Imran Khan: साइफर केस में इमरान खान के लिए फांसी की सजा की मांग, क्या भुट्टो जैसा होगा पूर्व कप्तान का हाल?
Imran Khan News: क्या पाकिस्तान में एक और प्रधानमंत्री को फांसी की सजा मिलने वाली है? ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं, क्योंकि कोर्ट में इमरान खान के लिए फांसी की सजा की मांग की गई है। पाकिस्तान से आ रही रिपोर्ट के मुताबिक, प्रॉसीक्यूटर ने कोर्ट में इमरान खान के लिए फांसी की सजा मांग की गई है।
साउथ एशिया इंडेक्स के ट्वीट ने ट्वीट के जरिए जानकारी दी है, कि पाकिस्तान में अभियोजकों ने कोर्ट से पूर्व पीएम इमरान खान को मौत की सजा देने की मांग की है। अप्रैल 2022 में सरकार से हटाए जाने के बाद पूर्व पीएम इमरान खान देशद्रोह के आरोप का सामना कर रहे हैं।

इमरान खान के लिए फांसी की सजा की मांग
अगर कोर्ट ने अभियोजकों की याचिका स्वीकार कर ली तो पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को मौत की सजा दी जा सकती है। हालांकि कई कानूनी विशेषज्ञों का मानना है, कि इसकी अत्यधिक संभावना नहीं है, लेकिन कोर्ट इमरान खान को उम्र कैद की सजा दे सकती है।
वहीं, जियो न्यूज ने एक दिन पहले रिपोर्ट दी थी, कि साइफर मामले में, अभियोजन पक्ष ट्रायल कोर्ट में इमरान खान और शाह महमूद कुरेशी के खिलाफ आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत अधिकतम 14 साल की कैद या मौत की सजा की मांग करेगा।
साइफर मामले में विशेष अभियोजक रिजवान अब्बासी ने शुक्रवार को द न्यूज को बताया था, कि अभियोजन पक्ष के पास विदेश मंत्रालय के तीन वरिष्ठ अधिकारियों सोहेल महमूद, फैसल तिर्मिज़ी और असद मजीद की गवाही के आधार पर पर्याप्त सबूत हैं, जिसके अनुसार इमरान खान और शाह महमूद. क़ुरैशी को अधिकतम मौत की सज़ा दी जा सकती है।
उन्होंने स्पष्ट किया, कि इन अधिकारियों की गवाही से पता चलता है, कि साइफर मामले के कारण पाकिस्तान-अमेरिका संबंध प्रभावित हुए हैं और पाकिस्तान के हितों के खिलाफ काम किए गये हैं, इससे पाकिस्तान के दुश्मन देशों को फायदा हुआ है।
हालांकि, इमरान खान और शाह महमूद कुरैशी को जमानत पर रिहा करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद साइफर मामले में इमरान खान के वकील सफा सलमान सफदर ने कहा, कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कारण साइफर मामले का गुब्बारा उड़ गया है और हवा निकल गई है। उन्होंने कहा, कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अभियोजन पक्ष के लिए ट्रायल कोर्ट में केस साबित करना मुश्किल हो जाएगा।
साइफर केस क्या है?
साइफर मामला एक राजनयिक दस्तावेज़ से संबंधित है जो कथित तौर पर इमरान के पास से गायब हो गया था। पीटीआई का आरोप है, कि इसमें अमेरिका की ओर से इमरान को सत्ता से बाहर करने की धमकी दी गई थी।
इसी मामले में पीटीआई के उपाध्यक्ष और पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद कुरेशी के खिलाफ भी कार्यवाही चल रही है और इमरान खान के साथ साथ कुरैशी को भी आरोपी ठहराया गया है।
पीएम पद पर रहने के दौरान इमरान खान ने अमेरिका में पाकिस्तानी राजदूत मजीद से अमेरिकियों के बीच पाकिस्तान को लेकर क्या सोच है, इस बारे में जानकारी मांगी थी। इसके जवाब में मजीद ने साइफर लिखा था।
इसमें अमेरिकी विदेश विभाग के अधिकारी डॉनल्ड लू और अमेरिका में तब के पाकिस्तानी राजदूत असद मजीद के बीच की बातचीत का संक्षिप्त विवरण था। इस साइफर में कुछ बाते लिखी थीं जिसका अनुवाद मीडिया में भी आया था। इसके मुताबिक-
- यूक्रेन मसले पर पाकिस्तान की नीति से अमेरिका में बहुत नाराजगी है।
- व्हाइट हाउस को लगता है कि इमरान सरकार के रहते पाकिस्तान से रिश्ते बेहतर नहीं हो सकते।
-अगर इमरान खान को अविश्वास मत में हरा दिया जाए तो अमेरिका पाकिस्तान की इन गलतियों को माफ कर देगा वरना आगे का समय बहुत कठिनाई भरा होगा।
- IMF भी पाकिस्तान सरकार से खुश नहीं था। वो इस बात से भी नाराज थे कि पिछली सरकार के साथ जो डील हुई थी उसे लागू नहीं किया गया।
इसके बाद अपनी सरकार गिरने से ठीक पहले इमरान खान ने मार्च 2022 में पाकिस्तान के फैजाबाद की रैली में एक पर्ची निकाल कर दावा किया था, कि उनको ये साइफर मिला है, जिसमें उनकी सरकार को गिराने की कोशिश के पीछे अमेरिकी साजिश का पता चलता है।
इसके बाद अप्रैल में सरकार गिरने के बाद भी इमरान खान ने इस साइफर को अपनी हर सभा में बहुत तूल दिया और जमकर अमेरिका के खिलाफ बयान दिए।
लिहाजा, इमरान खान द्वारा साइफर को सार्वजनिक करना आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत अपराध माना गया और इस मामले में मुकद्दमा दर्ज किया गया। इमरान खान के प्रिंसिपल सेक्रेटरी रहे आजम खान सरकारी गवाह बन गये और उन्हीं की गवाही के आधार पर इमरान खान को आरोपी ठहराया गया है।












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