Putin India Visit: S-400 से लेकर, SU-57 फाइटर जेट तक, पुतिन के दौरे से भारत को होने वाला है सबसे बड़ा फायदा!
Putin India Visit: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4-5 दिसंबर को दो दिवसीय भारत यात्रा पर देश की राजधानी नई दिल्ली आ रहे हैं। ऐसे में भारत और रूस के बीच बड़े रक्षा सौदे और एनर्जी डील्स होने की पूरी संभावना है। हाल ही में पाकिस्तान के साथ हुए संघर्ष के बाद भारत भी अपनी डिफेंस कैपेसिटी बढ़ाने पर पूरा जोर दे रहा है जिसमें रूस का महत्वपूर्ण रोल होने वाला है।
क्या-क्या खरीद सकता है भारत?
भारत और रूस की रक्षा साझेदारी दुनिया में सबसे मजबूत मानी जाती है। यही वजह है कि आज भी भारत के 46% हथियार रूस से आते हैं। पुतिन के इस दौरे में कई बड़े डिफेंस डील्स पर फोकस होगा, जिनसे भारत की सैन्य क्षमता में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी।

इन डील्स में शामिल हैं-
• 5 नए S-400 स्क्वाड्रन (5,000 करोड़ रुपए)
• 2-3 स्क्वाड्रन Sukhoi-57 फाइटर जेट्स
• T-72 टैंकों के लिए 1,000 HP इंजन, जो भारत में ही बनेगा
खासतौर पर S-400 की क्षमता का अंदाजा मई 2025 के 'ऑपरेशन सिंदूर' में लग चुका है, जब इस सिस्टम ने पाकिस्तान के खिलाफ महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इन डील्स से भारत की एयर डिफेंस और कॉम्बैट क्षमता दोनों अगले लेवल पर पहुंच जाएंगी।
ऊर्जा सेक्टर: भारत की 40% जरूरतें रूस से पूरी
रूस अब सिर्फ भारत का रक्षा साझेदार नहीं, बल्कि ऊर्जा सेक्टर में भी सबसे अहम पार्टनर बन चुका है। भारत की 40% तेल जरूरतें रूस से पूरी होती हैं, और 2025 की पहली छमाही में भारत ने 1.6 मिलियन बैरल प्रति दिन रूसी तेल खरीदा-जो 2020 के मुकाबले 32 गुना ज्यादा है। इससे भारत को सालभर में अरबों डॉलर की बचत हुई है।
अब दोनों देशों के बीच बातचीत इन बड़े प्रोजेक्ट्स पर होगी-
• आर्कटिक और फार ईस्ट में संयुक्त ऊर्जा प्रोजेक्ट्स
• महाराष्ट्र में SMR (Small Modular Reactor) प्लांट
• अमेरिका द्वारा 50% टैरिफ लगाए जाने पर एक स्पेशल मैकेनिज्म, ताकि तेल सप्लाई बिना किसी रुकावट जारी रह सके भारत साफ-साफ यह चाहता है कि रूस से मिलने वाली सस्ती तेल सप्लाई लंबे समय तक स्थिर रहे।
रिकॉर्ड स्तर पर ट्रेड, लेकिन ट्रेड गैप चिंता का विषय
2024-25 में भारत-रूस व्यापार 68.7 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, लेकिन इसमें एक बड़ी दिक्कत भी है-भारत का ट्रेड घाटा 59 बिलियन डॉलर है। यानी भारत रूस से बहुत ज्यादा खरीदता है, लेकिन बेचता कम है। इस ट्रेड गैप को कम करने के लिए पुतिन का दौरा बेहद अहम है। बातचीत में ये मुद्दे खास रहेंगे-
• EAEU के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA)
• भारत के MSMEs और किसानों के लिए रूस-बेलारूस के बाजारों में एंट्री
• रुपया-रूबल ट्रेड को और बढ़ावा
• रूस में IT, कृषि और हेल्थकेयर सेक्टर में भारतीय निवेश और कंपनियों के लिए नए मौके
इन कदमों से सही मायनों में दोनों देशों का व्यापार संतुलित हो सकेगा।
कूटनीति: भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' का बड़ा संदेश
पुतिन का भारत दौरा सिर्फ एक विज़िट नहीं, बल्कि एक बड़ा जियोपॉलिटिकल मैसेज है-भारत किसी भी बाहरी दबाव में नहीं आता और अपने फैसले खुद लेता है। दोनों देश SCO और BRICS जैसे मंचों पर भी मिलकर अपनी भूमिका मजबूत करेंगे। युक्रेन युद्ध, मध्य-पूर्व संकट और वैश्विक अस्थिरता पर भी भारत अपनी शांति पहल को दुहराएगा।
'दोस्ती सबकी, निर्भरता किसी पर नहीं'
भारत की विदेश नीति का सबसे बड़ा सिद्धांत यही है- "दोस्ती सबकी, निर्भरता किसी पर नहीं।"
और यह दौरा इसी भावना को और मजबूत करेगा। मोदी-पुतिन इस मुलाकात से रूस और भारत दोनों देशों के लोगों को काफी उम्मीदें हैं। आजादी से लेकर हमेशा भारत और रूस एक-दूसरे के साथ खड़े रहे हैं। ऐसे में ये मुलाकात मजबूती की एक नई मिसाल पेश करेगी।
ये मुलाकात बहुत कुछ करेगी तय
कुल मिलाकर, पुतिन की यह भारत यात्रा सिर्फ राजनयिक औपचारिकता नहीं है। यह रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और ग्लोबल पॉलिटिक्स के लिहाज से भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक है। इससे भारत-रूस की विशेष रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होगी और आने वाले दशक की विदेश नीति को नई दिशा देगी।
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