'मुझे आश्चर्य हो रहा है...' मुस्लिमों पर एजेंडाधारी नेताओं, पश्चिमी देशों की मीडिया को PM मोदी का करारा जवाब
PM Modi at Joint Presser: भारत के खिलाफ पश्चिमी देशों की मीडिया ने हमेशा से एक प्रोपेगेंडा चलाया है और लोकतंत्र और अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर लगातार भारत को बदनाम करने की कोशिश की है। लेकिन, आज व्हाइट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पीएम मोदी ने एजेंडाधारी नेताओं और पत्रकारों की बोलती बंद कर दी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संयुक्त राज्य अमेरिका की राजकीय यात्रा के दौरान पश्चिमी देशों की मीडिया लगातार भारत को बदनाम करने के लिए प्रोपेंगेडा स्टोरीज चला रही थी। न्यूयॉर्क टाइम्स ने पीएम मोदी के दौरे को लेकर लेख लिखा है, कि 'मोदी की मेजबानी में, बाइडेन ने लोकतंत्र की चिंताओं को पीछे धकेल दिया।' लेकिन, जब व्हाइट हाउस में प्रधानमंत्री मोदी से अल्पसंख्यकों और मानवाधिकार को लेकर सवाल पूछा, तो पीएम मोदी ने उनकी बोलती बंद कर दी।

प्रोपेगेंडा अभियान को करारा जवाब
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रधानमंत्री मोदी से भारत में अल्पसंख्यकों के अधिकार को लेकर सवाल पूछा गया, जिसपर करारा जवाब देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, कि "मुझे आश्चर्य हो रहा है, कि आप लोग ऐसा कह रहे हैं। भारती लोकतंत्र में भेदभाव का सवाल ही पैदा नहीं होता है।" प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, कि 'भारत लोकतंत्र में जीता है।'
आपको बता दें, कि सीएनएन, वॉशिंगटन पोस्ट और न्यूयॉर्क टाइम्स जैसे मीडिया संस्थानों ने भारत के खिलाफ लगातार प्रोपेगेंडा अभियान चलाया है।
CNN ने पीएम मोदी के दौरे को लेकर अपने Analysis आर्टिकल में भारतीय लोकतंत्र की मौजूदा स्थिति पर सवाल उठाया है। सीएनएन के इस आर्टिकल के हेडलाइंस में लिखा है, कि "अमेरिका ने भारत को लोकतंत्र की जननी बताया है, लेकिन अमेरिका के ज्यादातर लोग इससे खुश नहीं हैं।"
सीएनएन के इस आर्टिकल में लिखा है, कि "भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को एक बार संयुक्त राज्य अमेरिका ने बैन कर दिया था और "धार्मिक स्वतंत्रता के गंभीर उल्लंघन" के लिए वीजा देने से इनकार कर दिया गया था, उन्हें लगभग एक दशक तक अमेरिका में प्रवेश करने से प्रभावी रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया था, लेकिन नौ वर्ष पहले उनपर प्रतिबंध को हटाए जाने के बाद से, मोदी को व्हाइट हाउस ने काफी गर्मजोशी से गले लगाया है।"
वहीं, वॉशिंगटन पोस्ट के वेबसाइट पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दौरे को लेकर सिर्फ एक आर्टिकल दिख रही है, जिसका शीर्षक है, 'मोदी की अमेरिकी यात्रा एक बड़ा, भले ही शांत, लेकिन चीन को संकेत है।"
इस लेख में लिखा गया है, कि "पिछले कई वर्षों में संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत द्वारा जारी संयुक्त बयानों में उत्तर कोरिया के मिसाइल परीक्षणों की निंदा की गई है, तालिबान से मानवाधिकारों का सम्मान करने का आह्वान किया गया है और म्यांमार में हिंसा को समाप्त करने की अपील की गई है। लेकिन कभी भी भारत के प्राथमिक प्रतिद्वंद्वी चीन का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है।"
यानि, 140 करोड़ की आबादी वाले भारत को लेकर पश्चिमी देशों के पास कुछ और कवर करने के लिए नहीं था, जबकि खुद अमेरिका कमजोर हो रहा है और अमेरिका को अब भारत की जरूरत है।
कैसे प्रोपेगेंडा चलाया जाता है, जानिए
भारतीय मीडिया विश्लेषक अमोल पार्थ ने साल 2021 में एक लेख लिखा था, जिसका शीर्षक था 'एन एनालिसिस ऑफ ग्लोबल मीडिया कवरेज ऑफ इवेंट्स इन इंडिया', जिसे द कम्युनिकेटर में प्रकाशित किया
गया था।
इस लेख में "द न्यूयॉर्क टाइम्स, वाशिंगटन पोस्ट, वॉल स्ट्रीट जर्नल, टाइम और द गार्जियन के 3,000 से ज्यादा भारत-संबंधित लेखों का अध्ययन किया गया था। इनमें से हर एक समचार पत्र के 500-500 लेखों का अध्ययन किया गया था। अमोल पार्थ ने अपनी रिपोर्ट में कहा, कि इन 3000 लेखों के हेडलाइंस में 10 शब्दों का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया गया था और ये शब्द थे, डर, नफरत, हिंसा, दंगा, हिंदू, मुस्लिम, कश्मीर, गाय, भीड़ और विरोध।
यानि, समझ सकते हैं, कि पश्चिमी देशों की मीडिया भारत विरोधी एजेंडा चलाता है और आश्चर्य ये है, कि इसमें कई भारतीय पत्रकार भी शामिल होते हैं। हालांकि, इस बार प्रधानमंत्री मोदी ने करारा जवाब जरूर दिया है, लेकिन इस बात की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए, कि इस तरह के लेख छपने बंद हो जाएंगे।












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