मिस्र यात्रा के दौरान अल-हकीम मस्जिद का दौरा करेंगे PM मोदी, शहीद भारतीय सैनिकों को देंगे श्रद्धांजलि
पीएम मोदी 1997 के बाद मिस्र जाने वाले वह पहले भारतीय प्रधानमंत्री होंगे। अपनी मिस्र यात्रा के दौरान पीएम मोदी पहले विश्व युद्ध में शहीद हुए भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि देंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका में कार्यक्रमों की समाप्ति के बाद मिस्र दौरे पर जाएंगे। यह दौरा 24-25 जून को होगा। पीएम मोदी अपनी पहली मिस्र यात्रा के दौरान ओल्ड काहिरा में ऐतिहासिक अल-हकीम मस्जिद का दौरा करेंगे।
पीएम मोदी 1997 के बाद मिस्र जाने वाले वह पहले भारतीय प्रधानमंत्री होंगे। अपनी मिस्र यात्रा के दौरान पीएम मोदी पहले विश्व युद्ध में शहीद हुए भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि देंगे।

2015 में अबू धाबी में शेख जायद ग्रैंड मस्जिद और 2018 में इंडोनेशिया की भव्य इस्तिकलाल मस्जिद के बाद ये अल-हकीम ऐसी तीसरी प्रसिद्ध मस्जिद है जहां पीएम मोदी जाएंगे। अल-हकीम मस्जिद का निर्माण 990 ईस्वी में फातिमिद खलीफाओं के दौर में अल-अदजीज बी-अल्लाह ने शुरू किया था।
अल-हकीम मस्जिद के निर्माण में 23 साल लगे। 1013 ईसवी में अल-हकीम का निर्माण कार्य पूरा हुआ। इसे दाऊदी बोहरा समुदाय की मदद से 1980 में पुननिर्माण कराया गया था। अल-हकीम मिस्र का आकार त्रिभुज है जिसमें चार आर्केड्स हैं। मस्जिद के फ्रंट में दो मीनारें हैं।
पीएम मोदी अल-हकीम मस्जिद की यात्रा के बाद हेलियोपोलिस युद्ध स्थल का दौरा करेंगे। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान मिस्र के लिए लड़ते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए प्रधानमंत्री मोदी उनकी कब्रगाह पर भी जाऐंगे।
आपको बता दें कि जनवरी में मिस्र के राष्ट्रपति ने भारत की यात्रा की थी। मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल सीसी गणतंत्र दिवस पर को मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। मिस्र के राष्ट्रपति की यात्रा के बाद से पिछले कई महीनों में, भारत ने मिस्र के साथ मंत्री स्तर के राजनीतिक वार्ता किए हैं।भारत के विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री और पर्यावरण मंत्री ने भी मिस्र की यात्रा की है। इसी तरह मिस्र सरकार के कम से कम तीन से चार मंत्री भी भारत आ चुके हैं।
आपको बता दें कि अल-हकीम मस्जिद का पुननिर्माण कराने वाले दाऊदी बोहरा समुदाय के साथ पीएम मोदी का बेहतर संबंध है। पीएम मोदी कई बार दाऊदी बोहरा समुदाय के कार्यक्रमों में शामिल हो चुके हैं। बोहरा समुदाय 11वीं शताब्दी में उत्तरी मिस्र से भारत पहुंचा था। दाऊदी बोहरा समुदाय पढ़े-लिखे, संपन्न और बिजनेस करने वाले माने जाते हैं।












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