PM Modi US Visit: अमेरिका के राजकीय मेहमान बनेंगे PM मोदी, जानें अमेरिका से 5 चीजें क्या चाहता है भारत?
PM Modi US Visit: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अगले हफ्ते अमेरिका की पहली राजकीय यात्रा करने वाले हैं और विदेशी नेताओं की अमेरिका की यात्रा, कई तरह की होती हैं, जैसे निजी दौरा, काम के लिए दौरा, आधिकारिक कामकाज का दौरा, आधिकारिक दौरे और राजकीय दौरे... और इन सभी दौरों में राजनयिक प्रोटोकॉल अलग अलग होते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी का इस बार का अमेरिका दौरा राजकीय दौरा है, जिसका मतलब उन्हें अमेरिका का सर्वोच्च सम्मान मिल रहा है, जहां पीएम मोदी को 21 तोपों की सलामी दी जाएगी। इसके अलावा पीएम मोदी अमेरिकी संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करेंगे, जो दूसरा अमेरिकी सर्वोच्च सम्मान होगा। भारत और अमेरिका के बीच 75 वर्षों के राजनयिक संबंधों में, पीएम मोदी से पहले सिर्फ दो भारतीय नेताओं ने अमेरिका का राजकीय दौरा किया है, साल 1963 में राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन और 2009 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने।

भारत और अमेरिका, पिछले कुछ सालों में काफी करीब आ गये हैं और इस बार जो पीएम मोदी की अमेरिका की आधिकारिक यात्रा हो रही हैं, इसमें जो कुछ घोषणाएं होंगी, वो जियो-पॉलिटिक्स को बदलने वाली होंगी। ऐसे में आइये जानने की कोशिश करते हैं, कि पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान, भारत अमेरिका से 5 चीजें क्या चाहता है?
1. कांग्रेस का संयुक्त प्रस्ताव पारित करे
हाउस स्पीकर केविन मैक्कार्थी ने मोदी को कांग्रेस के संयुक्त सत्र को संबोधित करने का दुर्लभ निमंत्रण दिया है। PM मोदी इससे पहले भी एक बार 2018 में अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित कर चुके हैं।
लिहाजा, इस बार भारत चाहेगा, कि अमेरिकी संसद भारत को लेकर एक संयुक्त प्रस्ताव पारित करे, जिसमें इस बात की पुष्टि की जाए, कि
(a) भारत-यू.एस. संबंध 21वीं सदी की निर्णायक साझेदारी बने हुए हैं
(b) हालांकि ये अमेरिका के हित से जुड़ा है, फिर भी हिंद महासागर में संपूर्ण सुरक्षा के लिए अमेरिका, भारत की सैन्य और आर्थिक क्षमताओं को बढ़ाने के लिए टेक्नोलॉजी की मदद देगा।
(c) सैन्य प्लेटफार्मों के सह-विकास और सह-उत्पादन सहित रक्षा संबंधों को अगले स्तर तक ले जाने के लिए द्विदलीय समर्थन मिले।
(d) QUAD को अमेरिकी संसद भी इंडो-पैसिफिक के लिए एक महत्वपूर्ण घटक के तौर पर स्वीकार करे।
2- रक्षा सहयोग में भारत में हथियारों का निर्माण
बाइडेन प्रशासन को भारत में फाइटर जेट इंजन बनाने के लिए नए समझौते को मंजूरी देनी चाहिए। भारत अपने तेजस लड़ाकू विमान को शक्ति प्रदान करने के लिए लगभग 100 अमेरिकी-निर्मित F414 जेट इंजन खरीद रहा है, और बाइडेन प्रशासन इस समझौते की समीक्षा कर रहा है, जिससे भारत में घरेलू स्तर पर अधिक इंजनों का उत्पादन करने की अनुमति मिलेगी।
भारत चाहता है, कि उसे टेक्नोलॉजी के साथ जेट इंजन बनाने की मंजूरी मिले। अमेरिका, भारत के सामने रूस के विकल्प के तौर पर प्रस्तुत करने की कोशिश कर रहा है और अगर ऐसा है, तो अमेरिका, भारत को एडवांस रक्षा हार्डवेयर की सप्लाई में आनाकानी ना करे, क्योंकि रूस ने हमेशा से अपना नया हार्डवेयर भारत को सौंपा है।
वहीं, MQ-9 Sea Guardian ड्रोन पर भारत और अमेरिका की बात बन गई है और अमेरिका, भारत को यह खतरनाक ड्रोन बेचने के लिए तैयार हो गया है। वहीं, दोनों पक्ष M777 हॉवित्जर आर्टिलरी के एक नए एक्सटेंडेड-रेंज वेरिएंट के को-प्रोडक्शन को लेकर बातचीत कर रहे हैं।
भारत पहले ही 145 हॉवित्जर खरीद चुका है और टाइटेनियम कास्टिंग सहित इसके कुछ पुर्जे पहले ही भारत में उत्पादित किए जा चुके हैं, लेकिन अब भारत इसका पूर्ण उत्पादन भारत में ही चाहता है।
3- ट्रेड डील को फिर टेबल पर लाए बाइडेन प्रशासन
भारत और अमेरिका के बीच के संबंध ने ट्रम्प प्रशासन के तहत मजबूत वृद्धि देखी, लेकिन अफसोस की बात ये रही, कि दोनों पक्ष सालों की बातचीत के बावजूद, एक नए व्यापार और निवेश समझौते पर पहुंचने में नाकाम रहे हैं। जबकि, द्विपक्षीय व्यापार में लगातार इजाफा हुआ है।
लिहाजा, भारत चाहेगा, कि बाइडेन प्रशासन ट्रेड डील को फिर से टेबल पर वापस लाए और इसमें, दोनों पक्षों को डेटा स्थानीयकरण और ई-कॉमर्स, बाज़ार पहुंच और सरकारी सब्सिडी पर बातचीत में कुछ प्रगति दर्ज करने की आवश्यकता है।
इसके अलावा, बहुपक्षीय व्यापार समझौतों- ट्रांस-पैसिफिक पार्टनरशिप (टीपीपी) और क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (आरसीईपी) के साथ विशाल इंडो-पैसिफिक अर्थव्यवस्थाओं के संचालन के लिए । भारत और अमेरिका को अपना रास्ता संयुक्त तौर पर बनाना चाहिए।
आज तक, बाइडेन प्रशासन ने इस तरह के सौदे को आगे बढ़ाने में बहुत कम दिलचस्पी दिखाई है, इसके बजाय अमेरिका, भारत को अपने नए लेकिन अभी भी अनाकार इंडो-पैसिफिक इकोनॉमिक फ्रेमवर्क (IPEF) में शामिल करने के लिए काम कर रहा है।
4- क्रिटिकल सप्लाई चेन कॉपरेशन
भारत और अमेरिका ने आपूर्ति श्रृंखलाओं पर बातचीक को गति देना शुरू कर दिया है, जिसमें द्विपक्षीय रास्ते, क्वाड और आईपीईएफ शामिल हैं।
IPEF के 14 देश कथित तौर पर मई 2023 में आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन में सुधार पर एक अस्थायी समझौते पर पहुंचे हैं। ये साझेदारी, आपूर्ति श्रृंखला की कमी के दौरान पारस्परिक समर्थन पर ध्यान केंद्रित करेगी, जैसे कि COVID-19 के दौरान देखी गई।
इसमें व्यापार प्रतिबंधों को कम करने और आपूर्ति श्रृंखला विविधीकरण में निवेश और रिसर्च का विस्तार करने के अस्पष्ट वादे भी शामिल हैं। ये कार्यक्रम चीन को काउंटर करने के लिहाज से सबसे ज्यादा जरूरी है, क्योंकि ये सीधे तौर पर चीन की इकोनॉमी पर चोट करती है। बड़ी कंपनियों ने चीन से बाहर निकलना शुरू कर दिया है, लिहाजा भारत चाहेगा, कि चीन से बाहर निकलने वाली कंपनियां भारत को अपना घर बनाए और अमेरिका को इसमें भारत की पूरी मदद करनी चाहिए।
5. चीन सीमा विवाद पर भारत क्या चाहता है?
भारत क्वाड का इकलौता सदस्य है, जिसका चीन के साथ तनावपूर्ण सीमा विवाद है और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारत को चीनी सेना की आक्रामकता का सामना करना पड़ रहा है।
लिहाजा, संयुक्त राज्य अमेरिका को भारतीय संप्रभुता के लिए अपने समर्थन की फिर से पुष्टि करनी चाहिए, सीमा पर यथास्थिति को बदलने के चीनी प्रयासों की निंदा करनी चाहिए, और यह दोहराना चाहिए, कि यह अमेरिका के हित में है, कि वह भारत को एक आधुनिक सैन्य शक्ति विकसित करने में मदद करे।
अमेरिका को यह भी पुष्टि करनी चाहिए, कि वह अरुणाचल प्रदेश को मान्यता देता है, जिस पर चीन लगभग 50,000 वर्ग मील का दावा करता है और अमेरिका को यह स्पष्ट करना चाहिए, कि अरुणाचल में किसी भी चीनी अतिक्रमण की स्थिति में किसी भी हाल में अरूणाचल प्रदेश को विवादित क्षेत्र नहीं माना जाएगा और वो भारत का ही हिस्सा माना जाएगा।
चीन अरूणाचल प्रदेश को विवादित बनाना चाहता है, ताकि भारत का दावा अरूणाचल प्रदेश कर कमजोर पड़े। हालांकि, पिछले दिनों भी अमेरिका की तरफ से बयान आया था, जिसमें उसने अरूणाचल प्रदेश को भारत का हिस्सा बताया था, लेकिन भारत चाहेगा, कि अमेरिका फिर से सार्वजनित तौर पर इसकी पुष्टि करे।












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