QUAD की सबसे कमजोर कड़ी या रीढ़ की हड्डी है भारत? चीन और रूस पर मोदी सरकार की चुप्पी के मायने समझिए
QUAD Summit: अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन के होमटाउन डेलावेयर के विलमिंगटन में आयोजित क्वाड शिखर सम्मेलन (QUAD Summit) अमेरिका, जापान, भारत और ऑस्ट्रेलिया के नेताओं ने इस चर्चा को सिरे से खारिज कर दिया, कि क्वाड गठबंधन का कॉर्डिनेशन डगमगा रहा है।
ऑस्ट्रेलिया के प्रधान मंत्री एंथनी अल्बनीज, भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के प्रधान मंत्री किशिदा फुमियो के साथ, अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन ने घोषणा की है, कि अगली क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक 2025 में अमेरिका में होगी और भारत अगले साल अगले क्वाड लीडर्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा।

पिछले चार सालों में क्वाड देशों के नेताओं के बीच 6 बार मुलाकात हो चुकी है, जिनमें दो बार वर्चुअल बैठक शामिल हैं, और क्वाड विदेश मंत्री आठ बार मिले हैं और सबसे हालिया मुलाकात इसी साल जुलाई में टोक्यो में आयोजित की गई थी। QUAD बैठक के बाद 'विलमिंगटन ज्वाइंट स्टेटमेंट' ने क्वाड विरोधियों के तमाम तर्कों को नकार दिया और राष्ट्रपति बाइडेन ने मीडिया के सवालों के जवाब में साफ शब्दों में कहा, कि क्वाड उनके कार्यकाल के खत्म होने के बाद भी एक महत्वपूर्ण शक्ति बनी रहेगी।
क्या भारत QUAD की सबसे कमजोर कड़ी है?
क्वाड को चीन विरोधी सैन्य गठबंधन के रूप में माना जाता है, लेकिन क्वाड के कामकाज और हर क्वाड की बैठक के बाद जो ज्वाइंट स्टेटमेंट जारी होते हैं, खासक "विलमिंगटन ज्वाइंट स्टेटमेंट" में बताए गए सिद्धांतों से अलग तस्वीर उभर कर आती है।
गठबंधन किसी भी एकतरफा कार्रवाई के खिलाफ मुखर रहा है, यानि क्वाड हर उस स्थिति का विरोध करेगा, जो शक्ति के जरिए यथास्थिति को बदलने या बाधित करने की कोशिश करेगा, जो स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि इसका एजेंडा सैन्य चिंताओं से कहीं ज्यादा गंभीर और विस्तारित है।
One new initiative to emerge from the Quad summit is a joint coast-guard mission. Just as the navies of the US, India, Japan and Australia hold the Malabar war games, their coast guards will likewise join hands to build interoperability and joint capacities from next year onward.
— Brahma Chellaney (@Chellaney) September 22, 2024
यह रुख इसलिए महत्वपूर्ण है, भारत की उसकी विकासशील अर्थव्यवस्था और रूस की खुले तौर पर आलोचना करने में हिचकिचाहट के कारण "सबसे कमजोर कड़ी" के रूप में लेबल किया जाता है, लेकिन इस बार के ज्वाइंट स्टेटमेंट में शक्ति के दम पर एकतरफा कार्रवाई का विरोध करने का संकल्प लिया गया है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन पर क्वाड का जोर, ऐसी आलोचनाओं का प्रभावी ढंग से मुकाबला करता है और क्वाड देशों के सामूहिक व्यापक एजेंडे को उजागर करता है।
हाल के दिनों में, क्वाड ने अपनी भागीदारी के स्तर को काफी हद तक बढ़ा दिया है, जैसा् की क्वाड की बार बार होने वाली बैठकों से पता चलता है। क्वाड देशों के नेताओं के बीच 6 शिखर सम्मेलन पिछले चार सालों में हो चुके हैं, जबकि विदेश मंत्रियों की बैठक आठ बार हो चुकी है। विदेश मंत्रियों की सबसे हालिया मुलाकात जुलाई में टोक्यो में हुई थी, जिसमें साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने और पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में ठोस लाभ पहुंचाने के लिए एक सहयोगी नजरिए पर ध्यान केंद्रित किया गया था। गतिविधि में यह उछाल अपने सदस्यों के बीच सार्थक संवाद और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए क्वाड के समर्पण को रेखांकित करता है।

सुरक्षा से आगे भी क्वाड का विस्तार
विलमिंगटन घोषणापत्र में क्वाड के गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के संकल्प पर जोर दिया गया है, जिसमें स्वास्थ्य, प्रौद्योगिकी, कनेक्टिविटी और महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाएं शामिल हैं।
इसके अलावा "क्वाड कैंसर मूनशॉट" जैसी पहल का मकसद इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में कैंसर मृत्यु दर को कम करना है, जिसमें सर्वाइकल कैंसर से निपटने पर विशेष ध्यान दिया गया है। बेहतर प्राकृतिक आपदा प्रतिक्रियाओं के लिए "महामारी कोष" को मजबूत करने के प्रयास और समुद्री सुरक्षा और कानून प्रवर्तन को बढ़ावा देने के लिए "इंडो-पैसिफिक में प्रशिक्षण के लिए समुद्री पहल (MAITRI)" की शुरूआत भी एक मजबूत प्रयास है। ये प्रयास इंडो-पैसिफिक को शांति और समृद्धि का क्षेत्र बनाए रखने के लिए क्वाड के मजबूत कदम को दर्शाते हैं।
विलमिंगटन क्वाड बैठक की प्रमुख घोषणाएं
विलमिंगटन में क्वाड ने इंडो-पैसिफिक में बुनियादी ढांचे के विकास, डिजिटल कनेक्टिविटी और टेक्नोलॉजिकल डेलृवलपमेंट में सहायता के लिए कई परियोजनाओं की घोषणा की है। इन पहलों में भविष्य की साझेदारी के लिए क्वाड पोर्ट, आपदा प्रतिक्रिया के लिए एक क्वाड इंडो-पैसिफिक लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और कृषि सेक्टर में क्रांति लाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स और सेंसिंग तकनीक जैसे क्षेत्रों में ज्वाइंट रिसर्च शामिल हैं।
"बायोएक्सप्लोर इनिशिएटिव" के माध्यम से जैविक इको-सिस्टम तंत्र के स्टडी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का फायदा उठाने के लिए "आकस्मिक नेटवर्क सहयोग ज्ञापन" के माध्यम से सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए साझेदारी की प्रतिबद्धता क्षेत्रीय विकास के लिए इसके दूरदर्शी नजरिए को दर्शाती है।
क्वाड के लिए रीढ़ की हड्डी कैसे है भारत?
इंडो-पैसिफिक में इन पहलों में भारत की प्रमुख भूमिका स्पष्ट है और भारत ने कई परियोजनाओं का नेतृत्व किया है, जिसमें महामारी की तैयारी और समुद्री सुरक्षा पर कार्यशालाओं की मेजबानी करना और पूरे इंडो-पैसिफिक में अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं का नेतृत्व करना शामिल है।
क्षेत्र में गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर से निपटने के लिए 7.5 मिलियन डॉलर के अनुदान की प्रधानमंत्री मोदी की घोषणा क्वाड के मिशन में भारत की सक्रिय भागीदारी को उजागर करती है। यह सक्रिय भागीदारी भारत को एक कमजोर सदस्य के रूप में देखने की धारणा को दूर करती है, और क्वाड के सहयोगी प्रयासों में एक समान और महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में इसकी स्थिति की पुष्टि करती है।
राजनीति, विदेश नीति और रणनीतिक मामलों का विश्लेषण करने में व्यापक अनुभव रखने वाले अनुभवी पत्रकार प्रकाश नंदा, वैश्विक और क्षेत्रीय गतिशीलता को आकार देने में क्वाड के नवीनतम शिखर सम्मेलन के महत्व पर जोर देते हैं। इस बैठक ने न सिर्फ क्वाड की एकता की पुष्टि की है, बल्कि इंडो-पैसिफिक में "ग्लोबल फोर्स फॉर गुड" होने पर इसके विस्तारित फोकस को भी मजबूत किया, जिसका मकसद स्थिरता, समृद्धि और सहयोग को बढ़ावा देना है, इस प्रकार गठबंधन के भीतर कलह या कमजोरी की किसी भी धारणा का मुकाबला करना है।
क्वाड का मकसद साफ है, भले ही भारत सार्वजनिक तौर पर चीन का नाम ना ले, लेकिन भारत उस स्थिति में भी नहीं फंसना चाहता है, जहां से वापसी संभव ना हो। भारत किसी के उकसावे पर कोई युद्ध शुरू नहीं करेगा और भारत का फोकस पूरी तरह से अपनी अर्थव्यवस्था पर रहने वाली है। इसलिए भले ही भारत को कोई क्वाड का कमजोर कड़ी बताए, मगर हकीकत ये है, कि भारत ही क्वाड की रीढ़ की हड्डी है।












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