खालिस्तानी समर्थक जगमीत सिंह (Jagmeet Singh) की कनाडा चुनाव में बुरी हार, राजनीतिक भविष्य पर भी संकट!
भारत के लिए सिरदर्द बने प्रो खालिस्तानी नेता (Pro Khalistani Leader) और कनाडा की न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी (NDP) का बड़ा चेहरा माने जाने वाले जगमीत सिंह (Jagmeet Singh) को एक बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी (Mark Carney) के नेतृत्व वाली लिबरल पार्टी (Liberal Party)ने हाल ही में हुए फेडेरल इलेक्शन में अप्रत्याशित रूप से पार्टी सत्ता बरकरार रखी है, लेकिन जगमीत सिंह अपनी सीट हार गए हैं। यह चुनावी नतीजे कनाडा और भारत के बीच बढ़ते तनाव के बीच आया है, पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो (Justin Trudeau) द्वारा हरदीप सिंह निज्जर (Hardeep Singh Nijjar) की हत्या में भारत का हाथ होने का आरोप लगा था। लेकिन ट्रूडो की ये चाल भी उनकी और जगमीत की साख ना बचा सकी। ट्रूडो को पहले ही सत्ता से हाथ धोना पड़ा जबकि जगमीत चुनावी राजनीति में गर्त में जा पहुंचे।
जगमीत ने खराब किए कनाडा-भारत के रिश्ते!
कनाडा की राजधानी ओटावा और नई दिल्ली के बीच कूटनीतिक तनाव जगमीत सिंह के खालिस्तानी चरमपंथियों के समर्थन और भारत की आलोचना के कारण और बढ़ गया है। जगमीत को लग रहा था कि खालिस्तान का मुद्दा उनके पक्ष में काम करेगा लेकिन जगमीत की ये चाल उन्हीं पर भारी पड़ गई और उनकी मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर नकारात्मक असर डाला। ट्रूडो की लिबरल पार्टी के साथ गठबंधन सहयोगी रहे सिंह ने आठ साल तक एनडीपी का नेतृत्व करने के बाद अपने इस्तीफे की घोषणा की, जो कि ट्रूडो के इस्तीफे की बड़ी वजह बना।

अपनी सीट और इज्जत दोनों ना बचा सके जगमीत
जगमीत सिंह ने हाउस ऑफ कॉमन्स में अपनी सीट खो दी, जिस पर वे 2019 से काबिज थे। उनका निर्वाचन क्षेत्र, ब्रिटिश कोलंबिया में बर्नबी सेंट्रल था जो कि इस चुनाव से पहले चुनावी री-डिस्ट्रीब्यूशन से प्रभावित था। एनडीपी संसद में अपनी आधिकारिक स्थिति बनाए रखने के लिए आवश्यक 12 सीटें हासिल करने में भी विफल रही। इसके साथ ही उनके पार्टी प्रमुख रहते हुए पार्टी का नेशनल स्टेटस (राष्ट्रीय दर्जा) भी छिन गया। आसान भाषा में कहें तो ना तो जगमीत अपनी सीट बचा सके और ना ही इज्जत।
सोशल मीडिया पर क्या बोले जगमीत सिंह?
अपनी हार के बाद एक्स पर एक पोस्ट में सिंह ने एनडीपी का नेतृत्व करने और बर्नबी सेंट्रल का प्रतिनिधित्व करने के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने प्रधानमंत्री कार्नी और अन्य नेताओं को उनके अभियान के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा, "मुझे निराशा है कि हम और सीटें नहीं जीत सके," लेकिन पार्टी के भविष्य के लिए मुझे बहुत उम्मीदें हैं'।
भारत के खिलाफ रहा जगमीत का रुख
सिंह खालिस्तान के मुखर समर्थक रहे हैं और उन्होंने कनाडा के खालिस्तानी कार्यकर्ताओं का समर्थन किया है। उन्होंने भारतीय राजनयिकों को बर्खास्त करने के कनाडा सरकार के फैसले का समर्थन किया और भारत के खिलाफ तमाम कड़े प्रतिबंधों की मांग की। सिंह ने कनाडा से अपनी सीमाओं के भीतर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) नेटवर्क पर भी प्रतिबंध लगाने को कहा था।
निज्जर की हत्या के भारत पर लगाए थे आरोप
जगमीत ने खुले तौर पर आरोप लगाए थे कि कनाडा के पास निज्जर की हत्या में भारतीय अधिकारियों के शामिल होने के उनके पास सबूत हैं। हालांकि ना तो उनके पास सबूत थे और ना ही वे उन्हें पेश कर सके। उन्होंने निज्जर की हत्या को लेकर दावा किया था कि, "कनाडा के पास सबूत हैं कि कनाडा की धरती पर कनाडा के नागरिक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में नरेंद्र मोदी सरकार शामिल थी।" हालांकि उनका ये दावा बाद में खोखला निकला।
कनाडा और भारत के बीच बढ़ाई टेंशन
कनाडा और भारत के बीच टेंशन तब बढ़ गई जब ट्रूडो ने जून 2023 में एक सिख मंदिर के बाहर निज्जर की हत्या में भारत का हाथ होने का आरोप लगाया था। भारत की NIA ने 2020 में निज्जर को आतंकवादी करार दिया था। इन आरोपों के बावजूद भारत ने लगातार किसी भी तरह से निज्जर की हत्या में शामिल होने के आरोपों का खुलकर खंडन किया था।
कनाडाई मीडिया की मानें तो, लिबरल पार्टी की जीत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की विलय की धमकियों और ट्रेड वॉर का असर है। लिबरल पार्टी पिछले चार सालों से सत्ता में बने रहने के लिए न्यू डेमोक्रेट्स पार्टी के समर्थन पर निर्भर थी।
फिलहाल यह चुनाव परिणाम जगमीत सिंह के राजनीतिक करियर के लिए एक बड़ा झटका है क्योंकि वे आठ साल तक एनडीपी की कमान संभालने के बाद नेतृत्व से हटाए जा रहे हैं। इस झटके के बावजूद उनका खालिस्तान प्रेम अभी भी बना हुआ है।
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