प्रधानमंत्री मोदी ने 27000 विस्थापितों को सौंपा सपनों का आशियाना
जाफना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2001 के भूकंप में मारे गये लोगों के परिजनों को 27000 घर सौंपे। पीएम ने इस मौके पर कहा कि सुनामी से प्रभावित लोगों के लिए यह परिकल्पना गुजरात मे शुरू की गई थी और जब श्रीलंका में सुनामी आई तब श्रीलंका का उच्च स्तरीय प्रतिनिधि मंडल गुजरात आया था उसके बाद ही यह योजना शुरु की गयी। उन्होंने कहा कि यह घर लोगों के सपनों को एक बार फिर नयी उड़ान देंगे।

पीएम ने कहा कि श्रीलंका का प्रतिनिधि मंडल इस बात का अध्ययन करना चाहते थे कि कैसे पुनर्निर्माण किया जाए और इसके लिए जब वे गुजरात आए तब उन्होंने इस मालिक परिचालित परियोजना को देखा। वे बहुत उत्साहित थे और मैं खुश हूं कि आज यहां पर यह मालिक परिचालित पुनर्निर्माण परियोजना कार्यान्वित की गई है।
50 हजार परिवार का भाग्य बदल जाएगा
पीएम ने कहा कि इस प्रोजेक्ट के तहत 27,000 घर बनाने की योजना है, 27,000 परिवार बसाने की योजना है। मतलब ये हुआ उस परिवार के जो छोटे-छोटे बच्चे हैं, ऐसे 27,000 परिवार के 50 हजार से ज्यादा बच्चों का भाग्य बनाने का ये एक प्रयास है।
ईट-पत्थरों के मकान नहीं हैं ये
ये घर, सिर्फ ईंट और पत्थर से बनी हुई दीवारें नहीं है। ये घर किसी कारीगर की बनाई हुई कोई इमारत नहीं है। एक प्रकार से भारत और श्रीलंका का, श्रीलंका के दुखी परिवारों के, जाफना के दुखियारों के, उनके दुख-दर्द में शरीक होने का, उनको मदद करने का और उनके जीवन में खुशहाली लाने का एक नम्र प्रयास है।
प्रधानमंत्री ने बच्चों के अनुभव किये साझा
जिस परिवार का, जिस मकान का, आज लोकार्पण की पूजा हो रही थी। मैंने उस बच्ची की पूछा, बेटी कैसा लगता है? तो अपना घर देखकर वो इतनी खुश थी। मैंने उससे पूछा कि तुम जिंदगी में क्या बनना चाहती हो? उसने जो जवाब दिया, उसमें कितनी समझदारी है और कितना दायित्व है! उस छोटी बच्ची ने मुझे कहा, "मैं टीचर बनना चाहती हूं"।
पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने तो हजारों घर बनाए हैं। हमें इसका संतोष है। लेकिन उस बच्ची के जवाब से मुझे लगता है, वो जब टीचर बनेगी, इन घरों में रहने वाली बच्चियां टीचर बनेंगी। हम तो शायद घर बना पाएंगे, लेकिन तब वो आने वाले दिनों में लाखों लोगों की जिंदगी बना पाएगी।












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