इस्तांबुल की एक खास परंपरा को अपनी पीठ पर ढोते कुली

Provided by Deutsche Welle

अंकारा, 12 नवंबर। इस्तांबुल के ग्रैंड बाजार से कुछ ही दूरी पर एक अंधेरी गली में कुली बेराम यदल्डिज अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं. वह अपने शरीर के वजन के लगभग दोगुने वजन का एक बस्ता अपनी पीठ पर ढोकर ले जाएंगे. उनके साथ कुछ अन्य मजदूर भी हैं जो एक लॉरी से कपड़ों के बंडल उठा रहे हैं जिसे वे सूरज निकलने से पहले स्थानीय दुकानों तक पहुंचाएंगे. इस्तांबुल में इस तरह से माल ढुलाई की परंपरा सदियों पुरानी है.

यदल्डिज कहते हैं, "मैं आधा हरक्यूलिस और आधा रैंबो हूं." उनका दावा है कि वह अपनी पीठ पर 200 किलो तक का भार ढो सकते हैं.

इस्तांबुल की प्राचीन व्यापार संस्कृति

दो महाद्वीपों (एशिया और यूरोप) के बीच स्थित यह दुनिया का एकमात्र शहर है जहां सदियों से राजनीतिक, वाणिज्यिक और पर्यटक विशिष्टता और अद्वितीय आकर्षण है. आधुनिक तुर्की में सबसे विकसित शहरों में से एक होने के बावजूद, यह क्षेत्र और इसकी संस्कृति अभी भी तुर्क काल का प्रतिबिंब है.

बेराम यदल्डिज उन सैकड़ों पुरुषों में से एक हैं जो तुर्की की वाणिज्यिक राजधानी इस्तांबुल के प्राचीन मध्य क्षेत्र में भोर से पहले इकट्ठा होना शुरू करते हैं. अपनी पीठ पर कपड़ों के भारी बंडलों को ढोते और बोझिल कदमों पर चलते हुए अपने भाग्य के बारे में बड़बड़ाते और खुद से बात करते हुए दिखाई देते हैं. यदल्डिज के सहयोगियों में से एक उस्मान ने कहा, "यह सबसे खराब काम है, लेकिन करने के लिए और कुछ नहीं है." उस्मान पिछले 35 साल से मजदूरी का काम कर रहे हैं.

भोर में माल ढोते कुली

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

शहरी इतिहास के एक तुर्की इतिहासकार नजदत साकालू के मुताबिक इस्तांबुल में यह परंपरा वास्तव में अठारहवीं शताब्दी की है. उस समय सुल्तान महमूद द्वितीय इस क्षेत्र का शासक था और यह क्षेत्र आज भी कांस्टेंटिनोपल के नाम से जाना जाता है. तुर्की में कुली को हमाल कहा जाता है. उस समय अधिकांश कुली मूल अर्मेनियाई थे और शहर के जीवंत सांस्कृतिक इतिहास को दर्शाते थे.

आज अधिकांश काम कुर्दों के पास है. वे दक्षिण-पूर्व में मालट्या और एडियमन के जातीय रूप से विविध प्रांतों से संबंधित हैं. इन क्षेत्रों के कई परिवारों ने पीढ़ियों से इस्तांबुल के व्यापारियों के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए हैं. इतिहासकार नजदत कहते हैं, "मोबाइल फोन के जमाने से पहले, इन कुलियों में व्यापार मालिकों के साथ सीधे संबंध स्थापित करने और उनका विश्वास हासिल करने की क्षमता थी. इसकी संरचना, व्यापार और टाइपोग्राफी के कारण शहर कुलियों के बिना काम नहीं कर सकता."

कुली आमतौर पर एक कप्तान के नेतृत्व में दस्ते के रूप में काम करते हैं जो व्यापारियों के साथ उनके काम का समन्वय करने और उनकी पाली के अंत में उन्हें मजदूरी का भुगतान करने के लिए जिम्मेदार होते हैं. यदल्डिज का कहना है कि वह एक दिन में 200 से 300 लीरा (20 से 30 डॉलर) के बीच कमाते हैं. अगर एक दिन उनके लिए अच्छा साबित होता है तो वह और भी ज्यादा कमा लेते हैं.

कुली के काम के लिए सख्त आचार संहिता की आवश्यकता होती है. उदाहरण के लिए प्रत्येक टुकड़ी एक विशिष्ट छोटे क्षेत्र को नियंत्रित करती है और दूसरे के क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर सकती है. 49 साल के मुहम्मद तुक्तस सड़क के उलटी दिशा की ओर इशारा करते हुए कहते हैं, "अगर मैं वहां जाने की कोशिश करता हूं, तो वे मुझे नहीं जाने देंगे. वह उनका क्षेत्र है."

लगभग 30 वर्षों से तुक्तस उसी सात मंजिला इमारत की सीढ़ियों से ऊपर-नीचे भार ढो रहे हैं. इस मेहनत ने उन्हें शारीरिक रूप से पहलवान जैसा बना दिया है. माल का वजन तो बढ़ रहा है लेकिन कमाई घट रही है.

सात मंजिला इमारत में सौ से अधिक व्यापारी तुक्तस जैसे मजदूरों पर निर्भर हैं, जो व्यापार के अंतिम बचे लोगों में से एक हैं. इस क्षेत्र में पहिएदार ठेले बेकार हैं. ऐसे कुली संकीर्ण गलियारों में और बिना लिफ्ट वाली इमारतों में ज्यादा काम आते हैं. तुक्तस खुद को इस मरते हुए प्राचीन व्यापार के अंतिम जीवित निशानों में से एक के रूप में देखते हैं.

एए/सीके (एएफपी)

Source: DW

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