हिन्दुत्व से बैर! बाइडेन ने चुनाव में निकाला काम, जीते तो RSS-BJP के करीबी डेमोक्रेट्स को नहीं दी टीम में जगह
अमेरिका के नये राष्ट्रपति जो बाइडेन ने अपनी टीम में 20 अमेरिकन भारतीयों को उच्च पदों पर जगह दी है। लेकिन अपनी टीम में RSS-BJP से संबंध रखने वाले डेमोक्रेट्स को टीम में शामिल नहीं किया गया है।
Biden excludes Democrats with BJP-RSS link: अमेरिका के नये राष्ट्रपति जो बाइडेन(Joe Biden) ने अपनी टीम में 20 अमेरिकन भारतीयों को उच्च पदों पर जगह दी है। जिनमें 12 महिलाएं शामिल हैं। बाइडेन की इस टीम में दुनियाभर की हर विचारधारा और अलग अलग कम्यूनिटी के लोग शामिल हैं, लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि राष्ट्रपति जो बाइडेन ने अपनी टीम से उन डेमोक्रेट्स नेताओं को पूरी तरह से अलग रखा है, जिनका RSS या BJP से कोई लिंक है। जो बाइडेन ने अपनी टीम में RSS की विचारधारा से ताल्लुक रखने वाले उन डेमोक्रेट्स को भी जगह नहीं दी है, जिन्होंने राष्ट्रपति चुनाव में जो बाइडेन के लिए काफी ज्यादा प्रचार-प्रसार किया है। माना जा रहा है कि चुनाव प्रचार में RSS-BJP से संबंध रखने वाले डेमोक्रेट्स से प्रचार तो करवा लिया गया लेकिन जब पद देने की बारी आई तो सेक्युलर टीम बनाने का हवाला देकर इन नेताओं को टीम में शामिल नहीं किया गया।

बाइडेन की टीम में RSS विचारधारा वाले नहीं
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने अपनी टीम में जिन अमेरिकन-भारतीयों को जगह दी है उनमें हर तबके के लोग शामिल हैं। उनके विचारधारा और उनकी सोच भी अलग है लेकिन सिर्फ उन्हीं नेताओं को टीम से अलग रखा गया है जिनका RSS-BJP से कोई संबंध है। द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, सोनल शाह और अमित जानी भी राष्ट्रपति की एडमिनिस्ट्रेशन टीम में जगह नहीं बना पाए। बताया गया है कि इन दोनों का RSS से खास संबंध है। सोनल शाह और अमित जानी पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की टीम में शामिल थे।
हिंदुत्व विचारधारा का विरोध!
डेमोक्रेट नेता सोनल शाह के पिता बाइडेन की यूनिटी टास्क फोर्स में काम कर चुके थे। साथ ही वो ओवरसीज फ्राइंड ऑफ BJP-USA के अध्यक्ष और RSS द्वारा संचालित एकल विद्यालय के संस्थापक सदस्य भी थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि सोनल शाह के पिता एकल विद्यालय के लिए फंड जमा करने का भी काम करते थे। वहीं अमित जानी को टीम में शामिल नहीं करने के पीछे भी उनका RSS-BJP से लिंक बताया गया है। वहीं, रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि कुछ ऐसे अमेरिकी-भारतीय नेताओं ने बाइडेन की ट्रांजिशन टीम पर दवाब बनाया जो हिंदुत्व विचारधारा का घोर विरोध करते हैं।
सेक्युलर इंडियन-अमेरिकन्स ने किया विरोध
रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका में रहने वाले सेक्युलर इंडियन अमेरिकन्स ने जो बाइडेन पर RSS-BJP से ताल्लुकात रखने वाले नेताओं से दूरी बनाने के लिए दवाब डाला था। सेक्युलर इंडियन अमेरिकन्स ने बाइडेन की ट्रांजिशन टीम पर दवाब डालते हुए कहा था कि इन नेताओं को बाइडेन की एडमिनिस्ट्रेशन टीम से पूरी तरह अलग-थलग कर दिया जाए। जिसके बाद राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भी RSS-BJP से संबंध रखने वाले नेताओं से दूरी बना ली थी। कुछ नेताओं ने बाइ़डेन की टीम में शामिल होने वाले नेताओं में सेक्युलर विचारधारा होना जरूरी बताया है।
RSS-BJP से संबंध रखने वाले कई नेता चुनाव हारे
बताया जा रहा है कि सेक्युलर इंडियन अमेरिकन्स के दवाब के अलावा भी जो बाइडेन की ट्रांजिशन टीम और जो बाइडेन की टीम चुनाव में RSS-BJP से संबंध रखने वाले नेताओं की हार के बाद पूरी तरह से चौकन्ना हो गई थी। और बाइडेन की टीम चुनते वक्त ऐसे नेताओं के आने से पार्टी को नुकसान होने का अंदेशा कुछ नेताओं ने जताया था, जिसके बाद बाइडेन की टीम का सावधानीपूर्वक चयन किया गया।
अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में भारतीय मूल के नेता और RSS से संबंध रखने वाले श्रीनिवास राव प्रेस्टन कुलकर्णी इस बार चुनाव हार गये। रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्हें हराने के पीछे भारतीय-अमेरिकी संगठन ही शामिल हैं। वहीं, RSS-BJP से संबंध रखने की वजह से मशहूर नेता तुलसी गबार्ड ने भी अपनी राजनीतिक जमीन खो दी है।
कश्मीर से संबंध रखने वाले दो भारतीयों को जगह
बाइडेन की टीम में 20 भारतीय-अमेरिकन्स को शामिल किया गया है, जिनमें दो कश्मीरी मूल के डेमोक्रेट भी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपतियों की टीम में पहली बार दो कश्मीरियों को शामिल किया गया है। आईशा शाह और समीरा फाजिली को बाइडेन की टीम में बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। आईशा शाह को जहां व्हाइट हाउस ऑफिस ऑफ डिजिटल स्ट्रेटजी का पार्टनरशिप मैनेजर बनाया गया है वहीं समीरा फाजिली को यूएस नेशनल इकोनॉमिल काउंसिल (NEC) का डिप्टी डायरेक्टर बनाया गया है। नेशनल इकोनॉमिल काउंसिल (NEC) में एक और भारतीय भारत राममूर्ति को भी डिप्टी डायरेक्टर के तौर पर शामिल किया गया है।
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