'गैर-मुस्लिमों से वसूला जाए जज़िया टैक्स, वरना लड़े लड़ाई', मुस्लिम प्रोफेसर का जहरीला बयान
कतर में इस बार विश्वकप फुटबॉल का आयोजन हो रहा है और कतर सरकार पर खेल की आड़ में इस्लाम का प्रचार करने के आरोप लग रहे हैं। वहीं, भारत का भगोड़ा इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाइक भी इस्लाम का प्रचार करने कतर गया है।
Qatar Professor on Islam: सऊदी अरब जैसे मुस्लिम देश जहां आधुनिकता की तरफ बढ़ रहे हैं और ग्लोबल वर्ल्ड में जहां नये आर्थिक विकल्पों को तलाशने की तरफ बढ़ रहे हैं, वहीं कतर जैसे मुस्लिम देशों में अभी भी गैर-मुस्लिमों के लिए जहर उगला जाता है। अब कतर यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर ने गैर मुस्लिमों को लेकर जहरीला बयान दिया है। कतर में अभी फुटबॉल विश्वकप चल रहा है और खेल की आड़ में कतर पर पहले ही इस्लाम के प्रचार-प्रसार करने के आरोप लग रहे हैं, लेकिन अब प्रोफेसर के बयान के बाद कतर जैसे देशों की संकीर्ण मानसिकता का खुलासा हो रहा है।

कतरी प्रोफेसर का जहरीला बयान
रिपोर्ट के मुताबिक, कतर विश्वविद्यालय में इस्लामी अध्ययन के प्रोफेसर डॉ. शफी अल-हजरी ने 25 नवंबर 2022 को अल-रेयान टीवी (कतर) पर एक शो में विवादित बातें करते हुए गैर-मुस्लिमों से जजिया टैक्स वसूलने की वकालत की है। कतरी प्रोफेसर टीवी पर इस्लाम के विस्तार के तरीकों पर बात कर रहे थे और उन्होंने इस दौरान लड़ाई को इस्लाम के फैलाव का तीसरा और अंतिम तरीका ठहराया है। प्रोफेसर डॉ. शफी अल-हजरी ने कहा कि, सबसे पहला तरीका ये है, कि लोगों को प्यार से इस्लाम अपनाने के लिए मनाया जाना चाहिए, उन्हें इस्लाम में आने के लिए बुलया जाना चाहिए। अगर इससे बात नहीं बने, तो फिर उनके खिलाफ जज़िया टैक्स लगाकर उनर इस्लाम कबूल करने के लिए मजबूर करना चाहिए। लेकिन, फिर भी जो इस्लाम कबूल नहीं करते हैं, उनके साथ फिर लड़ाई करनी चाहिए।
'इस्लाम फैलाने का आखिरी रास्ता है लड़ाई'
कतरी प्रोफेसर ने टीवी पर इस्लाम को लेकर बात करते हुए कहा कि, इस्लाम फैलाने का आखिरी रास्ता लड़ाई है, यानि तलवार के दम पर इस्लाम फैलाना जायज है। आपको बता दें कि, अकसर आरोप लगते रहे हैं, कि तलवार के दम पर दुनिया में इस्लाम का विस्तार किया गया। वहीं, भारत में कई एक्सपर्ट्स का आरोप होता है, कि मुस्लिम शासकों ने तलवार के दम पर इस्लाम फैलाया था। वहीं, मुगल काल में भारत में भी जजिया टैक्स गैर-मुस्लिमों से वसूला जाता था। भारत में जजिया टैक्स वसूलने का सबसे पहला इतिहास मुहम्मद बिन कासिम के आक्रमण के बाद देखने को मिलता है। मुहम्मद बिन कासिम ने भारत में सबसे पहला जजिया टैक्स तत्कालीन भारत के सिंध प्रांत में लगाया था। वहीं, दिल्ली सल्तनत के पहले सुल्तान फिरोज तुगलक ने भारत के हिन्दुओं पर जजिया कर लगाया था।

क्या होता है जजिया कर?
आपको बता दें कि, जज़िया एक प्रकार का मजहबी टैक्स है, जो मुस्लिम शासित राज्यों में रहने वाले गैर मुस्लिमों से वसूला जाता है। ऐसा टैक्स सिर्फ मुस्लिम शासित राज्यों में ही वसूला जाता था, क्योंकि उस समय इस्लामिक राज्य में सिर्फ मुस्लिमों को ही रहने का अधिकार हासिल है और अगर दूसरे धर्म के लोग उस राज्य में रहते हैं, तो उन्हें अपने धार्मिक कामकाज के लिए टैक्स देना होता है। भारत में भी एक गैर- मुस्लिम शासक ने जजिया जैसा ही टैक्स लगाया था। इतिहासकारों के मुताबिक, भारत में गहड़वालों ने भी अपने राज्य में तुरुष्कदण्ड नामक एक टैक्स लगाया था और इसके मुताबाकि, राज्य में रहने वाले मुस्लिमों को अपने धार्मिक कामकाज के लिए टैक्स देना होता था।

कतर में फुटबॉल विश्वकप विवादों में
आपको बता दें कि, कतर इस बार फीफा विश्वकप फुटबॉल का आयोजन कर रहा है और इसका आयोजन लगातार विवादों में हैं। कतर में फुटबॉल स्टेडियम निर्माण में लगे मजदूरों से इतना भयानक काम करवाया गया, कि कम से कम 500 से ज्यादा मजदूरों की मौत हो गई, जिसे अब जाकर कतर ने स्वीकार किया है। वहीं, भारत का भगोड़ा जाकिर नाइक भी इस्लाम का प्रचार करने के लिए कतर पहुंचा है और विवाद के बाद कतर ने अब जाकर कहा है, कि उसने जाकिर नाइक को देश में आमंत्रित नहीं किया है।












Click it and Unblock the Notifications