Putin India Visit: S-400 एयर डिफेंस सिस्टम से सस्ती ऊर्जा तक, पुतिन की भारत यात्रा के दौरान होगी ये बड़ी डील
Putin India Visit: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अपनी चार साल बाद होने वाली बहुप्रतीक्षित राजकीय यात्रा पर 4 से 5 दिसंबर तक भारत में रहेंगे। इस दौरान वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यह दौरा वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच दोनों देशों की 'विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी' को और गहरा करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और तकनीकी सहयोग में कई बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर करना या उनकी घोषणा करना है। भारत अपनी सेना को मजबूत करने और व्यापार असंतुलन को ठीक करने के लिए रूस के साथ बड़े पैकेज पर विचार कर रहा है।

S-400 और मिसाइल डिफेंस का विस्तार
यात्रा का मुख्य आकर्षण S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की नई खरीद पर संभावित डील है। भारत ने 2018 में खरीदी गई पांच यूनिट में से बची हुई दो यूनिट की डिलीवरी और 'ऑपरेशन सिंदूर' में खर्च हुई मिसाइलों की भरपाई के लिए 300 नई मिसाइलें खरीदने पर विचार कर रहा है। इसके अलावा, भारत S-500 और पैंटसिर मिसाइल सिस्टम (जो ड्रोन से निपटने में कारगर है) पर भी विचार कर सकता है। ये खरीद पाकिस्तान और चीन की बढ़ती गतिविधियों के मद्देनजर भारतीय सेना की ताकत को फास्ट ट्रैक प्रक्रिया के माध्यम से बढ़ाएगी।
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सस्ती रूसी ऊर्जा सप्लाई पर दीर्घकालिक समझौता
अमेरिकी टैरिफ के दबाव के बावजूद, रूस भारत को रियायती दरों पर कच्चे तेल की सप्लाई जारी रखने के लिए एक आकर्षक एक्स्ट्रा डिस्काउंट पैकेज ऑफर कर सकता है। इस दौरे में सस्ती ऊर्जा आपूर्ति पर एक लंबे समय तक चलने वाला एग्रीमेंट होने की संभावना है। दोनों देश रूसी LNG, कोयला और गैस पाइपलाइन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा करेंगे, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और वैश्विक बाजार की अस्थिरता से बचाव मिलेगा।
Modi Putin meeting: व्यापार असंतुलन सुधारने के लिए विशेष पैकेज
दोनों देशों के बीच व्यापार 2024-25 में $68.7 बिलियन तक पहुंच गया है, लेकिन भारत का निर्यात (केवल $4.88 बिलियन) भारी असंतुलन दर्शाता है। इस असंतंतुलन को दूर करने के लिए, रूस भारतीय सामानों के लिए रूसी बाजार में 'स्पेशल एक्सेस' देने की घोषणा कर सकता है। साथ ही, रुपया-रूबल में सीधे व्यापार को बढ़ावा देने के लिए नए तंत्र स्थापित किए जा सकते हैं, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक लेनदेन आसान और डॉलर पर निर्भरता कम हो सके।
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डिफेंस को-प्रोडक्शन और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर
मेक इन इंडिया पहल को बढ़ावा देते हुए, दोनों देश रक्षा उपकरणों के संयुक्त निर्माण (Joint Manufacturing) और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (Technology Transfer) पर महत्वपूर्ण घोषणाएं कर सकते हैं। इसमें AK-203 राइफल के उत्पादन को तेज करना और ब्रह्मोस मिसाइल के भविष्य के प्रोजेक्ट्स पर नए समझौता ज्ञापन (MoU) शामिल हैं। यह सहयोग भारत को रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने और अपनी सेना की जरूरतों को तेजी से पूरा करने में मदद करेगा।
परमाणु और अंतरिक्ष में सहयोग का नया विजन
यात्रा के दौरान कुडनकुलम न्यूक्लियर प्लांट की नई यूनिटों की प्रगति पर घोषणा होने की उम्मीद है। इसके अलावा, छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) जैसी अगली पीढ़ी की परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं पर सहमति बन सकती है। अंतरिक्ष सहयोग में, गगनयान मिशन के लिए रॉसकॉसमॉस से आगे का समर्थन और सैटेलाइट नेविगेशन (GLONASS-NavIC सहयोग) पर बड़े ऐलान होने की संभावना है। यह यात्रा अगले दस वर्षों के लिए रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और व्यापार के क्षेत्रों में एक रणनीतिक रोडमैप भी जारी कर सकती है।












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