पीएम मोदी के दौरे से भारत से ज्यादा इजरायल खुश, जानिए इसकी वजह?

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तेल अवीव। भारत के पीएम नरेंद्र मोदी इस वक्त इजरायल की ऐतिहासिक यात्रा पर हैं, पूरे विश्व कि निगाहें इस दौरे पर लगी है। मोदी का जिस तरह से इजरायल में स्वागत हुआ है, उसने ये जता दिया है कि केवल भारत ही नहीं बल्कि इजरायल भी इस दौरे का बेसब्री से इंतजार कर रहा था लेकिन आपके दिमाग में भी ये बात घूम रही होगी ना कि आखिर इजरायल इतना खुश क्यों हैं, मोदी के वहां जाने से।

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 ज्यादा लाभ

ज्यादा लाभ

दरअसल इजरायल में पीएम मोदी के स्वागत में जो गर्मजोशी दिखाई जा रही है उसका कारण ये है कि इस यात्रा से इजरायल को भारत के मुकाबले कहीं ज्यादा लाभ होगा।

क्या है वो लाभ?

क्या है वो लाभ?

  • भारत 48 फीसदी हथियार इजरायल से खरीदता है, मोदी के दौरे के बाद इन हथियारों को खरीदना का ग्राफ बढ़ेगा क्योंकि सुरक्षा को लेकर नए समझौते होंगे।
  • भारत अभी 70 से 100 अरब रुपये के करीब सैन्य उत्पाद इजरायल से आयात कर रहा है, जो अगले पांच साल में 150 अरब रुपये तक पहुंच सकता है।
  • इजरायल की कंपनियों के लिए भारत में निवेश के बेहतर मौके बनेंगे।

दोनों देशों के नेता गर्मजोशी से गले मिले

दोनों देशों के नेता गर्मजोशी से गले मिले

गौरतलब है कि इजरायल का दौरा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री के तौर पर मंगलवार को तेल अवीव पहुंचे नरेंद्र मोदी का भव्य स्वागत किया गया और खुद हवाईअड्डे पर मोदी की अगवानी के लिए पहुंचे इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हिंदी में मोदी का अभिवादन किया।

नरेंद्र मोदी को दुनिया का एक महान नेता कहा

नरेंद्र मोदी को दुनिया का एक महान नेता कहा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दुनिया का एक महान नेता करार देते हुए इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मंगलवार को कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध गणितीय फॉर्मूले के हिसाब से उत्तम है।

क्षेत्रों में सहयोग के लिए...

क्षेत्रों में सहयोग के लिए...

नेतन्याहू ने इस अवसर पर दोनों देशों के बीच प्रौद्योगिकी, जल, कृषि, ऊर्जा सहित कई अन्य क्षेत्रों में सहयोग के लिए एक नवाचार कोष की स्थापना की घोषणा की।

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English summary
Despite Modi’s admiration for Israel’s achievements, the structural differences between Indian and Israeli national security situations, their worldviews and the absence of explicitly shared enemies limit stronger strategic rapprochement.
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