विन्सटन चर्चिल के क्लब में शामिल होंगे PM नरेन्द्र मोदी, अमेरिकी कांग्रेस को दोबारा संबोधित कर बनाएंगे इतिहास

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अमेरिका की राजकीय यात्रा ऐतिहासिक मानी जा रही है, क्योंकि ये भारत और अमेरिका के बीच गहरी साझेदारी और दोस्ती का प्रतीक बनेगा।

narendra modi us visit

PM Modi US Visit: भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विश्व के उन कुछ चुनिंदा नेताओं में शामिल हो जाएंगे, जब वो दूसरी बार अमेरिका के कांग्रेस को संबोधित करेंगे।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 22 जून को अमेरिका में राजकीय यात्रा पर होंगे और भारत के प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेन्द्र मोदी की ये अमेरिका की ये पहली राजकीय यात्रा होगी। साल 2016 में भी पीएम मोदी ने अमेरिका के कांग्रेस को संबोधित किया था, लेकिन उस वक्त वो अमेरिका के राजकीय यात्रा पर नहीं थे।

पीएम मोदी कैसे बनाएंगे इतिहास

पीएम मोदी इस बार अमेरिका की राजकीय यात्रा के साथ साथ अमेरिका के कांग्रेस को भी संबोधित करने वाले हैं और ये दोनों, दो अलग अलग सम्मान हैं। इसे इस तरह से समझिए, कि अमेरिका की सरकार में दो शाखाएं हैं, एक एक्जक्यूटिव और दूसरा लेजिस्लेटिव।

अमेरिका की सरकार के दोनों अंग अलग अलग हैं और किसी वैश्विक नेता को दोनों जगहों से न्योता मिलने दो अलग अलग सम्मान हैं। पीएम मोदी से पहले इसी साल दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यून सुक योल और पिछले साल दिसंबर में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी अमेरिका की राजकीय यात्रा की थी।

उन दोनों नेताओं ने व्हाइट हाउस से न्योता मिलने के बाद अमेरिका की राजकीय यात्रा की थी, लेकिन दोनों नेताओं को अमेरिकी कांग्रेस की तरफ से न्योता नहीं भेजा गया। जबकि, पीएम मोदी की पहली राजकीय यात्रा में उन्हें दोनों जगहों से न्योता भेजा गया है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से पहले यूनाइटेड किंगडम के पूर्व प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल को अमेरिका की तरफ से ये सम्मान हासिल हुआ था। यानि, कहा जा सकता है, कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, विंस्टन चर्चिल के क्लब में शामिल हो गये हैं।

हालांकि, यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को भी ये सम्मान हासिल हुआ था, लेकिन नेतन्याहू के सम्मान पर इसलिए सवाल उठते हैं, क्योंकि व्हाइट हाउस इस बात के खिलाफ था, कि वो अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित करें। लिहाजा, जब नेतन्याहू ने यूएस कांग्रेस को संबोधित किया, उस वक्त तत्कालीन उपराष्ट्रपति जो बाइडेन यूएस कांग्रेस में गये तक नहीं थे, जबकि रिवाज के मुताबिक उन्हें नेतन्याहू के पीछे बैठना था। आपको बता दें, कि इतिहास में अमेरिकी कांग्रेस को सबसे ज्यादा तीन बार बेंजामिन नेतन्याहू ने संबोधित किया है।

वहीं, वलोडिमिरी जेलेंस्की को सिर्फ और सिर्फ रूस के आक्रमण की वजह से अमेरिका में ये सम्मान मिला है।

लिहाजा, एक्सपर्ट्स का कहना है, कि इसे सिर्फ पीएम मोदी को मिल रहे ऐतिहासिक सम्मान के तौर पर ही नहीं देखा जाए, बल्कि इसे इस तरह से देखा जाए, कि अमेरिका भारत के लिए रेड कार्पेट बिछा रहा है।

अमेरिका क्या संकेत दे रहा है?

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दौरे से पहले अमेरिका के रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन एक दिन पहले ही भारत का दौरा खत्म कर गये हैं। इस दौरान उन्होंने भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच डिफेंस सेक्टर को लेकर बड़े समझौते किए गये हैं।

इस समझौते की सबसे बड़ी बात ये है, कि अमेरिका भारत में रक्षा उपकरणों के निर्माण के लिए तैयार हो गया है, जिसका असर 10-15 सालों के बाद दिखना शुरू हो जाएगा, जब भारत में नई टेक्नोलॉजी के साथ हथियारों का निर्माण शुरू हो जाएगा।

इसके साथ ही दोनों देशों के बीच रक्षा स्टार्ट-अप पारिस्थितिक तंत्र के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भी समझौता किया गया है।

लॉयड ऑस्टिन के दौरे को लेकर भारतीय रक्षा मंत्रालय ने कहा, कि "दोनों रक्षा मंत्रियों ने यूएस-इंडिया डिफेंस इंडस्ट्रियल कोऑपरेशन के लिए एक रोडमैप तैयार किया, जो अगले कुछ वर्षों के लिए नीतिगत दिशा का मार्गदर्शन करेगा।"

ये घोषणा अपने आप में इसलिए अहम है, क्योंकि अब भारतीय कंपनियां, अमेरिका की हथियार कंपनियों के साथ मिलकर भारत और अमेरिका में हथियारों और अन्य उपकरणों का निर्माण करेंगी, जिससे ना सिर्फ टेक्नोलॉजी के मामले में भारत को फायदा होगा, बल्कि आत्मनिर्भर भारत को भी बड़ा बल मिलेगा।

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    इसके अलावा, पीएम मोदी की यात्रा के दौरान अमेरिका भारत में जेट इंजन के निर्माण की घोषणा भी करेगा। यानि, अगले कुछ सालों में भारत में जेट इंजन का निर्माण होगा और ये किसी सपने के सच होने जैसा है।

    यानि, अमेरिका साफ तौर पर संकेत दे रहा है, कि वो भारत के आगे बिछ गया है। उसके पीछे की वजहें कई हो सकती हैं और बड़ी वजह अमेरिका की चीन वाली मजबूरी भी है, लेकिन इससे भारत की बढ़ती वैश्विक शक्ति को कमतर करके आंका नहीं जा सकता है।

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