ASEAN: सांस लेने की फुर्सत नहीं, फिर भी आज इंडोनेशिया जाएंगे PM मोदी, आसियान क्यों बन गया इतना जरूरी, जानिए
ASEAN-India Summit: भारत में जी20 शिखर सम्मेलन का आयोजन हो रहा है और विदेशी नेताओं के नई दिल्ली पहुंचने का सिलसिला शुरू हो चुका है। आज नाइजीरिया के प्रधानमंत्री दिल्ली पहुंचे हैं, जबकि कल अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन आ रहे हैं, लेकिन अति व्यस्तता के बाद भी भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज इंडोनेशिया का दौरा कर रहे हैं, जहां वो आसियान-इंडिया शिखर सम्मेलन में शिरकत करेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 20वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन और 18वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (ईस्ट एशिया समिट- ईएएस) में भाग लेने के लिए इंडोनेशिया जाएंगे। पीएम मोदी बुधवार (6 सितंबर) शाम को इंडोनेशिया के लिए रवाना होंगे और अगले दिन देर शाम नई दिल्ली लौटेंगे।

पीएम मोदी का आज इंडोनेशिया दौरा
प्रधानमंत्री मोदी इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो के निमंत्रण पर जकार्ता में जा रहे हैं। जहां वो आसियान-भारत शिखर सम्मेलन और 18वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (ईएएस), दोनों में 7 सितंबर (गुरुवार) को हिस्सा लेंगे।
आसियान के वर्तमान अध्यक्ष इंडोनेशिया ने पीएम मोदी जी20 के लिए शीघ्र भारत लौट सकें, इसके लिए उन्होंने दोनों शिखर सम्मेलनों के कार्यक्रम में समायोजन किया है।
पीएम मोदी की इंडोनेशिया यात्रा इस साल भारत की अध्यक्षता में 9-10 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले जी20 शिखर सम्मेलन से ठीक पहले हो रही है।
इंडोनेशिया जी20 'ट्रोइका' का हिस्सा है, क्योंकि पिछले साल इस समूह की अध्यक्षता उसके पास थी।
भारत के लिए आसियान कितना जरूरी
आगामी आसियान-भारत शिखर सम्मेलन 2022 में भारत और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के समूह के देशों के संगठन के बीच संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी तक बढ़ाने के बाद पहला शिखर सम्मेलन होगा।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा, कि शिखर सम्मेलन भारत-आसियान संबंधों की प्रगति की समीक्षा करेगा और सहयोग की भविष्य की दिशा तय करेगा।
इस वर्ष आसियान शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता इंडोनेशिया द्वारा "आसियान मामले: विकास का केंद्र" विषय के तहत की जाएगी। यह विषय इंगित करता है, कि इंडोनेशिया को उम्मीद है कि आर्थिक विकास के केंद्र के रूप में आसियान प्रासंगिक और महत्वपूर्ण होगा।
एक बयान के मुताबिक, पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन आसियान देशों के नेताओं और भारत सहित इसके आठ डायलॉग पार्टनर्स को क्षेत्रीय और वैश्विक महत्व के मुद्दों पर. विचारों का आदान-प्रदान करने का अवसर प्रदान करेगा।

अगस्त में, आसियान-भारत के आर्थिक मंत्रियों की इंडोनेशिया में बैठक हुई थी और इस साल की बैठक का मुख्य एजेंडा आसियान-भारत माल व्यापार समझौते (एआईटीआईजीए) की समय पर समीक्षा करना है, जिस पर 2009 में हस्ताक्षर किए गए थे।
2018 में, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशियाई राष्ट्रपति विडोडो के निमंत्रण पर जकार्ता का दौरा किया। इस यात्रा के दौरान, दोनों नेता इंडोनेशिया और भारत के बीच द्विपक्षीय संबंधों को एक नए युग में ले जाने के लिए एक नई व्यापक रणनीतिक साझेदारी स्थापित करके सभी क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने पर सहमत हुए।
चीन को काउंटर करने के लिए पहल
इंडो-पैसिफिक में चीन की आक्रामकता को रोकने के लिए भारत के लिए आसियान काफी जरूरी है और आसियान के सभी देश, दक्षिण चीन सागर, जिसपर चीन अपना दावा करता है, और हाल ही में अपने स्टैंडर्ट मैप में जिसे अपना हिस्सा बताया था, उस क्षेत्र में आते हैं।
आसियान के सभी देश, इंडोनेशिया, मलेशिया, ब्रूनेई, कंबोडिया, लाओस, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम का चीन के साथ सीमा को लेकर विवाद चल रहा है। हालांकि, भारत इस समूह का सदस्य नहीं है, लेकिन आसियान, भारत की एक्ट-ईस्ट नीति का स्तंभ है।
आसियान के सभी देश चीन के साथ सीमा साझा करते हैं और दक्षिण चीन सागर में इन देशों का चीन के साथ गहरा विवाद है, लिहाजा ये सभी देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता, समुद्री सुरक्षा, नेविगेशन की स्वतंत्रता को बनाए रखने जैसे मुद्दों पर भारत के साथ खड़े रहते हैं।
लिहाजा जी20 की अपार व्यस्तताओं और कई द्विपक्षीय बैठकों के बीच भी पीएम मोदी ने आसियान में शामिल होने का वक्त निकाला है, जो बताता है, कि रणनीतिक तौर पर भारत, दक्षिण चीन सागर में कितना आक्रामक होना चाहता है।












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