चीन पर नसीहत, बुरे दिनों में साथ देने का वचन.. PM मोदी से मिले श्रीलंकन राष्ट्रपति.. जानें भारत से क्या मिला?
Sri lanka- India News: दो दिनों के भारत दौरे पर पहुंचे श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच आज नई दिल्ली में द्विपक्षीय बैठक हुई है। पिछले साल जुलाई महीने में ही राष्ट्रपति बनने वाले रानिल विक्रमसिंघे की ये पहली आधिकारिक भारत यात्रा है और इस दौरान भारत ने श्रीलंका को वचन दिया है, कि वो हमेशा उसके साथ खड़ा रहेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में श्रीलंकन राष्ट्रपति के साथ बैठक के बाद कहा है, कि भारत और श्रीलंका के लिए एक-दूसरे के "सुरक्षा हितों" और "संवेदनशीलताओं" को ध्यान में रखते हुए मिलकर काम करना जरूरी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस दौरान हिन्द महासागर में चीनी घुसपैठ को लेकर श्रीलंका को सख्त नसीहत दी है।

विक्रमसिंघे प्रशासन ने पिछले साल चीन के जासूसी जहाज को श्रीलंका आने की इजाजत दी थी, जिसकी वजह से भारत को अपने एक मिसाइल परीक्षण को टालना पड़ा था और उसके बाद से भी भारत, श्रीलंका से काफी नाराज चल रहा था। माना जा रहा है, कि श्रीलंका ने भारत को इस तरह के स्टंट को लेकर भरोसा दिया है।
मोदी-विक्रमसिंघे की दिल्ली में बैठक
भारत की दो दिवसीय यात्रा पर आए श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने कहा कि दोनों देश अपनी आर्थिक साझेदारी को बढ़ाने के लिए एक "दृष्टिकोण" पर सहमत हुए हैं।
नई दिल्ली में श्रीलंकाई राष्ट्रपति के साथ बातचीत के बाद पीएम मोदी ने शुक्रवार को घोषणा की है, कि भारत और श्रीलंका के बीच पेट्रोलियम लाइन और भूमि पुल कनेक्टिविटी पर काम शुरू किया जाएगा।
एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, श्रीलंका के राष्ट्रपति ने श्रीलंका के हालिया आर्थिक संकट के दौरान भारत द्वारा दिए गए समर्थन के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को धन्यवाद दिया। नई दिल्ली ने जनवरी से जुलाई 2022 के बीच कोलंबो को लगभग 4 अरब डॉलर की त्वरित सहायता प्रदान की थी।
विक्रमसिंघे ने कहा, "पीएम मोदी और मेरा मानना है, कि भारत के दक्षिणी हिस्से से श्रीलंका तक बहु-परियोजना पेट्रोलियम पाइपलाइन के निर्माण से श्रीलंका को ऊर्जा संसाधनों की किफायती और विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित होगी।"
प्रधानमंत्री मोदी ने क्या कहा?
बैठक के बाद ज्वाइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा, कि भारत की 'पड़ोस प्रथम' नीति में श्रीलंका का विशेष स्थान है और दोनों देशों के सुरक्षा हित और विकास आपस में जुड़े हुए हैं।
श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे के साथ बातचीत के बाद मीडिया को अपनी टिप्पणी में प्रधान मंत्री ने कहा, कि वे दोनों देशों के बीच हवाई संपर्क बढ़ाने पर सहमत हुए हैं।
इसके अलावा, उन्होंने कहा कि संकट के समय में भारत श्रीलंका के लोगों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, कि "भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति और 'सागर' प्रोजेक्ट, दोनों में श्रीलंका का महत्वपूर्ण स्थान है। आज हमने द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर अपने विचार साझा किए हैं। हमारा मानना है, कि भारत और श्रीलंका के सुरक्षा हित और विकास आपस में जुड़े हुए हैं।"
उन्होंने कहा, कि "हम भारत और श्रीलंका के बीच हवाई संपर्क बढ़ाने पर सहमत हैं। व्यापार और लोगों की यात्रा बढ़ाने के लिए, हमने तमिलनाडु में नागापट्टिनम और श्रीलंका में कांकेसंतुरई के बीच यात्री नौका सेवाएं शुरू करने का फैसला लिया है।"

आपको बता दें, कि श्रीलंका में पर्यटन बढ़ाने के लिए श्रीलंका की सरकार चाहती है, कि ज्यादा से ज्यादा भारतीय श्रीलंका घूमने आएं, लिहजा श्रीलंका तक पहुंच आसान बनाने के लिए नौका सेवाएं शुरू की गई हैं, जो एडवेंचर से भरा है और इसके जरिए, लोग समुद्र में नाव से श्रीलंका तक जा पाएंगे।
पीएम मोदी ने श्रीलंकाई राष्ट्रपति और उनके प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए उन्हें कार्यालय में एक साल पूरा करने पर बधाई दी।
उन्होंने कहा, कि "मैं उन्हें इसके लिए बधाई देता हूं। पिछले साल श्रीलंका के लोगों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन एक करीबी दोस्त की तरह हम संकट के समय में श्रीलंका के लोगों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे हैं।"












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