान के बाद वोटों की काउंटिग में किसी भी राजनीतिक दल के बजाय, स्वतंत्र उम्मीदवारों ने कुल 63 सीटें हासिल कीं, जो शेख हसीना की अवामी लीग के बाद दूसरी सबसे बड़ी जीत है। शेख हसीना की पार्टी ने 222 सीटें जीतीं हैं, जिससे संसद में विपक्ष खोजने की समस्या पैदा हो गई।
चुनाव आयोग के मुताबिक, संसद में दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा सीट हासिल करने वाली पार्टी का नाम जातीय पार्टी है, जिसने 11 सीटें हासिल की हैं।
जीतने वाले लगभग सभी स्वतंत्र दावेदार ऐसे लोग हैं, जिन्हें अवामी लीग ने टिकट नहीं दिया था, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने उन्हें चुनाव को दुनिया के सामने प्रतिस्पर्धी रूप देने के लिए "डमी उम्मीदवार" के रूप में खड़े होने के लिए कहा था।
अल जज़ीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, प्रसिद्ध बांग्लादेशी मानवाधिकार कार्यकर्ता और फोटोग्राफर शाहिदुल आलम ने कहा, "यह एक विचित्र चुनाव का विचित्र परिणाम है।" उन्होंने कहा, कि "डमी चुनाव में डमी उम्मीदवार अब एक डमी संसद का नेतृत्व करेंगे।"
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) - अवामी लीग की मुख्य राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी है- जिसने डिमांड रखा था, कि वो इलेक्शन में तभी हिस्सा लेगी, जब एक अंतरिम सरकार का गठन किया जाएगा और शेख हसीना सरकार से इस्तीफा देंगी। लेकिन, शेख हसीना ने ऐसा करने से इनकार कर दिया था।
बांग्लादेश में पहले निष्पक्ष चुनाव करवाने के लिए अंतरिम सरकार का गठन किया जाता था, लेकिन 2008 में अंतरिम सैन्य शासकों ने चुनाव करवाने से इनकार कर दिया था और शेख हसीना के साथ साथ बेगम खालिदा जिया को भी जेल में बंद कर दिया गया।
जिसके बाद शेख हसीना ने अंतरिम सरकार के गठन की प्रक्रिया को खत्म कर दिया।
लेकिन, इसके बाद से शेख हसीना के ऊपर चुनाव को गलत तरीके से जीतने के आरोप लग रहे हैं। रविवार को हुए चुनाव में चुनाव आयोग ने कहा, कि पूरे देश में कुल मिलाकर 40 प्रतिशत चुनाव हुए हैं।
लेकिन कई लोगों को संदेह है, कि मत प्रतिशत काफी ज्यादा है। कई जगहों से ऐसी रिपोर्ट है, कि सरकारी अधिकारी बैलेट पेपर को छाप रहे थे।
अलजजीरा की एक रिपोर्ट में कहा गया है, कि राजधानी ढाका कके धनमंडी इलाके के एक इंजीनियर अब्दुल्ला यूसुफ ने कहा, "मैं देश के बाकी हिस्सों के बारे में नहीं जानता, लेकिन मुझे लगता है कि मैंने वर्षों में इतना खाली ढाका नहीं देखा है।"
उन्होंने कहा, कि "यह शुरुआती कोरोना के दिनों जैसा महसूस हुआ। मैंने दोपहर में दो मतदान केंद्रों को देखा और अवामी लीग के कार्यकर्ताओं के अलावा बैज पहने हुए ज्यादा लोगों को नहीं देखा। चुनाव आयोग का 40 प्रतिशत का दावा काफी बेतुका है।"

क्या चुनाव के नाम पर हुआ फर्जीवाड़ा?
इस बीच, कुछ विश्लेषकों ने चुनाव आयोग की घोषणा पर भ्रम की ओर इशारा किया है।
पूर्व चुनाव आयुक्त सखावत हुसैन ने कहा, "यह विश्वास करना कठिन है, कि मतदान 40 प्रतिशत हुआ है, विशेष रूप से इस तथ्य को देखते हुए, कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने मीडिया को जानकारी देते समय पहले खुद 28 प्रतिशत कहा और फिर अचानक इसे बदलकर 40 प्रतिशत कर दिया।"
मतदान का आंकड़ा, जो ब्रीफिंग के कुछ घंटों बाद चुनाव आयोग मुख्यालय में डैशबोर्ड पर दिखाया गया था, वो 28 प्रतिशत था, और इसकी एक तस्वीर देश के सोशल मीडिया में व्यापक रूप से प्रसारित की गई और इसकी आलोचना हुई। हालाकि, हम इस आंकड़े की जाँच और सत्यापन करने में समर्थ नहीं हैं।
चुनाव आयोग ने मतदान बंद होने से एक घंटे पहले घोषणा की कि मतदान लगभग 27 प्रतिशत था। वहीं, अल जजीरा ने दावा किया है, कि आखिरी घंटे में राजधानी ढाका में कम से कम 10 मतदान केंद्रों का उसने दौरा किया और उन्हें कोई मतदाता नहीं मिला।
प्रतिष्ठित चुनाव पर्यवेक्षक संगठन ब्रोटी के प्रमुख शर्मिन मुर्शिद ने कहा, कि एक घंटे के अंतराल में 27 से 40 तक की छलांग "हास्यास्पद" है और इसने "चुनाव आयोग की प्रतिष्ठा को गंभीर रूप से खराब कर दिया है।"
उन्होंने कहा, कि "यह लोगों का विश्वास और विश्वसनीयता खोने का एक निश्चित तरीका था, जिसकी शुरुआत नहीं होनी थी।" उन्होंने कहा, "यह कोई चुनाव नहीं था, बल्कि यह एक पार्टी द्वारा एक पार्टी के लिए वोट डालने की कवायद थी।"
बीएनपी नेताओं ने 28 प्रतिशत को भी बहुत ज्यादा बताया और कहा, कि देश भर में अधिकांश मतदान केंद्र दिन भर खाली रहे। विपक्षी दल ने पहले शनिवार सुबह से 48 घंटे की "हड़ताल" की घोषणा की थी, जिसके बारे में उनका मानना था, कि इससे मतदान में काफ कमी आई है।
बीएनपी के एक वरिष्ठ नेता अब्दुल मोईन खान ने कहा, कि "मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म पर साझा की गई अधिकांश तस्वीरों और फुटेज में, आपको पुलिस और कुछ अवामी लीग कार्यकर्ताओं के साथ कुत्तों के खड़े, लेटते और धूप सेंकते हुए तस्वीरें मिलेंगी।" चुनाव के बाद पत्रकारों को जानकारी देते हुए, उन्होंने कहा, कि "मतदान केन्द्रों पर कोई मतदाता नहीं थे।"
खान ने कहा कि लोगों ने मतपत्रों का बहिष्कार करने और चुनाव में "लाल कार्ड" दिखाने के उनके आह्वान पर ध्यान दिया है।

चुनाव की वैधता पर सवाल
हालांकि, अवामी लीग के नेताओं ने कहा कि "हड़ताल" और "आगजनी हमलों" के माध्यम से चुनाव को नाकाम करने की बीएनपी की योजना सफल नहीं हुई, क्योंकि लोग वोट देने के लिए अपने घरों से निकले।
अवामी लीग के वरिष्ठ नेता ओबैदुल क़ादर ने चुनाव परिणामों में स्पष्ट बढ़त पाने के बाद मीडिया से कहा, "लोग बीएनपी के आतंकवाद को मतदान के माध्यम से करारा जवाब देते हैं।"
क्वाडर ने यह भी कहा, कि ज्यादातर लोगों ने बिना किसी डर या मतदान में हस्तक्षेप के अपने पसंदीदा उम्मीदवारों को वोट दिया। उन्होंने कहा, "यह देश के सबसे शांतिपूर्ण चुनावों में से एक था।"
जबकि, पिछले दो राष्ट्रीय चुनावों में दर्जनों मौतें और गंभीर हिंसा हुई थी। रविवार के मतदान में केवल एक मौत और बहुत कम झड़पें देखी गईं, जिससे यह दक्षिण एशियाई राष्ट्र के इतिहास में सबसे शांतिपूर्ण चुनावों में से एक बन गया।
चुनाव के कई विदेशी पर्यवेक्षकों में से एक, फिलिस्तीन के केंद्रीय चुनाव आयोग के सीईओ हिशाम कुहैल ने बाद में एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, "आपके देश के लोगों को इस तरह के शांतिपूर्ण चुनाव पर गर्व होना चाहिए।"
हालांकि, कुहैल ने मतदान प्रतिशत के बारे में सवालों को टाल दिया और कहा, कि वह केवल मतदान प्रक्रिया की तकनीकीताओं का आकलन कर रहे थे - क्या मतदाताओं को प्रवेश की अनुमति थी और क्या मतदान व्यवस्थित रूप से हुआ था।
उन्होंने कहा, ''मैं यहां के राजनीतिक परिदृश्य पर टिप्पणी नहीं कर सकता। इसके लिए मुझे कम से कम एक महीना रुकने की जरूरत है।''
रूसी पर्यवेक्षक आंद्रेई शुतोव ने भी कहा कि मतदान प्रक्रिया व्यवस्थित और शांतिपूर्ण रही। उन्होंने कहा, "यह चुनाव वैध है।"
बीएनपी के सूचना और प्रौद्योगिकी मामलों के सचिव एकेएम वाहिदुज्जमां ने कहा, कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह शांतिपूर्ण था क्योंकि "कोई मतदाता नहीं थे"
उन्होंने कहा, अवामी लीग की जीत "अवैध और नाजायज" थी क्योंकि लोगों ने "वोटों के माध्यम से उन्हें वैध नहीं ठहराया"।
हालांकि, बीएनपी के आरोप कुछ भी हों, लेकिन बांग्लादेश के इस चुनाव को ऑब्जर्वर्स से हरी झंडी मिल गई है और चुनाव को वैध करार दिया गया है, लेकिन संसद में विपक्ष का नाम होना खराब कहा जा सकता है।
लेकिन, बांग्लादेश की विपक्षी पार्टी बीएनपी और उसके सहयोगी दल जिस हिंसक विचारधारा में विश्वास रखते हैं, अगर संसद में उनकी तादाद ज्यादा होती, तो ये देश के लिए और खतरनाक होता।
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