पीएम मोदी ने Joe Biden को गिफ्ट की चांदी की ट्रेन, Jill Biden को भेंट की पश्मीना शॉल, क्यों हैं ये उपहार खास?

PM Modi US Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को अपनी अमेरिका यात्रा के पहले दिन क्वाड नेताओं के शिखर सम्मेलन के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को खास तोहफा दिया। पीएम मोदी ने राष्ट्रपति बाइडेन को एक चांदी की प्राचीन ट्रेन मॉडल और प्रथम महिला जिल बाइडेन को एक पश्मीना शॉल उपहार में दिया है।

ये उपहार दोनों देशों के बीच मजबूत कूटनीतिक संबंधों को दिखाते हैं। दोनों देशों के बीच के संबंधों को लेकर पीएम मोदी और राष्ट्रपति बाइडेन द्वारा दिए गए संयुक्त बयान में "21वीं सदी की परिभाषित साझेदारी" कहा गया था।
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PM Modi Joe Biden

क्या है पीएम मोदी के उपहार में खास?

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा गिफ्ट की गई प्राचीन ट्रेन मॉडल 92.5 प्रतिशत चांदी से बनी है। महाराष्ट्र के कारीगरों की शिल्पकला को प्रदर्शित करने वाला एक दुर्लभ हाथ से उकेरा गया पीस है। यह ट्रेन मॉडल विस्तृत धातु कार्य, रिपोसे तकनीकों (उल्टी तरफ से हथौड़े से उठी हुई डिज़ाइन बनाने) और जटिल फिलिग्री कार्य का उपयोग देश की कलात्मक विरासत को दर्शाता है और भाप इंजन युग को ट्रिब्यूट भी देता है।

यह गिफ्ट भारत और अमेरिका के बीच संबंधों के महत्व को भी प्रदर्शित करता है। तोहफे में दिए गए मॉडल पर "दिल्ली-डेलावेयर" लिखा हुआ है। क्वाड नेताओं का शिखर सम्मेलन डेलावेयर में आयोजित किया गया था, जो राष्ट्रपति जो बाइडेन का गृहनगर है, जिससे यह अवसर विशेष रूप से खास बन जाता है।

PM Modi Gift

जिल बाइडेन के लिए पश्मीना शॉल

प्रधानमंत्री ने प्रथम महिला जिल बाइडेन को एक पेपरमेशी बॉक्स में पश्मीना शॉल भी भेंट की, जो जम्मू और कश्मीर में निर्मित इस वस्त्र की सुंदरता और इसके अनोखे डिजाइनों का एक उदाहरण है। पश्मीना शॉल पीढ़ियों से विरासत के रूप में दी जाती हैं, और अमेरिका की प्रथम महिला को उपहार के रूप में इसे देना विशेष महत्व रखता है।

लद्दाख में मूलतः पाई जाने वाली गथांगी बकरी के फर से शॉल का मुख्य हिस्सा 'पश्म' बनाया जाता है। इसकी महीन और मुलायम रेशा हाथ से कंघी करके और हाथ से सूत में काता जाता है, जो क्षेत्र के कारीगरों को पीढ़ियों से सिखाई गई तकनीकों द्वारा किया जाता है। क्षेत्र के पौधों और खनिजों से प्राप्त प्राकृतिक रंग शॉल को मनमोहक रंगों से सजाते हैं।

पश्मीना शॉल पारंपरिक रूप से जम्मू और कश्मीर में बने पेपरमेशी बॉक्स में दी जाती हैं। ये बॉक्स न केवल उपयोगी होते हैं बल्कि स्वयं में एक कला का कार्य भी होते हैं।
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